मोदी-जयशंकर ने 78 अरब डॉलर के सौदे से बचाए 8 नौसैनिक



इस्लामिक देश कतर को 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को मौत की सजा सुनाने के बावजूद रिहा करना पड़ा है। इनमें से 7 सोमवार सुबह भारत लौट आए हैं। ये सभी कतर में जासूसी के आरोप में पहले मृत्यदण्ड और बाद उम्रकैद की सजा काट रहे थे। ये सभी नौसैनिक 18 महीने बाद भारत आ सके हैं। इससे पहले करीब 45 दिन पहले ही इनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला गया था। तब से इनको जेल के बजाए हिरासत में रखा गया था, जहां पर सभी प्रकार की सुविधाएं दी जा रही थीं।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार कतर में गिरफ्तार किए गए दहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम करने वाले 8 भारतीयों की रिहाई हो गई है। इनकी घर वापसी के लिए भारत सरकार ने कतर के फैसले की सराहना की है। सभी पूर्व नौसैनिकों को कतर की इंटेलिजेंस एजेंसी के स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरो ने 30 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया था। इनकी रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई कि शाहरूख खान और सुब्रम्ण्यम स्वामी ने इनको रिहा करवाया है, जिसके बाद खुद शाहरूख खान और सुब्रम्ण्यम स्वामी खंडन करते हुए कहा है कि इसमें उनका कोई हाथ नहीं है, इनकी रिहाई के सभी प्रयास भारत सरकार के रहे हैं। इनकी वतन वापसी का अभियान इतना गुप्त था कि एक नौसैनिक ने भारत पहुंचने के बाद कतर में रह रही अपनी पत्नी को फोन करके बताया कि वह भारत पहुंच चुका है, इसलिए वो खुद भी भारत आ जाए।

इससे पहले पिछले साल 1 दिसंबर को दुबई में COP—28 समिट के दौरान PM नरेंद्र मोदी कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमाद अल थानी से मिले थे। तब मोदी ने इतना ही कहा था कि उन्होंने कतर में रह रहे भारत के नागरिकों के बारे में हालचाल जाना है।  उस मुलाकात के ठीक 25 दिन बाद मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया और उसके 45 दिन बाद सभी की सजा रद्द कर भारत वापसी हो गई। दिल्ली एयरपोर्ट पर लौटने के बाद पूर्व नौसैनिकों ने कहा कि मोदी के हस्तक्षेप के बिना हमारे लिए भारत लौटना संभव नहीं होता। भारत सरकार के लगातार प्रयासों के बाद ही सब वापस आ सके हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर कार्यकुशलता और भारत की विदेश नीति की जीत का यह एक और नायाब उदाहरण है।

ये सभी अफसर कतर की नौसेना को ट्रेनिंग देने वाली एक निजी कंपनी दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी में काम करते थे। दहरा ग्लोबल कतर में डिफेंस सर्विस देती है। ओमान एयरफोर्स के रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर खमिस अल अजमी इस कंपनी के प्रमुख हैं। उन्हें भी 8 भारतीय नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया गया था, लेकिन नवंबर में उन्हें छोड़ दिया गया। गिरफ्तारी से करीब 14 महीने बाद 26 अक्टूबर 2023 को इन सभी पूर्व नेवी अफसरों को मौत की सजा सुनाई गई थी। 28 दिसंबर 2023 को इनकी मौत की सजा कैद में बदली गई थी।

24 फरवरी 2022 को रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया था, तब भारत के कहने पर दोनों देशों ने बीच में ही दो दिन तक युद्ध बंद कर दिया था। तब भारत के 20 हजार से अधिक छात्रों और नागरिकों को यूक्रेन से वापस लाया गया था। उससे पहले जब कोरोना शुरू हुआ था, तब भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान सफल किया था। भारत की सभी विदेशी फ्लाइट्स के जरिए अपने करीब साढ़े 3 करोड़ नागरिकों की घर वापसी करवाई थी। बीते 10 साल में भारत ने विदेश में कई सफल रेस्क्यू ऑपरेशन किए हैं। जो लोग कहते हैं कि भारत का वर्तमान शासन विदेश नीति को नहीं जानता, वो आज छाती पीट रहे हैं कि आखिर जिसे ये लोग चायवाला बोलकर मजाक बनाया करते थे, उसने दुनिया में भारत के नागरिकों को बचाने के लिए सफलतापूर्वक कई अभियान कैसे पूरे लिए।

