ईडी के निशाने पर अशोक गहलोत, वैभव गहलोत और हिमांशी गहलोत भी



—अशोक गहलोत के बेटे और बहू के नाम करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति, भाजपा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने दावा किया कि गहलोत परिवार ने मॉरिशस से अवैध तरीके पैसा एक नंबर में किया है।


राजस्थान इन दिनों पेपर माफिया पर प्रवर्तन निदेशालय के छापों के चलते चर्चित है। दो दिन पहले ही ईडी ने 28 ठिकानों पर छापेमारी की है। हालांकि, सबूत जुटा लिए गये हैं, लेकिन भी भी आरपीएससी अध्यक्ष संजय क्षेत्रिये से पूछताछ नहीं की है। इस बीच भाजपा ने अशोक गहलोत की पूरी सरकार को ही भ्रष्टाचार के लपेटे में ले लिया है। 

डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की प्रेस वार्ता का पूरा ब्योरा—

भाजपा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने दावा किया है कि अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और बहू हिमांशी गहलोत के द्वारा पांच सितारा होटलो में बेनामी व्यवसाय किया जा रहा है और ऐसे व्यवसायों से अर्जित की गयी धनराशि को विभिन्न माध्यमों से एकत्र किया जाकर प्राप्तशुदा राशि  को आगे वैभव गहलोत और हिमांशी गहलात की एक डमी  कंपनी ‘‘सन  लाइट  कार रेंटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड‘‘ में स्थानांतरित किया जा रहा है।

 

अशोक गहलोत ने अपनी सरकार के समय में उक्त कम्पनी ‘‘ट्राईटन होटल एंड रिसाॅर्ट प्राइवेट लिमिटेड‘‘, फेयर मौन्ट होटल को निर्माण की स्वीकृति जे.डी.ए. द्वारा दिनांक 21.08.2009 को जरिये पंजीकृत लीज डीड एवं स्वीकृत नक्शा दिया गया था एवं रीको दवारा फेयरमाउंट होटल का निमार्ण दिनाकं नवंबर 2009 को स्वीकृत किया गया था।

 

होटल फेयरमौंट जयपुर एक कंपनी ‘‘ट्राईटन होटल एंड रिसाॅर्ट प्राइवेट लिमिटडे ‘‘ के स्वामित्व में है। गहलात ने एक शैल और फर्जी कम्पनी सिवनार होल्डींगस लिमिटेड के नाम पर 96,75,00,000/- रूपये मॉरीशस से बेनामी रूप से निवेश किया गया है। प्रथम रूप से ‘‘सिवनार होल्डींगस लिमिटेड‘‘ एक फर्जी एवं शैल कम्पनी है जो कि मूल कंपनी ‘‘जेटीसी फिड्सीरी सर्विसेट लिमिटेड‘‘ (पूर्व नाम मिनर्वा फिडयूशीयरी लिमिटडे) मारीशियस के पते पर पंजिकतृ है।


उक्त कथन के प्रमाण परिशिष्ट 2 पर अवलोकनार्थ संलग्न है, जिससे यह स्पष्ट है कि ट्राइटन होटल एण्ड रिसोर्ट प्रा. लि. ;फेयरमौन्ट में पचास प्रतिशत की हिस्सेदारी रतनकान्त शर्मा एवं उनकी पत्नि जूही शर्मा की है व अन्य बेनामी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी गहलोत की ‘सिवनार होल्डींगस  लिमिटेड‘‘  फर्जी एवं शैल मारीशियस की कम्पनी के नाम से है।

 

मारीशियस की शैल एवं डमी कम्पनी ‘सिवनार होल्डींगस लिमिटेड‘‘ मूल रूप से ‘‘जेटीसी फिड्यूशीयरी सर्विसेस लिमिटेड‘‘ मारीशियस के द्वारा बनाई गई है। प्रथम रूप से  ‘सिवनार होल्डींगस  लिमिटेड‘‘,  ‘जेटीसी फिडयूसीयरी सर्विसेज लिमिटेड‘‘ के पते पर ही पंजीकृत है, जो सुईट 2004, लेवल 2, अलेक्जेंडर हाउस एबेने माॅरीशियस  में है। ‘जेटीसी फिडयूशीयरी सर्विसेज लिमिटेड‘‘ पूर्व में मिनर्वा फिडयूशीयरी लिमिटेड थी एवं  मिनर्वा  फिडयूशीयरी  लिमिटेड को जेटीसी फिडयूशरीयरी सर्विसेस लिमिटडे द्वारा  वर्ष 2018 में अधिगृहित कर लिया गया एवं वर्तमान में इसका नाम जेटीसी फिडयूशीयरी सर्विसेस लिमिटेड ही है। 


