अशोक गहलोत की सरकार में गोविंद सिंह डोटासरा के शिक्षामंत्री रहते डेढ़ दर्जन पेपर लीक हुइ, लेकिन सरकार ने रत्तीभर पर एक्शन नहीं लिया, उपर से डोटासरा ने सारा दोष परीक्षा कराने वाली एजेंसी पर डालकर बचने का प्रयास किया, लेकिन आज जब नीट का पेपर लीक हुई तो डोटासरा ही धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं। तब सवाल यह उठता है कि देश का युवा दिन-रात एक करके मेहनत करता है, माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई कोचिंग संस्थानों में उड़ेल देते हैं, ताकि बच्चे का भविष्य संवर सके, लेकिन जब परीक्षा के दिन धांधली, पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स का खेल सामने आता है, तो करोड़ों सपने एक झटके में चूर-चूर हो जाते हैं और नेता जिम्मेदारी लेने से बचने लगते हैं।
आज देश में नीट परीक्षा को लेकर घमासान मचा हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग कोनों में कांग्रेस पार्टी झंडे लेकर सड़कों पर उतरी है। राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। डोटासरा रोज़ टीवी कैमरों के सामने आकर एक ही रट लगा रहे हैं, 'केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।' हम मानते हैं कि 24 लाख नीट अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी प्रशासनिक जवाबदेही से बिल्कुल नहीं बच सकते। NTA की लापरवाही की जांच होनी ही चाहिए, लेकिन आज देश के युवाओं को ठंडे दिमाग से एक बात सोचनी होगी, क्या जो लोग आज सड़कों पर उतरकर ज्ञान बांट रहे हैं, उनके हाथ खुद साफ हैं?
जिस कांग्रेस के 5 साल के शासनकाल में अकेले राजस्थान में 17 से 18 भर्ती परीक्षाओं के पेपर बेचे गए, जहाँ ट्रांसफर के नाम पर खुलेआम दुकानें सजीं, वो कांग्रेस आज किस नैतिक हक से दूसरों का इस्तीफा माँग रही है? आज इस वीडियो में हम पर्दाफाश करेंगे कांग्रेस के इस भयावह दोहरे रवैये का! आगे बढ़ने से पहले बात करते हैं वर्तमान स्थिति की। नीट परीक्षा में जिस तरह से पेपर लीक के आरोप लगे। उसके बाद परीक्षा को रद्द किया गया और एनटीए ने दुबारा से परीक्षा करानी पड़ी, उसने पूरी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की साख की धज्जियां उड़ा दीं। हालांकि, दूसरी बार परीक्षा परिणाम जारी करके नीट क्लीन कर दी गई, लेकिन उसी को लेकर अब प्रदर्शन हो रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भले ही अब जांच और सीबीआई इंक्वायरी की बात कर रहे हों, लेकिन सवाल यह है कि शुरुआती दौर में गड़बड़ियों को खारिज क्यों किया गया? देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में अगर खामियां हैं, तो शिक्षा मंत्रालय और उसके प्रमुख होने के नाते धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए। किसी भी लोकतांत्रिक देश में अगर कोई सरकारी एजेंसी विफल होती है, तो उसका मुखिया अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान की इस नाकामी पर राजनीति का झंडा बुलंद करने वाले गोविंद सिंह डोटासरा और अशोक गहलोत से जब हम उनके दौर का हिसाब माँगते हैं, तो उनकी बोलती बंद क्यों हो जाती है?"
आइए अब रुख करते हैं राजस्थान के पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा की तरफ। डोटासरा आज हर दूसरे दिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। लेकिन ज़रा फ्लैशबैक में चलिए। जब राजस्थान में REET परीक्षा का ऐतिहासिक पेपर लीक घोटाला हुआ था, जिसने राज्य के 26 लाख युवाओं की जिंदगी अंधेरे में धकेल दी थी, तब शिक्षा मंत्री कौन था? यही गोविंद सिंह डोटासरा तब शिक्षामंत्री हुआ करते थे! उस समय जब मीडिया ने डोटासरा से पूछा कि क्या इतने बड़े घोटाले के बाद आप नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देंगे? तो डोटासरा का जवाब क्या था? बीजेपी आज उनका वही पुराना वीडियो वायरल कर रही है, जिसमें डोटासरा साफ-साफ कह रहे थे: परीक्षा कराना राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का काम है। इसमें शिक्षा मंत्री का क्या लेना-देना? मैं इस्तीफा क्यों दूँ?'