खास बात यह है कि भारत ने रूस—यूक्रेन युद्ध के कारण अब तक सस्ती दरों पर अरबों डॉलर का कच्चा तेल और गैस आयात किया है। कभी अमेरिका द्वारा तय किया जाता था कि भारत किस देश के साथ कितना कारोबार करेगा, लेकिन आज अमेरिका के साथ ही भारत का आयात—निर्यात बराबरी का हो गया है। इजराइल द्वारा फिलिस्तीन में अभियान शुरू किया गया, तब भारत ने इजराइल का समर्थन किया, जबकि इस्लामिक देशों ने फिलिस्तीन का साथ देने का दबाव बनाया था।

चीन भले ही दुनिया का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश होगा, लेकिन आज भारत ने चीन को भी उसकी असलियत दिखा दी है। सीमा विवाद को लेकर हमेशा भारत को आंख दिखाने वाला चीन लगातार घटते होते निर्यात को देखते हुए चुप हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन गया है। 6 साल पहले तक भारत मोबाइल, रक्षा उपकरण, खिलौने जैसी तमाम चीजें आयात करता था, आज उससे भी तेज गति से निर्यात कर रहा है। दुनिया में जब गेहूं संकट आता है तो भारत ही मुफ्त गेहूं देकर मानवता की सेवा करता है, तो कोरोना के दौरान दुनिया के 100 से अधिक देशों को फ्री वैक्सीन देकर डिप्लोमेसी का नया अध्याय लिखा था।

करीब एक साल पहले एक टीवी डिबैट के दौरान जब भाजपा की प्रवक्ता ​नुपूर शर्मा द्वारा प्रतिउत्तर में पैगंबर मोहम्मद के बारे में बयान दिया था, तब कतर ही वह पहला देश था, जिसने मुस्लिम देशों को भारत के खिलाफ भड़काया था। भारत की विदेश नीति और डिप्लोमेसी के उच्च स्तर को इससे समझ सकते हैं कि आज वही कतर जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाने के बाद भी भारत के 8 पूर्व नौसेनिकों को सकुशल रिहा कर भारत भेजने को मजबूर है।

रिहाई को लेकर भारत में ही कई लोगों ने सवाल उठा दिए हैं। सीताराम येचूरी की बैगम सीमा चिश्ती से लेकर समाजवादी पार्टी के नेता जफरुल इस्लाम खान जैसे लोगों ने तो यहां तक मांग की थी कि सभी को फांसी दे देनी चाहिए। भारत में बैठे ऐसे ही सैकड़ों लोग हैं, जो भारत के ​ही नागरिकों को कतर में फांसी देने की मांग की थी। पूर्व नौसैनिकों की रिहाई ऐसे समय हुई है जब भारत और कतर के बीच गैस को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। 6 फरवरी को हुए इस समझौते के तहत भारत कतर से 2048 तक लिक्विफाइड नैचुरल गैस, LNG खरीदेगा।

गोवा में हुए इंडिया एनर्जी वीक—2024 के एक दिन पहले 6 फरवरी को ये समझौता किया गया था। 78 अरब डॉलर का यह समझौता अगले 20 वर्षों के लिए हुआ है। भारत की सबसे बड़ी LNG आयात करने वाली कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड ने कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी के साथ ये समझौता किया है। इस समझौते के तहत कतर प्रतिवर्ष भारत को 7.5 मिलियन टन गैस एक्सपोर्ट करेगा। इस गैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, फर्टिलाइजर प्रोडेक्शन और CNG में बदलने के लिए किया जाता है।

खास बात यह भी रही कि जब इन पूर्व नौसेनिकों को कतर सरकार ने गिरफ्तार किया था, तब काफी समय तक भारत में किसी को जानकारी भी नहीं थी, यहां तक इनके परिजनों को भी पता नहीं था। सबसे पहले भारतीय दूतावास को सितंबर 2022 के मध्य में नौसैनिकों की गिरफ्तारी के बारे में बताया गया था। जिनकी पहचान कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश के रूप में की गई।