‘सिवनार होल्डींगस लिमिटेड‘ के डायरेक्टर नवाज नीरज और थमोथिराम मनोगरन है, जो कि वास्तव में जेटीसी फ्डियूशियरी लिमिटेड (पूर्व में मिनर्वा फिडयूशीयरी लिमिटेड) के व्यक्ति  है एवं थमोथिराम मनोगरन, वास्तव में मिनर्वा फिडयूशीयरी लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक थे, जिसे बाद में जेटीसी फिडुशियरी लिमिटेड द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया था और  अब थमोथिराम मनोगरन इस मनी लाॅन्ड्रिंग और फंड मैनेजमेंट कंपनी जेटीसी फिडुशियरी (माॅरीशस) लिमिटेड के डायरेक्टर है। 


नवाज नीरज भी जेटीसी फिडुशियरी (माॅरीशस) लिमिटेड के व्यक्ति हैं, जो कि जे.टी.सी. में प्राइवेट क्लाइंट के डायरेक्टर के पद पर हैं। जे.टी.सी. में उक्त प्राइवेट क्लाइंट गहलोत परिवार से हैं जो काले धन को मारी​शियस की कम्पनी के जरिये काले धन को सफेद करने में लगे हुये हैं।

 

सबसे प्रमुख रूप से यहां उल्लेख किया जाना आवश्यक है कि जे.टी.सी. फिड्यूशीयरी लिमिटेड (पूर्व में मिनर्वा फिडयूशीयरी लिमिटेड के नाम से थी) एक हवाला कम्पनी है एवं पनामा पेपर्स लीक स्कैम में लिप्त है।


पनामा पेपर्स लीक में इंटरनेशनल कंसोर्टियम ओफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट एसोशिएशन के द्वारा मनी लान्डरिंग  एवं अघोषित आय रखने वाले रसूखदार व्यक्तियों के नाम  का डाटा लीक किया गया था, जिसमें 953 भारतीय निवेशकों के नाम आये थे एवं पनामा पेपर्स लीक में 20,000 करोड रूपये की अघोषित आय पाया जाना संसद में दिनांक 27.07.2021 को वित मंत्रालय केन्द्र सरकार द्वारा स्वीकार किया गया था और परिणामस्वरूप उक्त अघोषित आय पर 142 करोड रूपये का कर आयकर विभाग ने वसूल किया था।


यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है कि मिनर्वा होल्डिंग  लिमिटेड एक हवाला कम्पनी है जो कि पनामा पेपर्स लीक में लिप्त थी एवं सिवनार फिडयूषियरी  लिमिटेड  गहलोत  परिवार के लिये जे. टी.सी फिड्युसीएरी सर्विसेज लिमिटेड द्वारा बनाई गई एक शैल एवं डमी कम्पनी है, जिसका एक मात्र उद्धेश्य गहलोत परिवार के द्वारा कमाये गये काले धन को मारीशियस रूट के जरिये सफेद करने का है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि टाइटन होटलस एण्ड रिसोर्ट लिमिटेड

फैयरमौंट होटल एवं सिवनार होल्डींगस लिमिटेड, उक्त दोनों ही कम्पनियां वर्ष 2007 में एक साथ बनाई गई है एवं सिवनार होल्डींगस लिमिटेड प्रथम दिन से सदैव ही फेयरमौन्ट होटल में 50 प्रतिशत हिस्सेदार बनी आ रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सिवनार होल्डींगस लिमिटेड एक वास्तविक निवेशक नहीं है एवं गहलोत परिवार की हिस्सेदारी रखने के लिये बनाई गई एक शैल व डमी कम्पनी है।

 

ट्राइटन  होटलस  एण्ड  रिसोर्ट लिमिटेड फेयरमौन्ट होटल  एवं सिवनार होल्डींगस लिमिटेड के स्थापना वर्ष 2007 से संबंधित दस्तावेज परिषिष्ट 6 पर अवलोकनार्थ संलग्न है।

 

यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि शिवनार होल्डिंग्स लिमिटेडने घाटे में चल रही कंपनी फेयरमाउंट होटल में आधा स्वामित्व भारी प्रीमियम कीमत पर खरीदा है तथा शिवनार होल्डिंग लिमिटेड ने मूल रूप से कंपनी के 50 प्रतिशत स्वामित्व के लिए भारी धनराशि का निवेश किया था और होटल के  वास्तविक  बाजार  मूल्य  को  संतुलित  करने  के  लिए  शेयरों  को  कम हिस्सेदारी के लिए एक 100 रूपये के शेयर को 39,000 रूपये व 2,200 रूपये प्रीमियम मूल्य पर खरीदा गया है। 


