नरेंद्र मोदी का तीसरी बार चलेगा प्रचंड तूफान



लोकसभा चुनाव में अभी करीब 8 महीने का समय शेष है, लेकिन किसान आंदोलन, अग्निवीर, पहलवान आंदोलन और मणिपुर मामले को लेकर विपक्ष द्वारा जो प्रचार किया जा रहा है, उसके बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। मोदी समर्थकों में जहां सवाल 2019 की तरह उठ रहे हैं, तो विपक्षी दलों के समर्थकों में चर्चा यही है कि क्या तीसरी बार भी विपक्ष को सरकार बनाने का अवसर नहीं मिलेगा? चुनाव थोड़े दूर हैं, लेकिन विपक्ष ने मणिपुर का मुद्दा बनाने का प्लान बना लिया है। किसान आंदोलन काफी पीछे छूट गया है, तो अग्निवीर को लेकर विपक्षी दलों के अलावा किसी के मुंह से कोई खास विरोध सुनाई नहीं दे रहा है।

भाजपा और मोदी के तरकश में कितने तीर हैं, यह अभी कहीं पर भी साफ नहीं है, लेकिन जिस तरह से बीते दिनों मोदी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ तीसरे टर्म की गारंटी दे दी है, उससे एक बात साफ हो गई कि भाजपा का कोई तगड़ा प्लान है, जो मोदी को इतने कॉन्फिडेंस के साथ तीसरी बार भी सत्ता पाने और पीएम बनने की गारंटी देने को बाध्य कर रहा है। मोदी की इस गारंटी के बाद विपक्ष में हलचल तेज है, तो भाजपा वाले इस बात से खुश हैं कि पीएम मोदी को जो आत्मविश्वास है वही सरकार बनाने का सबसे बड़ा सूत्रधार साबित होगा। इस बीच कुछ टीवी चैनल्स ने अपने ओपिनियन पोल भी सामने लाने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में राजस्थान विधानसभा का पोल जारी किया गया था, जिसमें भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है। अब एक और नया पोल सामने आया है, जिसके अनुसार मोदी के विरोध में बने इंडिया नामक नये गठबंधन से भाजपा का कड़ा मुकाबला दिखाया गया है। 


आगे बढ़ने से पहले इस सर्वे के पोल से जानते हैं कि किस पार्टी को कितनी सीटें मिलेंगी? विपक्षी दलों का नया गठबंधन बनने के बाद 2024 की तस्वीर में कितना बदलाव होगा और अगले साल देश का प्रधानमंत्री कौन बनेगा? इन तमाम सवालों के बीच पब्लिक मूड जानने के लिए इंडिया टीवी-सीएनएक्स ने ओपिनियन पोल किया है। इस ओपिनियन पोल के जो नतीजे सामने आए हैं, उनमें एक बार फिर बीजेपी बढ़त बनाती हुई दिख रही है। इस ओपिनियन पोल में 543 सीटों के नतीजे बताए गए हैं। इन 543 सीटों में से एनडीए 323 तो 26 दलों के विपक्षी गठबंधन को 170 और अन्य दलों को 50 सीटों का अनुमान लगाया गया है।


राज्यों की बात करें तो मोदी—शाह के गृह राज्य गुजरात में भाजपा को एक बार फिर से सभी 26 सीटों पर जीत मिल रही है। कर्नाटक में भाजपा को 20, कांग्रेस को 7 सीट मिल रही है। इसी तरह से हरियाणा 10 में से बीजेपी को 8 और कांग्रेस को 2 सीटों पर जीत मिल रही है। कांग्रेस गठबंधन वाले झारखंड बीजेपी को 12, अन्य को 2 सीट मिल रही है। राजस्थान में 25 में से बीजेपी को 21 और कांग्रेस को 4 सीटों का अनुमान लगाया गया है। ऐसे ही मध्य प्रदेश की 29 में से बीजेपी को 24 और कांग्रेस को 5 सीटों पर जीत मिलेगी। कांग्रेस शासित छत्तीसगढ़ भाजपा को 7 और कांग्रेस को 4 सीट, दिल्ली की 7 में से भाजपा को 5 और आप को 2 सीटों पर जीत मिलेगी। ऐसे ही आप शासित पंजाब में भाजपा को 0 कांग्रेस को 5 और आप को 8 सीट मिलेगी। जबकि जम्मू कश्मीर-लद्दाख बीजेपी को 3 और अन्य को भी 3 सीट मिलेगी। हिमाचल प्रदेश की चार में से भाजपा को 3 और कांग्रेस को 1 सीट मिलेगी। ओडिशा में बीजेपी को 8 और 13 सीट नवीन पटनाायक की बीजू जनता दल को मिलेगी। भाजपा शासित उत्तराखंड की सभी 5 सीट भाजपा को मिलती दिखाई गई है।


