राजस्थान के सबसे वाइब्रेंट जिले में गोविंद सिंह डोटासरा के सामने सुभाष महरिया लड़ेंगे चुनाव!



राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस के अलावा लंबे समय से वामदलों का बड़ा हस्तक्षेप रहा है। हालांकि, वामदल केवल सीकर जिले तक सिमटे हुए हैं। यहां की कल्याण कॉलेज एसएफआई का राजस्थान में गढ़ माना जाता है। यहीं से पढ़े और राजनीति में आगे बढ़े नेता कांग्रेस और वामदलों को लीड कर रहे हैं। खास बात यह है कि सीकर वह जिला है, जहां पर आज की तारीख में ना केवल शिक्षा के सबसे बड़े संस्थान तेजी से पांव पसार रहे हैं, बल्कि बेखौफ अपराध में भी इस जिले का नाम बहुत उपर रहता है। जिले की खास बात यह भी है कि यहीं की लक्ष्मणगढ़ सीट से लगातार तीन बार बनकर गोविंद सिंह डोटासरा कांग्रेस की कमान संभाल रहे हैं।

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जिले को अब संभाग बना दिया गया है, लेकिन इसके बाद में प्रशासनिक सुविधाओं में खास बदलाव नहीं आया है। सीकर में आठ विधानसभा सीटें हैं, जिनमें 7 सीट कांग्रेस और एक सीट कांग्रेस समर्थक निर्दलीय के खाते में है। यानी भाजपा का यहां एक भी विधायक नहीं है। इस वजह से भाजपा ने सीकर में पुराने भाजपाई और सांसद रहे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे सुभाष महरिया को भाजपा ने अपने पाले में लेकर मोर्चा लेने की तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा सुभाष महरिया को उसी लक्ष्मणगढ़ सीट से मैदान में उतारेगी, जहां से अभी कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा विधायक हैं। इस सीट पर डोटासरा ने पहला चुनाव 2008 में लड़ा था, तब बेहद कम अंतराल से जीते थे, लेकिन उसके बाद उनका वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि दोनों कद्दावर नेताओं किसपर जनता भरोसा करती है।


सुभाष महरिया ने दावा दो सीटों से ठोक रखा है। लक्ष्मणगढ़ के अलावा दांतारामगढ़ सीट पर भी महरिया के चुनाव लड़ने की संभावना है। बताया जाता है कि महरिया ने पार्टी दोनों में से किसी भी सीट पर चुनाव लड़ाने का आग्रह किया है। महरिया के अलावा दांतारामगढ़ से भाजपा में प्रभु सिंह, सुभाष भारतीय, हरिकिशन खींचड और पवन पुजारी भी दावा कर रहे हैं। सीट पर जातिगत समीकरण पूरी तरह से महरिया के पक्ष में हैं। यहां पर 80 हजार जाट, 65 हजार कुमावत, 45 हजार एससी—एसटी, 25 हजार ब्राहम्ण और करीब 24 हजार राजपूत वोट हैं। यदि इस सीट पर जाट समाज के नेता को टिकट नहीं दिया जाता है तो ​फिर कुमावत को टिकट मिलेगा। ऐसे में सुभाष भारतीय का दावा मजबूत होता है। सुभाष भारतीय एबीवीपी, युवा मोर्चा, भाजपा और संघ में अच्छी पकड़ रखते हैं। युवा होने के कारण पार्टी उनपर दांव खेल सकती है। भाजपा इस सीट को कभी नहीं जीत पाई है। इस वजह से उम्मीदवार का चयन जातिगत समीकरण के साथ ही होगा।


दूसरी विधानसभा सीट सीकर है, जहां से अभी कांग्रेस के राजेंद्र पारीक विधायक हैं। राजेंद्र पारीक को अशोक गहलोत सरकार में मंत्री नहीं बनने की कसम साफ दिखाई देती है। क्षेत्र की जनता भी मानती है कि पारीक को मंत्री बनाया जाना चाहिए था, लेकिन सीपी जोशी की अनुपस्थिति में विधानसभाध्यक्ष की सीट पर सभापति बनकर मंत्रियों को हड़काकर ही राजेंद्र पारीक ने अपने मन की हसरत पूरी की है। इस सीट पर भाजपा के हारे हुए रतन जलधारी फिर से दावेदार हैं। इसके अलावा पार्टी के जिला उपाध्यक्ष राजकुमार जोशी, एबीवीपी के पूर्व प्रांत संगठन मंत्री अर्जुन तिवाड़ी, ताराचंद धायल, कमल सिखवाल भी प्रमुख रूप से दावा कर रहे हैं। रतन जलधारी 2013 में यहां विधायक थे। घनश्याम तिवाड़ी भी यहां से दो बार विधायक रह चुके हैं। सीकर हमेशा से जातिगत समीकरण के कारण ब्राहम्ण सीट मानी जाती है।