इस  प्रकार  शिवनार  होल्डिंग  लिमिटेड,  के  होटल  फेयरमाउंट  में कुल 4,27,500 की शेयरधारिता है। इसके अलावा वैभव गहलोत लंबे समय तक होटल फेयरमाउंट में कानूनी सलाहकार थे और उनके निर्देश पर गहलोत के पैसे का सारा निवेश ऐसे ही बेनाम तरीके से किया जाता है।


वैभव गहलोत का रतनकांत शर्मा और होटल फेयरमाउंट से सीधा संबंध है जो कि विस्तार में निम्न उल्लेख है -

 वैभव गहलोत लंबे समय तक होटल फेयरमौंट में कानूनी सलाहकार रहे हैं एवं फेयरमाउंट में बोगस ट्रेवलिंग बिल बनाये जा रहे हैं और ऐसे सभी बिलों का भुगतान वैभव गहलोत और उनकी पत्नि हिमांशी गहलोत की कंपनी ‘‘सन लाइट कार रेंटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड‘‘ को किया  जाता हैं। ‘‘सन लाइट कार रेंटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटडे‘‘ में वैभव गहलोत और उनकी पत्नि हिमांशी गहलोत मालिक व डायरेक्टर हैं।


यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रतनकांत शर्मा जो कि गहलोत के कारोबार का प्रबंधन करते है और होटल फेयर माउंट जयपुर और रैफल्स उदयपुर होटल के मालिक है, तथा इससे पहले गहलोत की कम्पनी ’’सनलाईट कार रेन्टल सर्विसेज प्राईवेट लिमिटेड में वैभव गहलोत के साथ बराबर हिस्सेदारी 50 प्रतिशत के मालिक थे एवं बाद में रतनकान्त शर्मा बदनियतिपूर्वक व जानबूझकर उक्त कम्पनी से बाहर हो गये और तभी से  फेयर माउंट  होटल्स  से  करोड़ों रुपये  प्रतिवर्ष जाली एवं  फ़र्जी  बिल का भुगतान सन लाइट कार रैंटल में  वैभव गहलोत को किया जा रहा है। इन दो होटलों में अपने लाभ के हिस्से के रूप में गहलोत को धन हस्तांतरित करने के लिए यह सिर्फ एक नकली जाली प्रक्रिया है। 


फेयरमांउट का निर्माण खसरा नंबर २०६० एवं २०६१ध्२२६७ पर  के वल  15 प्रतिशत भूमि पर हुआ था, लेकिन  रतनकांत  शर्मा द्वारा वैभव गहलोत के साथ मिलकर राजनीतिक रसूक का दुरुपयोग करते होटल का निर्माण लगभग पूर्ण भूमि पर कर लिया है। इतना ही नहीं वहां  २०—३० वर्ष से  ​महिला एवं बच्चों समेत रह रहे बंजारा परिवारों को जबरन मारपीट कर खसरा नंबर 204 की चरागाह भूमि से बेदखल करने की कोशिश करी है, ताकी वहां भी अवैध रुप से होटल की नई बिल्डिंग का निर्माण हो सके। 

जिसके  चलते जयपुर विकास प्राधिकरण के अफसरों द्वारा भी  गैरकानूनी नोटिस देकर उक्त भूमि को नाले की भूमि बता के  बंजारों को बेदखल करने की कोशिश करी है, जबकि जमाबंदी अनुसार वहां कोई नाला नहीं है। खसरा नंबर 204 तहसील आमेर चरागाह ​भूमि है एवं राजस्थान न्यायालय के आदेश दिनांक 08.12.2015 अनुसार जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी बिना बंजारों के परिरवार का पुनर्वास  करे बिना इस सार्वजनिक भूमि पर लंबे समय से चले आ रहे कब्जे से बेदखल नहीं कर सकते। 

परंतु गेहलोत सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त होकर अपने होटल से गैरकानूनी वित्तीय लाभ के लिए एवं होटल की नई बिल्डिंग के निर्माण के लिए पूर्व में भी बंजारों के परिवार को उक्त जमीन खसरा नंबर 204 तहसील आमेर से जबरन गुंडागर्दी से एवं जेडीए के अधिकारियों के साथ मिली—भगत करके होटल फेयरमाउंट के  मालिकों ने बंजारों के परिवार को महिला बच्चों समेत 150 मीटर बेदखल कर धकेल दिया था। अब दोबारा वहां से बंजारों को मार भगाना चाहते हैं।

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