क्या बात है डोटासरा जी। जब राजस्थान में रीट का पेपर लीक हुआ, तो जिम्मेदारी शिक्षा बोर्ड की थी, शिक्षा मंत्री निष्पाप थे! जब राजस्थान में वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा का पेपर चलती बस में हल कराया जा रहा था, तब भी शिक्षा मंत्री निर्दोष थे, लेकिन आज जब केंद्र में NTA परीक्षा करा रहा है, तो NTA जिम्मेदार नहीं, सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं? यह कैसा दोहरा मापदंड है? जब सत्ता आपके पास थी, तो कुर्सी से चिपकने के लिए बोर्ड को ढाल बना लिया और आज जब आप विपक्ष में हैं, तो खुद के बनाए नियम भूल गए? डोटासरा जी, जनता और राजस्थान का युवा आपकी इस अवसरवादी राजनीति को बहुत अच्छे से देख रहा है! कर्नाटक में परीक्षा का पेपर लीक हुआ, लेकिन कांग्रेस पार्टी वहां के शिक्षामंत्री से इस्तीफा नहीं मांग रही है। पंजाब में पेपर लीक हुआ, लेकिन वहां के शिक्षामंत्री से इस्तीफा नहीं मांगा जा रहा है। यानी इस्तीफा भी सलेक्टिव होता है।
बात सिर्फ एक या दो परीक्षाओं की नहीं है। अशोक गहलोत के 5 साल के शासनकाल को अगर राजस्थान के इतिहास में 'पेपर लीक का काला दौर' कहा जाए तो गलत नहीं होगा। 2018 से 2023 के बीच राजस्थान में एक के बाद एक 17 से 18 प्रमुख भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए या बेचे गए। REET लेवल-2, वरिष्ठ अध्यापक भर्ती, कांस्टेबल भर्ती, SI भर्ती, JEN भर्ती, हाई कोर्ट LDC भर्ती... लिस्ट इतनी लंबी है कि पढ़ते-पढ़ते वक्त खत्म हो जाए! उस समय पेपर लीक माफिया मुख्यमंत्री आवास तक तार जुड़े होने के आरोपों से घिरे रहे, लेकिन क्या गहलोत सरकार के किसी एक भी मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया? जवाब है—बिल्कुल नहीं! एक भी इस्तीफा नहीं हुआ।
अब जरा ट्रांसफर के खेल की हकीकत भी सुन लीजिए! आज डोटासरा जी बीजेपी सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि शिक्षकों के ट्रांसफर में 3-3 लाख रुपये का लेन-देन हो रहा है। डोटासरा जी, क्या आपको वो दिन याद है जब जयपुर के बिरला मंदिर (ऑडिटोरियम) में खुद आपके मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंच पर खड़े थे? गहलोत जी ने मंच से बड़े गर्व से शिक्षकों से पूछा था: 'क्या ट्रांसफर के लिए आप लोगों को पैसे देने पड़ते हैं?' और वहां मौजूद हजारों शिक्षकों ने एक सुर में दहाड़कर कहा था: 'हाँ, पैसे देने पड़ते हैं!' और मजेदार बात यह है कि डोटासरा भी उसी मंच पर मौजूद थे। यह दृश्य पूरे देश ने टीवी पर लाइव देखा था। कांग्रेस शासनकाल में आलम यह था कि विधायकों और मंत्रियों ने बाकायदा ट्रांसफर के लिए 'काउंटर' खोल रखे थे। लाखों रुपये ऐंठने के बावजूद शिक्षकों के ट्रांसफर नहीं होते थे और वो दर-दर भटकते रहते थे। जो लोग खुद ट्रांसफर उद्योग चला रहे थे, वे आज भ्रष्टाचार पर प्रवचन दे रहे हैं!
