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डिग्री है, Skills हैं, फिर भी नौकरी नहीं: भारत के रोज़गार संकट की वो सच्चाई जो सरकार नहीं बताती

आपके पास डिग्री है, Skills हैं, फिर भी नौकरी नहीं मिल रही। सच यह है कि समस्या आप में नहीं, सिस्टम में है।

आज की कहानी उस युवा की है जिसने 4 साल engineering पढ़ी, 2 साल MBA किया, लाखों रुपये fees में खर्च किए और आज उसके हाथ में या तो 15,000 रुपये की नौकरी है, या बिल्कुल ही खाली हाथ है। यह कहानी सिर्फ एक युवा की नहीं है। यह देश के करोड़ों युवाओं की कहानी है। और इस कहानी को समझने के लिए हमें सरकारी आंकड़ों की परतें उघाड़नी होंगी। क्योंकि सरकार जो दिखाती है और ज़मीन पर जो होता है, उन दोनों के बीच एक बहुत गहरी खाई है। 

सरकार की पेरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे यानी PLFS के अनुसार अप्रैल 2025 में भारत की बेरोजगारी दर 5.1 प्रतिशत थी। सुनने में तो ठीक लगता है, लेकिन क्या यह आंकड़ा सच्चाई दिखाता है। पहले समझिए यह आंकड़ा कैसे बनता है? जो व्यक्ति हफ्ते में एक घंटे भी काम करता है, वो एम्पलोएड मान लिया जाता है। यानी जो रेहड़ी लगाता है, जो मज़दूरी करता है, जो खेत पर बाप के साथ हल चलाता है, वो सब employed हैं। इस मेथडोलॉजी से तो देश में बेरोज़गारी शून्य भी दिखाई जा सकती है।

अब आप असली तस्वीर देखिए। 15 से 29 साल के युवाओं में बेरोज़गारी दर अप्रैल 2025 में 13.8 प्रतिशत थी। शहरी युवाओं में यह 17.2 प्रतिशत थी और शहरी युवा महिलाओं में यह 23.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। जुलाई 2025 में शहरी युवाओं की बेरोज़गारी दर एक महीने में उछलकर 19 प्रतिशत तक पहुँच गई। और सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा देखिए, अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार 15 से 25 साल के graduate युवाओं में बेरोज़गारी दर लगभग 40 प्रतिशत है। यानी हर 10 में से 4 graduate को नौकरी नहीं मिल रही। आप खुद सोचिए, इस देश में हर साल 1 करोड़ से ज़्यादा युवा graduate होते हैं। 40 प्रतिशत का मतलब, 40 लाख युवा हर साल डिग्री लेकर निकलते हैं, लेकिन उनको नौकरी नहीं मिलती।

तो सवाल यह उठता है कि आखिर समस्या कहाँ है? पड़ताल करने पर सामने आता है कि इसके पाँच बड़े कारण हैं। पहला, यदि आप भी इस श्रेणी में है तो आपको क्या करना है? Skill गैप, यानी जो कॉलेज में पढ़ाया जा रहा है और जो industry को चाहिए, उनके बीच ज़मीन-आसमान का फर्क है। कॉलेज में आपने theory पढ़ी, लेकिन company को चाहिए practical स्किल्स वाला एम्प्लॉई। आपने किताबों में marketing पढ़ी, लेकिन company को चाहिए Google एड्स चलाने वाला कर्मचारी। आपने economics पढ़ी, लेकिन company को चाहिए Excel पर data analysis करने वाला वर्कर। भारत के अधिकांश कॉलेजों का पाठ्यक्रम 10 से 15 साल पुराना है, जो 2010 में relevant था, वो अब 2026 में बेकार है, लेकिन system वही पुराना curriculum पढ़ा रहा है, क्योंकि professors बदलने में डरते हैं, college accreditation में लगे हैं और सरकार को नई नीति बनाने की फुर्सत नहीं है।

दूसरा कारण है Automation और AI। यह सबसे बड़ा और सबसे कम discuss होने वाला खतरा है। World Bank ने अनुमान लगाया था कि भारत में automation से खतरे में पड़ी नौकरियों का अनुपात 69 प्रतिशत है। यानी जो काम पहले 10 लोग करते थे, अब 2 लोग plus एक software कर देता है। Accounting में AI आ गया। Data entry में automation आ गई। Customer service में chatbot आ गए, और यह trend तेज़ से आ रहा है। 2030 तक जो jobs आज exist करती हैं, उनमें से 30 से 40 प्रतिशत या तो बदल जाएंगी या खत्म हो जाएंगी।

तीसरा कारण है Population Pressure। भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। हर साल labour market में 1 करोड़ से ज़्यादा नए लोग आते हैं, लेकिन formal sector में उतनी jobs नहीं बनती। भारत में 80 प्रतिशत से ज़्यादा jobs private sector में हैं और उनमें से अधिकांश informal हैं, यानी न job security, न PF, न medical benefit। इतने candidates हैं कि companies के पास option ही option हैं। Salary कम देना आसान हो गया है, और युवा मजबूरी में कम salary में काम करने को तैयार हो जाते हैं।

चौथा कारण है Education की गुणवत्ता। भारत में हर साल 1 करोड़ से ज़्यादा engineering seats हैं, लेकिन क्या सभी colleges में quality है? बिल्कुल नहीं। छोटे शहरों और कस्बों के हज़ारों private colleges में न अच्छे teachers हैं, न infrastructure है, न industry connections हैं। यहां से निकलने वाले युवा को degree तो मिलती है, लेकिन वो degree किसी काम की नहीं होती, और वो युवा 4 साल और लाखों रुपये बर्बाद करके बेरोजगार ही निकलता है।