कैप्टन नवतेज सिंह गिल चंडीगढ़ के हैं। उनके पिता आर्मी के रिटायर्ड अफसर हैं। वे देश के फेमस डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन, तमिलनाडु में इंस्ट्रक्टर रह चुके हैं।

पूर्णेंदु​ तिवारी नेवी के टॉप ऑफिसर रह चुके हैं, जो नौसेना में नेविगेशन के एक्सपर्ट हैं। रिटायर होने से पहले तिवारी युद्धपोत INS 'मगर' को कमांड करते थे। दहरा कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर रिटायर्ड कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी को भारत और कतर के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में उनकी सेवाओं के लिए साल 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार मिला था। वह यह पुरस्कार पाने वाले आर्म्ड फोर्सेज के एक मात्र शख्स हैं। 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान में कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को सम्मानित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, नजदीक हैं तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। तिवारी को ये सम्मान उस समय दिया गया था जब वे कतर में वहां की नौसेना को ट्रेनिंग दे रहे थे।

54 साल के सुगुनाकर पकाला विशाखापट्‌टनम के रहने वाले हैं। नौसैनिक के तौर पर उनका कार्यकाल शानदार रहा है। उन्होंने 18 साल की उम्र में ही नेवी जॉइन कर ली थी। वे नवंबर 2013 में इंडियन नेवी से रिटायर हुए थे। इसे बाद उन्होंने कतर की कंपनी अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी को जॉइन किया था।

इसी तरह से कमांडर संजीव गुप्ता को गनरी स्पेशलिस्ट के तौर जाना जाता है। कमांडर अमित नागपाल नौसेना में कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉर सिस्टम के एक्सपर्ट हैं। कैप्टन सौरभ वशिष्ठ की पहचान तेज-तर्रार टेक्निकल ऑफिसर के तौर पर होती है। उन्होंने कई मुश्किल ऑपरेशन को अंजाम दिया है। कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा को उनके नेविगेशनल एक्सपर्टीज के लिए पहचाना जाता है। नाविक रागेश नौसेना में मेनटेनेंस और हेल्पिंग हैंड के रूप में काम करते थे।

गिरफ्तार करने के बाद कतर ने अपने कानून के अनुसार जासूसी करने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई। कतर में जासूसी की सजा फांसी ही है। सजा सुनाने के बाद उतरी अदालत में अपील की गई, जहां पर इनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया। भारत का विदेश मंत्रालय तब तक कतर के साथ बातचीत कर रहा था और मौत की सजा टालने को कहा गया था, जिसके कारण कोर्ट ने सजा को टाल दिया था। हालांकि, विदेश मंत्रालय के कहने पर करीब डेढ़ महीने पर इनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था।

उससे पहले गिरफ्तारी के करीब एक साल बाद 30 सितंबर 2023 को इन्हें अपने परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी देर के लिए टेलीफोन पर बात करने की मंजूरी दी गई थी। विदेश मंत्री जयशंकर की तुर्कीय यात्रा के बाद पहली बार काउंसलर एक्सेस 3 अक्टूबर 2023 को मिला। इस दौरान भारतीय दूतावास के एक अधिकारी को इनसे मिलने दिया गया था। 3 दिसंबर 2023 को कतर में मौजूद भारत के ऐंबैस्डर निपुल ने आठों पूर्व नौसैनिकों से मुलाकात की थी।

कतर प्रशासन के अनुसार 8 भारतीयों पर इजराइल के लिए जासूसी करने का आरोप था। कतर के मीडिया अल-जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों पर कतर के सबमरीन प्रोजेक्ट से जुड़ी इनफॉर्मेशन इजराइल को देने का आरोप था। दरअसल, इजराइल को सभी इस्लामिक देश अपना कट्टर दुश्मन मानते हैं। जो भी व्यक्ति इजराइल के लिए काम करता है, उसको कड़ी सजा दी जाती है।

