ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले भारत, चीन, इराक और कतर के व्यापारिक जहाजों को ट्रांज़िट प्रतिबंधों से छूट दे दी है, जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अग्निवीरों की सेवा अवधि दो साल बढ़ाकर उन्हें नियमित सेना में शामिल होने का नया रास्ता खोल दिया है। दोनों फैसलों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा भर्ती नीति, दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव दिख रहा है।
हॉर्मुज पर भारत को राहत
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात-मोगद्दम ने कहा कि भारत, चीन, इराक और कतर के जहाज अब हॉर्मुज से गुजरने की पाबंदियों से छूट प्राप्त करेंगे। यह जलडमरूमध्य भारत के कच्चे तेल और गैस आयात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारतीय और चीनी जहाजों से ट्रांज़िट शुल्क लेने की पुरानी व्यवस्था बनी रहेगी, जबकि कतर के जहाजों को निःशुल्क पारगमन की अनुमति है। हालांकि, आर्थिक टाइम्स को जानकार लोगों ने बताया कि विदेश मंत्रालय की मध्यस्थता से क्लियरेंस पाने वाले जहाजों के लिए भारत सरकार ने ट्रांज़िट शुल्क नहीं चुकाया।
भारत-ईरान व्यापार को उम्मीद
भारत ईरान को बासमती चावल, चाय, कॉफी, मसाले, दवाएं, चीनी, सिंथेटिक फाइबर और मशीनरी निर्यात करता है। ईरान से भारत कच्चा तेल, LPG, पेट्रोकेमिकल, खजूर, सेब और सूखे मेवे आयात करता है।
भारत ईरान के साथ भुगतान व्यवस्था सुधारने की कोशिश भी कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने सिद्धांत रूप में भारत से आयात के लिए कुछ तेल भुगतान रुपये में स्वीकार करने पर सहमति दी है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नया आधार मिल सकता है।
लेकिन जोखिम अब भी है
यह छूट राहत भरी है, पर इसे युद्ध की समाप्ति या भारत-ईरान रिश्तों के पूर्ण सामान्यीकरण के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। क्षेत्रीय तनाव, समुद्री सुरक्षा और अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के बीच शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम बना हुआ है।
“ट्रंप की हार से युद्ध खत्म हो जाएगा” या “भारत अब अपनी सुविधा से ईरानी तेल खरीद लेगा”, जैसे दावे अभी अटकलें हैं, सत्यापित नीतिगत घोषणाएं नहीं। इसलिए खबर में इन्हें संभावना या विश्लेषण के रूप में ही रखना उचित है।
अग्निवीर योजना में बड़ा बदलाव
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन 75% अग्निवीरों के लिए दो साल का अतिरिक्त सेवा काल मंजूर किया है, जो प्रारंभिक चार साल की सेवा के बाद नियमित भर्ती के लिए चुने नहीं जाते। इससे उनका कुल सेवा काल छह साल तक पहुंच जाएगा।
योजना का मूल प्रावधान बरकरार है कि हर बैच के 25% अग्निवीरों को योग्यता के आधार पर चार साल बाद ही नियमित सैनिक बनाया जा सकेगा। बाकी 75% अग्निवीर इच्छा से दो साल और सेवा कर सकेंगे।
नियमित होने का नया रास्ता
दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल पूरा करने के बाद इच्छुक अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में भर्ती होने का अवसर मिलेगा, बशर्ते वे निर्धारित चयन मानदंड पूरे करें। यह निर्णय भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की सिफारिशों के आधार पर कैबिनेट ने स्वीकृत किया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब करीब 18,000 अग्निवीर प्रारंभिक चार साल की सेवा पूरी कर बाहर होने वाले थे। अब उन्हें सेना में लंबे समय तक रहने और नियमित भर्ती का मौका मिलेगा।
राजनीतिक असर
यह बदलाव अग्निवीर योजना की आलोचना को कम करने और युवाओं के बीच सरकार की छवि सुधारने में मदद कर सकता है, क्योंकि अब अधिक अग्निवीरों को सेना में लंबे समय तक रहने और नियमित होने का रास्ता मिलेगा।
हालांकि, “विपक्ष का मुद्दा खत्म हो जाएगा” या “सभी बाहर निकलने वाले अग्निवीर पुलिस में भर्ती होंगे”, जैसे दावे सरकारी घोषणा में नहीं हैं। पुलिस भर्ती राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती है और इसकी कोई सार्वभौमिक गारंटी अभी नहीं है।

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