पाँचवाँ कारण है सरकारी नौकरियों का मोह। भारत में आज भी करोड़ों युवा सालों तक government job की तैयारी करते हैं। Railway, SSC, UPSC, State PSC, हर जगह लाखों candidates, हज़ारों vacancies। 2022 में Railway की 35,000 vacancies के लिए 1 करोड़ 25 लाख applications आईं। सोचिए, 1 करोड़ 25 लाख में से 35,000 को नौकरी मिलेगी। बाकी 1 करोड़ 24 लाख 65,000 का क्या होगा? वो सालों तक तैयारी करते रहे। उनकी उम्र निकल गई। Private sector का experience नहीं बना, और अब वो न government में हैं, न private में।

Himachal Pradesh में 15 से 29 साल के युवाओं की बेरोज़गारी दर 29.6 प्रतिशत है। Punjab में 20.2 प्रतिशत। Haryana में 15.6 प्रतिशत। ये वो राज्य हैं जो India का "educated belt" माने जाते हैं। यहां सबसे ज़्यादा graduates हैं और बेरोज़गारी भी सबसे ज़्यादा है। यह paradox है। Degree ज़्यादा, नौकरी कम। शिक्षा बढ़ी, लेकिन रोज़गार नहीं बढ़ा। सरकार कहती है कि हमने Skill India चलाया। Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana चलाई। Startup India चलाया। Make in India चलाया, लेकिन ज़मीन पर नतीजा क्या है? Skill India में जो training दी जाती है, उसके बाद कितने युवाओं को नौकरी मिलती है, इसका कोई transparent data नहीं है। Make in India में manufacturing jobs बढ़नी चाहिए थीं, लेकिन GDP में manufacturing का हिस्सा आज भी 15 से 17 प्रतिशत के आसपास है, वो बढ़ा ही  नहीं है। और Startup India? हर नेता कहता है कि "नौकरी मत ढूंढो, नौकरी दो।" लेकिन startup शुरू करने के लिए capital चाहिए, mentor चाहिए, market चाहिए, fail होने पर safety net चाहिए। क्या वो सब मिलता है? बिलकुल भी नहीं। तो यह advice उस युवा के लिए क्रूर मजाक है, जिसके घर में आटा भी loan पर चल रहा है।

Zomato delivery boy। Ola driver। Urban Company electrician। Flipkart warehouse worker, यह सब gig economy है, और सरकार इसे रोज़गार में गिन लेती है, लेकिन यह रोज़गार है या मज़दूरी का आधुनिक रूप? इनमें से किसी को PF नहीं मिलता। Medical insurance नहीं, Job security नहीं, काम बंद और income बंद, और यह gig workers दिन में 10 से 12 घंटे काम करके भी 15,000 से 20,000 रुपये से ज़्यादा नहीं कमा पाते। क्या यह वो India है, जिसका सपना हमारे युवाओं ने देखा था? भारत में महिला श्रम भागीदारी दर अभी भी 25 से 30 प्रतिशत के बीच है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है। शहरी युवा महिलाओं में बेरोज़गारी 23.7 प्रतिशत तक है। यानी हर 4 में से 1 पढ़ी-लिखी शहरी लड़की को नौकरी नहीं मिलती। सामाजिक बंधन, सुरक्षा की चिंता, घरेलू जिम्मेदारियां और ऊपर से workplace में ​डिक्रिमनेशन की दोहरी मार, और सरकार कहती है कि महिला सशक्तिकरण हो रहा है।

तो क्या future खत्म है? ऐसा बिलकुल भी नहीं है, लेकिन यह बात ध्यान से सुनिए। सरकार पर निर्भर रहना बंद करो, Degree से ज़्यादा skill पर ध्यान दो, Digital skills सीखो, content creation, digital marketing, data analysis, coding, video editing, यह वो skills हैं, जिनकी demand बढ़ रही है और जो आप घर बैठकर, YouTube देखकर, free courses करके सीख सकते हैं, अपना Network बनाओ। आज की दुनिया में "who you know" उतना ही important है, जितना "what you know।" LinkedIn जैसे प्लेटफॉर्मस पर active रहो, अपने field के लोगों से जुड़ो, Local को global बनाओ, अगर आप Rajasthan के हैं तो सोचिए, यहाँ की handicraft, यहाँ का food, यहाँ का tourism, इसे online बेचा जा सकता है, Export किया जा सकता है, YouTube channel बनाया जा सकता है, और सबसे ज़रूरी, fail होने से मत डरो। इस देश में failure को stigma माना जाता है, लेकिन दुनिया के सबसे सफल लोग, Elon Musk से Steve Jobs तक, सब fail हुए, और फिर उठे।

भारत की सबसे बड़ी ताक़त उसके युवा हैं। देश में सबसे युवा आबादी है। यह demographic dividend है, लेकिन अगर इस ताक़त को सही direction नहीं मिली, सही skills नहीं मिलीं, सही opportunities नहीं मिलीं तो यही demographic dividend, demographic disaster बन जाएगा। सरकार को education system बदलना होगा, Industry से college का connection बनाना होगा। Manufacturing को boost देना होगा, Gig workers को social security देनी होगी, और युवाओं को honest guidance देनी होगी, न कि "naukri mat dhoondo, naukri do" जैसे hollow slogans। आपसे एक सवाल है। क्या आप उस system को blame करते रहेंगे जो बदलने को तैयार नहीं? या आप खुद बदलेंगे और उस system से आगे निकल जाएंगे? फैसला आपका है। याद रखिए, आज की दुनिया में job नहीं मिलती। Job create करनी पड़ती है।

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