हालांकि, गिरफ्तार करने और मौत की सजा सुनाने के बाद भी कतर ने कभी आरोप सार्वजनिक नहीं किए। 30 अक्टूबर 2023 को इन नौसैनिकों के परिवारों ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय उससे पहले ही अलर्ट हो चुका था। भारत ने इसको लेकर तुर्किये से बात भी कर ली थी।

तुर्किये के कतर के अच्छे संबंध हैं, इसलिए भारत सरकार ने उसे मध्यस्थता के लिए कहा। कतर को मनाने के लिए भारत सरकार ने अमेरिका से भी बात की, क्योंकि रणनीतिक तौर से देखा जाए तो कतर पर अमेरिका की ज्यादा मजबूत पकड़ है। तुर्किये और भारत के बीच अच्छे संबंध हैं तो दूसरी तरफ बाइडेन प्रशासन चीन को बैलेंस करने के लिए भारत के लिए हमेशा तैयार रहता है। दोनों देशों ने कतर के सामने भारत का पक्ष रखा और मदद करने को कहा।

कुछ समय पहले तक कतर दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी का निर्यातक देश था, लेकिन हाल ही में अमेरिका ने उसे पीछे छोड़ दिया। इसके बाद से कतर दोबारा अपनी जगह पाने के लिए बेचैन हो रहा है। कतर सालाना 77 एमटीपीए गैस का उत्पादन करता है, जिसे 2027 तक वो 126 एमटीपीए करना चाहता है, ताकि एशिया और यूरोप में अपनी पकड़ मजबूत कर सके। भारत अभी अमेरिका, कतर रूस, इराक, ईरान जैसे देशों से एलएनजी क्रय करता है।

कतर की पूरी अर्थव्यवस्था प्राकृतिक गैस और तेल पर आधारित है। केवल 20 लाख की आबादी वाला कतर आज प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है। कतर में काम करने वाले विदेशियों में सबसे अधिक भारत के नागरिक हैं। सौर ऊर्जा की बढ़ती मांग और पूर्ति के कारण दुनिया में धीरे—धीरे डीजल, पेट्रोल और एलपीजी, एलएनजी, सीएनजी जैसे उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी रफ्तार कम होने लगी है।

आने वाले 3 दशक में दुनिया डीजल—पेट्रोल की मांग को 90 फीसदी तक कम करना चाहती है। दुनिया में खाड़ी देश कच्चे तेल के सबसे बड़े निर्यातक हैं, उनकी पूरी अर्थव्यवस्था का आधार ही कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात है। जब तक डीजल—पेट्रोल का निर्यात होता रहेगा, तब तक ये देश अमीर बने रहेंगे, जिस दिन कच्चे तेल की दुनिया में खपत कम हो जाएगी, उस दिन इन देशों में आर्थिक हालात फिर से खराब हो जाएंगे।

इसलिए यूएई जैसे देश कच्चे तेल और गैस उत्पादन के साथ ही अपने यहां पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इन देशों को पता है कि कच्चे तेल की मांग सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के साथ ही कम हो जाएगी। उसके बाद आज जो दुबई की चमक—दमक है, वो फीकी पड़ने लगेगी और फिर आधुनिकता के दिन ढल लगेंगे। इसी वजह से कतर भी अब पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। अधिक से अधिक तेल और गैस निर्यात कर वह अपने यहां पर्यटन समेत दूसरे काम धंधों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।

भारत अभी करीब 20 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी आयात करता है, जबकि अकेले कतर से लगभग आधी आयात करता है। कतर से नए समझौते के बाद भारत का आयात 60 फीसदी से अधिक हो जाएगा। वैसे तो वैश्विक कारोबार के पीछे कई कारण होते हैं, लेकिन भारत ने कतर से कम दामों में 78 अरब डॉलर का समझौता किया है। कतर को भी पता है कि उसे पूरी दुनिया में इतनी एलएनजी खरीदने वाला एक ग्राहक नहीं मिलेगा। इसलिए कतर ने भारत के इस प्रस्ताव को तुरंत लपक लिया, जबकि इस समझौते की बात 8 नौसैनिकों की सजा के पहले से बातचीत चल रही थी। 

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