इस बार महाराष्ट्र की लड़ाई काफी दिलचस्प होती दिख रही है। उद्धव ठाकरे, शरद पवार दोनों की पार्टी टूट चुकी हैं। हालांकि, यह ओपिनियन पोल के नतीजे हैं, लेकिन एक बात तो तय है कि यहां लड़ाई काफी जोरदार होने वाली है। महाराष्ट्र की कुल 48 सीटों के जो नतीजे ओपिनियन पोल में आए हैं। जिसमें बीजेपी को 20, कांग्रेस को 9, शिंदे की शिवसेना को 2, उद्धव की शिवसेना को 11, अजीत की एनसीपी को 2, शरद को 4 सीटें मिल रही हैं। ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल में इस बार बीजेपी को नुकसान होता दिख रहा है। 42 सीटों में से बीजेपी के खाते में इस बार केवल 12 सीटें जाती दिख रही हैं। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को 29 और कांग्रेस के खाते में केवल एक सीट जाती दिख रही है।


पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ रहे नीतीश कुमार और सजायाप्ता लालू यादव की पार्टी इस बार एक साथ हैं। बिहार को लेकर ओपिनियन पोल के जो नतीजे सामने आए हैं, उसमें 40 सीटों वाले राज्य में बीजेपी के खाते में 20 सीटें जाती दिख रही हैं। जेडीयू को सात सीटें और आरजेडी को भी इतनी ही सीटें मिलती दिख रही है। एलजेपी को 2 सीटें, आरएलजेपी को 1 सीट, कांग्रेस के खाते में 2 और अन्य को 1 सीट मिलती दिख रही है। तमिलनाडु में डीएमके 19, एआईडीएमके 8, कांग्रेस 7, अन्य को 5 सीटों पर जीत मिल रही है। भाजपा का यहां खाता भी नहीं खुलेगा।


केरल में ओपिनियन पोल के सर्वे के दौरान एनडीए बनाम विपक्ष के तौर पर सर्वे नहीं किया गया था। यहां एलडीएफ और यूडीएफ दोनों को अलग रखकर सवाल पूछा गया। केरल की 20 सीटों में से UDF को 14 तो एलडीएफ के खाते में 6 सीटें जाती दिख रही हैं। बीजेपी का यहां खाता खुलता नहीं दिख रहा है। पूर्वोत्तर में भाजपा का परचम लहराता दिखाई दे रहा है।


अब आपको याद दिलाते हैं लोकसभा चुनाव 2019 से पहले के ओपिनियन पोल, जिमसें भाजपा को बहुमत से काफी कम, करीब 250 सीटों पर रोक दिया गया था। तब करीब करीब सभी सर्वे में कहा गया था कि भाजपा को सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों की मदद लेनी होगी, लेकिन चुनाव नजदीक आने के साथ ही मोदी के पक्ष में बने माहौल ने विपक्ष की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। 


मोदी के नाम पर 2014 में भाजपा ने 282 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत से 10 सीटें अधिक जीती थीं, वहीं एनडीए को कुल 303 सीट मिली थी। इसी तरह से 2019 के आम चुनाव में भाजपा को 303 और एनडीए को कुल 353 सीटों पर जीत मिली थी। अभी लोकसभा चुनाव का माहौल नहीं बना है, किंतु फिर भी भाजपा को बहुमत के करीब दिखाया गया है, ठीक इसी तरह से 2019 में भी बहुमत के करीब तक ही दिखाया गया था। बाद में परिणाम आने पर सभी चौंक गये थे।


