Cricketer वैभव सूर्यवंशी पर रिसर्च करेगा आईआईएम


15 साल की उम्र में आप क्या कर रहे थे? स्कूल, ट्यूशन, बोर्ड परीक्षा या मोबाइल गेम्स? लेकिन भारत 
का एक लड़का ऐसा है, जिसे अब देश के सबसे बड़े मैनेजमेंट संस्थानों में पढ़ाया जाएगा। जिस उम्र में बच्चे किताबों से सीखते हैं, उस उम्र में लोग उससे सीखने की तैयारी कर रहे हैं। मैदान पर छक्कों की बारिश करने वाला वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ क्रिकेट का नहीं, बल्कि सफलता, नेतृत्व, मानसिक मजबूती और टैलेंट मैनेजमेंट का भी “केस स्टडी” बनने जा रहा है।

लगातार अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया भर के गेंदबाजों की नींद उड़ाने वाले 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। इस बार उन्होंने कोई रिकॉर्ड नहीं तोड़ा है, कोई शतक नहीं लगाया है और न ही कोई ट्रॉफी जीती है। बल्कि अब देश का प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान IIM इंदौर उनकी सफलता का अध्ययन करने जा रहा है। IIM इंदौर ने वैभव सूर्यवंशी पर एक विस्तृत केस स्टडी तैयार करने का फैसला किया है। यह अध्ययन केवल उनकी बल्लेबाजी या क्रिकेटिंग उपलब्धियों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह जानने की कोशिश करेगा कि आखिर इतनी कम उम्र में कोई खिलाड़ी विश्वस्तरीय प्रदर्शन कैसे कर सकता है।

संस्थान के विशेषज्ञ खेल मनोविज्ञान, नेतृत्व, प्रबंधन, प्रतिभा विकास और व्यवहार विज्ञान के नजरिए से वैभव की यात्रा का विश्लेषण करेंगे। वे यह समझना चाहते हैं कि एक साधारण परिवार से आने वाला लड़का आखिर कैसे दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर इतनी निडरता और आत्मविश्वास के साथ खेलता है। IIM इंदौर का मानना है कि वैभव की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा का परिणाम नहीं है। इसके पीछे परिवार का त्याग, कोचों का समर्पण, सही मार्गदर्शन, अनुशासन, मानसिक मजबूती और वर्षों की कठिन मेहनत भी शामिल है। इसलिए अध्ययन का उद्देश्य केवल यह जानना नहीं है कि वैभव सफल कैसे हुए, बल्कि यह भी समझना है कि ऐसी प्रतिभाओं को लंबे समय तक कैसे संभाला और विकसित किया जा सकता है। लेकिन इस अध्ययन का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह है जिसे विशेषज्ञ “डार्क साइड” कह रहे हैं।

इतिहास गवाह है कि कम उम्र में प्रसिद्धि पाने वाले कई खिलाड़ी और कलाकार आगे चलकर दबाव, अपेक्षाओं और शोहरत के बोझ तले दब गए। करोड़ों रुपये, सोशल मीडिया की चमक, लगातार मीडिया का ध्यान और हर मैच में प्रदर्शन की उम्मीद कई बार युवा प्रतिभाओं को मानसिक रूप से थका देती है। ऐसे में IIM यह भी समझना चाहता है कि वैभव इन चुनौतियों का सामना कैसे कर रहे हैं और उन्हें भविष्य में किस तरह के समर्थन तंत्र की जरूरत होगी। अब सवाल यह है कि आखिर वैभव सूर्यवंशी इतने लंबे-लंबे छक्के कैसे मार लेते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार इसकी शुरुआत उनकी मजबूत बॉटम हैंड ग्रिप से होती है। बचपन से कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करने के कारण उनकी कलाई और फोरआर्म्स असाधारण रूप से मजबूत हो चुके हैं। यही ताकत उन्हें बैट को बेहद तेज गति से घुमाने में मदद करती है।

दूसरा कारण है उनका हाई बैकलिफ्ट। जब बैट ऊपर से नीचे आता है तो गेंद पर अतिरिक्त बल पैदा होता है, जिससे वह आसानी से बाउंड्री के पार चली जाती है। यही तकनीक दुनिया के कई महान पावर हिटर्स में भी देखने को मिलती है। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात है उनका बैलेंस। शॉट खेलते समय उनका सिर स्थिर रहता है, शरीर संतुलित रहता है और पैर गेंद की लाइन में पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि उनके शॉट्स में ताकत के साथ-साथ नियंत्रण भी दिखाई देता है। लेकिन शायद उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी टाइमिंग है। लगभग 55 किलो वजन और सामान्य शारीरिक बनावट के बावजूद वे गेंद को इतनी सफाई से मिडिल करते हैं कि उसे बाउंड्री पार कराने के लिए अतिरिक्त ताकत की जरूरत ही नहीं पड़ती। खुद वैभव कई बार कह चुके हैं कि वे ताकत से ज्यादा टाइमिंग पर भरोसा करते हैं।

इसके अलावा उनकी निर्णय लेने की क्षमता भी हैरतअंगेज है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि गेंदबाज के हाथ से गेंद छूटते ही वे उसकी लेंथ और लाइन को पढ़ लेते हैं। कुछ ही पलों में तय कर लेते हैं कि ड्राइव खेलनी है, पुल मारना है या गेंद को स्टैंड में भेजना है। और यह सब किसी जादू का परिणाम नहीं है। बताया जाता है कि उन्होंने वर्षों तक विशेष “रेंज-हिटिंग ड्रिल” की है। अभ्यास के दौरान निश्चित लक्ष्यों पर लगातार बड़े शॉट लगाने की ट्रेनिंग दी गई। दिनभर सैकड़ों गेंदों पर छक्के लगाने की कोशिश ने उनके खेल को नई ऊंचाई दी। लेकिन इन सबके बावजूद, अगर एक चीज उन्हें सबसे अलग बनाती है, तो वह है उनका निडर मानसिक रवैया।

कई युवा खिलाड़ी आउट होने के डर से रक्षात्मक हो जाते हैं। लेकिन वैभव का दृष्टिकोण अलग है। वे जोखिम लेने से नहीं घबराते। वे दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। शायद यही वजह है कि बड़ी से बड़ी परिस्थिति में भी उनका खेल स्वाभाविक और आक्रामक बना रहता है। यही कारण है कि आज वैभव सूर्यवंशी केवल क्रिकेट का एक उभरता सितारा नहीं हैं। वे इस बात का उदाहरण बन चुके हैं कि प्रतिभा, मेहनत, सही मार्गदर्शन और मजबूत मानसिकता मिल जाए तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है, और शायद यही वजह है कि जिस लड़के के छक्कों को आज दुनिया देख रही है, कल उसी की कहानी देश के सबसे बड़े मैनेजमेंट संस्थानों की कक्षाओं में पढ़ाई जाएगी। क्योंकि वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि सफलता का एक मॉडल बन चुके हैं।

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