फर्जी पुलिस चौकी और टेंडर घोटाले में मंडी सचिव दोषी, एफआईआर के निर्देश

 

किसान आंदोलन के बाद बड़ा खुलासा

टोंक जिले में किसान महापंचायत के आंदोलन के बाद प्रशासनिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। कृषि उपज मंडी समिति निवाई के सचिव कमल किशोर सोनी को गंभीर अनियमितताओं का दोषी पाया गया है। मामले में फर्जी पुलिस चौकी खोलने और अपने भांजे को टेंडर देकर अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सिद्ध हुए हैं।

क्या है पूरा मामला?

किसान महापंचायत के युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी के नेतृत्व में किसानों ने इस मुद्दे को लेकर तीन दिन तक अनिश्चितकालीन अनशन किया। आंदोलन के दबाव में जिला प्रशासन को जांच करवानी पड़ी।

जिला कलेक्टर टोंक द्वारा उपखंड अधिकारी हुकमीचंद रोलानिया को जांच सौंपी गई, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में मंडी सचिव को दोषी ठहराया। यह रिपोर्ट गांधी पार्क, टोंक में चल रहे अनशन स्थल पर किसानों को सौंपी गई।

जांच में क्या निकला?

फर्जी पुलिस चौकी खोलने की पुष्टि हुई है। टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी कर रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने की बात सच साबित हुई है और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन का मामला साबित हो गया है।

इसके अलावा, कृषि विपणन बोर्ड के क्षेत्रीय उपनिदेशक (अजमेर) ने भी 27 मार्च की अपनी जांच रिपोर्ट में कमल किशोर सोनी को दोषी माना।

पुलिस की कार्रवाई शुरू

कार्यालय पुलिस अधीक्षक, टोंक द्वारा मामले को गंभीर मानते हुए निवाई थाना प्रभारी (SHO) को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। दस्तावेज़ के अनुसार, “परिवाद में अंकित तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करें।”

किसानों की चेतावनी

किसानों का आरोप है कि कृषि विपणन निदेशक राजेश चौहान पहले भी आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास कर चुके हैं। इसी के विरोध में अब 101 किसान घंटाघर, टोंक पर उनके खिलाफ अनशन शुरू करने की तैयारी में हैं।

मामला पहुंचा राज्यपाल तक

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की शिकायत राज्यपाल तक भी पहुंची थी, जिसके बाद कृषि मंत्री स्तर पर जांच के आदेश दिए गए थे। किसान आंदोलन के दबाव में प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी और जांच में बड़े स्तर की अनियमितताएं सामने आईं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दोषी अधिकारियों पर कब तक कड़ी कार्रवाई होती है और क्या निलंबन या गिरफ्तारी जैसे कदम उठाए जाते हैं।

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