उस समय पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा पुलवामा हमले के बाद भारत की तरफ से की गई एयर स्ट्राइक ने मोदी सरकार को जबरदस्त फायदा दिया। इस कार्यकाल में मोदी सरकार के बहुत काम हैं, लेकिन धारा 370 हटाना, राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त करना, तीन तलाक कानून, सीएए और विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का पांचवा स्थान बनना उल्लेखनीय कार्य हुए हैं, जिसके कारण भाजपा उत्साहित है। इसके साथ ही जनवरी में राम मंदिर का उद्घाटन किया जाएगा, जो भाजपा का सबसे पहला और सबसे बड़ा वादा पूरा होगा। इसको लेकर भाजपा पूरे देश में प्रचार करेगी, तब जो माहौल बनेगा, वही संभवत: मोदी को गारंटी देने को मजबूर कर रहा है। 


इसके अलावा समान नागरिक संहिता को लेकर देश से अपने सुझाव मांगे गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार चुनाव से ठीक पहले यह वादा करेगी कि चुनाव जीतने के बाद मोदी की तीसरी सरकार सबसे पहला काम समान नागरिक संहिता कानून बनाने का काम करेगी। इसको वर्तमान मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाना नामुमकिन लग रहा है, किंतु अगले साल आखिरी बजट सत्र के दौरान इसको संसद में पेश कर पास कराने या उस पर बहस कराने जैसा कदम उठाया जा सकता है। भाजपा की ओर से राज्य चुनाव से लेकर लोकसभा तक का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा चुका है। पहले चार राज्यों के चुनाव और उसके करीब पांच महीने में होने वाले आम चुनाव के लिए भाजपा की केंद्रीय कोर टीम काम कर रही है। जिसमें विपक्ष की हर कमजोरी को जनता के सामने रखना और मोदी सरकार की उपलब्धियों को प्रचारित करना शामिल है।


विपक्ष अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि किस राज्य में, किस पार्टी को कितनी सीटों पर टिकट देना है, तो एनडीए का कुनबा इसको लेकर भी अपनी तैयारी पूरी कर चुका है। एनडीए की केवल एक बैठक हुई है, जिसमें साफ कर दिया गया है कि पीएम कौन होगा, जबकि विपक्ष के पास ना तो पीएम का चेहरा है और ना ही दलों की रणनीति सामने आई है। भाजपा कहती है कि जिनके पास दुल्हा ही तय नहीं है, बारात कहां जाएगी, कब जाएगी, किसको साथ लेकर जाएगी, कुछ भी तय नहीं है, वो बरात चढ़ाने की तैयारी करने का दावा कर रहे हैं। 


ऐसे में एक बात और साफ हो चुकी है कि मोदी की लीडरशिप में भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने के लिए कमर कस चुकी है। मोदी का यह कहना भी काफी है कि 'तीसरे टर्म में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा, यह मोदी की गारंटी है', साबित करता है कि कितने बड़े प्लान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी तरह का आत्मविश्वास मोदी को 2019 से में भी था, हालांकि, मीडिया का एक बड़ा वर्ग और विपक्ष ने दावा किया था कि एनडीए को बहुमत नहीं मिलेगा। बाद में सबके दावे उलटे पड़ गए। भाजपा ने 2014 के मुकाबले 21 सीट तो एनडीए ने 50 सीटें अधिक जीतीं। अब इसी तरह का दावा भाजपा फिर कर रही है। भाजपा का कहना है कि प्रचंड बहुमत से सरकार बनायेंगे। हालांकि, एनडीए को 400 सीटें जीतने का दावा किया जा रहा है, किंतु सरकार को अगर 2014 या 2019 जितनी सीटें भी मिल जाएगी तो मोदी का दावा सच साबित हो जाएगा। 

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