गोविंद सिंह डोटासरा के सामने भाजपा तीन बार मात खा चुकी है। इसलिए लक्ष्मणगढ़ सीट पर चुनाव सोच समझकर करना होगा। यहां पर सबसे बड़े दावेदार सुभाष महरिया हैं। यदि उनको टिकट नहीं दिया जाता है तो भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हरिराम रिणवा दूसरे सबसे बडे दावेदार हैं। साथ ही जिलाध्यक्ष इंद्रा चौधरी भी टिकट की बड़ी दावेदार हैं। इनके अलावा दिनेश जोशी भी टिकट मांग रहे हैं। दिनेश जोशी दो बार चुनाव हार चुके हैं, जबकि एक बार भाजपा के टिकट पर सुभाष महरिया भी हार गये थे। बाद में टिकट नहीं देने से नाराज होकर कांग्रेस में चले गये थे, जहां से इस साल भाजपा में वापसी की है। सीकर जिले की यह सीट भी जाट बाहूल्य है।


इसी तरह से फतेहपुर विधानसभा से इस समय कांग्रेस के हाकम अली विधायक हैं। बीते 30 साल से भाजपा यहां नहीं जीत पाई है। आखिरी बार 1993 में भाजपा का उम्मीदवार जीता था। पिछली बार भाजपा की सुनीता जाखड़ चुनाव हार गई थीं। सुनीता जाखड़ इस बार फिर सबसे बड़ी दावेदार हैं। दूसरे नंबर पर सरोज कड़ासरा भी दावा कर रही हैं। सरोज इस समय जिलामंत्री हैं। इंद्रा चौधरी को यदि लक्ष्मणगढ़ से टिकट नहीं मिला तो फतेहपुर से मिल सकता है। साथ ही मधुसूदन भिण्डा और महावीर बोधजोसर भी दावा कर रहे हैं।  इस सीट पर सबसे अधिक जाट, फिर मुस्लिम, ब्राह्मण मतदाता हैं। 


उदयपुरवाटी से लगती सीकर जिले की खण्डेला विधानसभा सीट पर निर्दलीय महादेव​ सिंह खण्डेला विधायक हैं। अशोक गहलोत के करीबी विधायक महादेव सिंह खण्डेला ने अधिक उम्र होने का हवाला देकर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। उन्होंने अपने बेटे के लिए टिकट मांगा है। भाजपा की ओर से यहां पर पूर्व विधायक बंधीधर बाजिया सबसे बड़े दावेदार हैं। इसके साथ ही पार्टी के पूर्व जिला महामंत्री बदलेव सिंह खण्डेला अपने लंबे अनुभव और संघ पृष्ठभमि के कारण दूसरे सबसे तगड़े दावेदार हैं। बलदेव सिंह जिले में संघ बड़े कर्तव्यनिष्ठ नेताओं में शुमार होते हैं। तीसरे नंबर पर जिला कार्यकारिणी सदस्य महेंद्र धायल भाजपा में टिकट के दावेदार हैं। 


झाबर सिंह खर्रा के नाम से भाजपा के लिए सीकर में बड़ी सीट मानी जाने वाली श्रीमाधोपुर से अभी पूर्व विधानसभाध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत कांग्रेस विधायक हैं। शेखावत ने पार्टी से खुद चुनाव नहीं लड़ने और अपने बेटे को टिकट देने की गुहार लगाई है। इसके कारण कांग्रेस के खिलाफ माहोल है। झाबर सिंह खर्रा इस बार भी टिकट के सबसे बड़े दावेदार हैं। यह सीट भी जाट बाहूल्य है। खर्रा के अलावा श्याम चौधरी और कर्मवीर घोसल्या भी टिकट का दावा ठोक रहे हैं। पार्टी यदि खर्रा को टिकट नहीं देकर उम्मीदवार बदलेगी तो फिर कर्मवीर घोसल्या सबसे मजबूत उम्मीदवार हो सकते हैं।



नीम का थाना सीट से अभी कांग्रेस के सुरेश मोदी विधायक हैं। यहां पर मतदाताओं में सबसे अधिक बणिया हैं, इसके अलावा गुर्जर और राजपूत बड़ी आबादी है। भाजपा के पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजोर फिर से टिकट मांग रहे हैं। पिछली बार वह चुनाव हार गए थे। साथ ही भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विष्णु चेतानी भी टिकट का दावा कर रहे हैं। भाजपा के नवमतदाता अभियान के संयोजक राजेश गुर्जर भी टिकट मांग रहे हैं। पार्टी ने यदि प्रेम सिंह बाजोर की जगह टिकट बदला तो राजेश गुर्जर सबसे तगड़े दावेदार हैं।


सीकर की एकमात्र एससी रिजर्व सीट धोद पर वर्तमान में कांग्रेस के परसराम मोरदिया विधायक हैं। हालांकि, मतदाताओं के लिहाज से यहां पर जाट सर्वाधिक हैं। इसके बाद एससी—एसटी मतदाता हैं। परसराम मोरदिया पिछले कार्यकाल में अशोक गहलोत के खास हुआ करते थे, लेकिन इस कार्यकाल में उनको कुछ नहीं मिला। उम्र के लिहाज से मोरदिया अब उतने सक्रिय भी नहीं हैं। भाजपा की ओर से यहां पर 2013 में विधायक जीते गोवर्धन वर्मा सबसे बड़े दावेदार हैं। गोवर्धन के अलावा भजनलाल रोलण दूसरे बड़े दावेदार हैं। भजनलाल पूर्व आरटीओ अधिकारी हैं। 

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