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देवर्षि नारद जयंती पर 3 पत्रकार सम्मानित, सियासी भारत के रामगोपाल जाट को डिजिटल मीडिया में नारद पुरस्कार

——जोजरी नदी पर की गई खोजी रिपोर्टिंग के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार को दिए निर्देश

जयपुर। विश्व संवाद केंद्र द्वारा पाथेय भवन में आयोजित देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में शनिवार को तीन पत्रकारों को नारद पुरस्कार से नवाजा गया। डिजिटल मीडिया में 'सियासी भारत' के रामगोपाल जाट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में टाइम्स नाउ के रिपोर्टर लखबीर सिंह शेखावत और प्रिंट मीडिया में दैनिक भास्कर के वरिष्ठ संवाददाता मदन कलाल को यह सम्मान प्रदान किया गया।

सबसे चर्चित रहा सियासी भारत के रामगोपाल जाट को मिला सम्मान, जो उनकी उस खोजी रिपोर्ट के लिए दिया गया, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा। जाट ने “जोजरी नदी के जहरीले पानी से जोधपुर के 30 गांवों का जीवन नरक बना” शीर्षक से एक प्रभावशाली रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें जोजरी नदी के प्रदूषित पानी से जोधपुर जिले के तीस गांवों में फैली तबाही को तथ्यों और जमीनी सच्चाई के साथ उजागर किया गया था। 

इस रिपोर्ट का असर इतना गहरा रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए नदी की स्थिति सुधारने के लिए सरकार को निर्देशित करने हेतु एक समिति का गठन किया। यह उस पत्रकारिता का प्रमाण है जो केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि व्यवस्था को हिलाकर बदलाव की जमीन तैयार करती है।

दैनिक भास्कर के वरिष्ठ संवाददाता मदन कलाल को प्रिंट मीडिया में उनकी निरंतर और वर्षों पूर्व एक्सिडेंट में घायल हुए मरीजों को उनके मसीहा से मिलाने और देश की सेवा में समर्पित होकर स्थाई रूप से निशक्त हुए वीर जवानों की पीड़ा उजागर करने वाले प्रभाशाली रिपोर्टिंग के लिए सम्मानित किया गया, जबकि टाइम्स नाउ के लखबीर सिंह शेखावत को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जोधपुर में धर्म परिवर्तन किए जाने की उल्लेखनीय रिपोर्टिंग के लिए नारद पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि देवर्षि नारद भारतीय परंपरा के प्रथम आदर्श पत्रकार हैं, जिनका जीवन लोकमंगल, सत्य और संवाद की श्रेष्ठ परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता को केवल सबसे तेज नहीं, बल्कि सबसे सच्चा होने की जरूरत है, एक गलत सूचना समाज के विश्वास को तोड़ सकती है और विश्वास लोकतंत्र की सबसे बड़ी पूंजी है। देवनानी ने कहा कि नारद का संवाद ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना से प्रेरित था और आज की पत्रकारिता को भी इसी दिशा में कार्य करना चाहिए।

आरएसएस के प्रांत प्रचारक निंबाराम ने भी समारोह को संबोधित करते हुए पत्रकारिता को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक जिम्मेदारी है, नारद जी ने कभी अपनी जिम्मेदारी से समाज और जीवन को बचाने का काम किया था, उन्हीं को ​इस ब्राह्मांड का पहला पत्रकार कहा जाता है। वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने भी विचार व्यक्त किए। 

विश्व संवाद केंद्र की प्रबंध निदेशक डॉ. शुचि चौहान, प्रशासन निदेशक डॉ. ईश्वर बैरागी और लेखा निदेशक अभिषेक अग्रवाल ने भी प्रस्तावना रखी और आभार प्रकृट किया। समारोह में मीडिया प्रतिनिधि, पत्रकारिता के विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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