कांग्रेस का यह दोहरापन सिर्फ राजस्थान के नेताओं तक सीमित नहीं है, इसमें उनकी केंद्रीय कमान भी बराबर की भागीदार है। राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब राज्य का युवा पेपर लीक को लेकर गुस्से में उबल रहा था, तब कांग्रेस की स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा राजस्थान आईं। जब उनसे राजस्थान के 17-18 पेपर लीक पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने अशोक गहलोत सरकार को क्लीन चिट देते हुए क्या कहा था? प्रियंका गांधी का आधिकारिक बयान था: 'देशभर में पेपर लीक होते हैं। इसे रोकने की कोई तकनीक अभी तक नहीं बनी है। इसमें सरकार की कोई गलती या दोष नहीं है।' ज़रा सोचिए! जब राजस्थान में 17 पेपर बेचे जा रहे थे, तब कांग्रेस के बड़े नेताओं के पास 'पेपर लीक रोकने की कोई तकनीक नहीं थी' और गहलोत सरकार पूरी तरह 'निर्दोष' थी। लेकिन आज जब वही घटना केंद्र स्तर पर नीट परीक्षा में सामने आती है, तो अचानक कांग्रेस को सारी तकनीक भी समझ आ जाती है और सरकार दोषी भी लगने लगती है!
यदि प्रियंका गांधी के तर्क को माना जाए कि पेपर लीक रोकने की कोई तकनीक नहीं होती, तो फिर आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से किस मुंह से इस्तीफा माँगा जा रहा है? और अगर धर्मेंद्र प्रधान दोषी हैं, तो फिर अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा और पूरी कांग्रेस पार्टी को राजस्थान के लाखों युवाओं से घुटने टेककर माफी माँगनी चाहिए!"
साथियों, सच बहुत कड़वा है। आज का युवा किसी पार्टी का बंधुआ मजदूर नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान और केंद्र सरकार से हमारा सवाल: आप अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। NTA के ढुलमुल रवैये ने लाखों नीट छात्रों का साल और उनका भविष्य दांव पर लगाया है। आपको इस तंत्र को दुरुस्त करना होगा और दोषियों को जेल भेजना होगा। लेकिन अशोक गहलोत, डोटासरा और कांग्रेस से हमारा सीधा सवाल: जो दर्द आज नीट अभ्यर्थियों को हो रहा है, वही दर्द राजस्थान के उन लाखों युवाओं ने झेला था जिनके 17 पेपर आपकी नाक के नीचे बेच दिए गए थे। तब आपकी नैतिकता कहाँ सो रही थी? तब आपके इस्तीफे कहाँ चले गए थे? छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ चाहे दिल्ली से हो या जयपुर से, दोनों ही अपराध हैं। लेकिन जब अपनी नाकामियों के पहाड़ पर बैठकर लोग दूसरों पर पत्थर फेंकते हैं, तो उनकी इस 'सुविधाजनक राजनीति' का पर्दाफाश करना बेहद जरूरी हो जाता है।
राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा समेत तमाम कांग्रेसी धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं, लेकिन कर्नाटक में पेपर लीक पर एक शब्द नहीं बोल रहे हैं। जनवरी 2026 में कक्षा 10वीं की प्रिपरेटरी परीक्षा का सामाजिक विज्ञान समेत अन्य विषयों का प्रश्न पत्र परीक्षा से कुछ घंटे पहले ही इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर वायरल हो गया था। साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में जांच करते हुए एक हेडमास्टर और कई शिक्षकों को गिरफ्तार किया था। लेकिन यहां पर शिक्षामंत्री मधु बंगारप्पा का इस्तीफा नहीं मांगा जा रहा है। आम आदमी पार्टी के तमाम नेता धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं, लेकिन अपनी सरकार के शिक्षामंत्री का इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं। हाल ही में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा आयोजित 454 फार्मेसिस्ट पदों की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर हाई-टेक नकल और ब्लूटूथ रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। परीक्षा केंद्रों के बाहर और भीतर गुप्त ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों को उत्तर मुहैया कराए जाने का मामला सामने आया। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की कक्षा 12वीं की अंग्रेजी विषय की बोर्ड परीक्षा का प्रश्न-पत्र परीक्षा से कुछ समय पहले ही लीक हो गया था, जिसके बाद पंजाब सरकार को पूरे राज्य में परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। पंजाब लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा में ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए हाई-टेक नकल तथा अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया था। राज्य में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की कुछ अन्य परीक्षाओं और कृषि अधिकारी भर्ती में भी पर्चे लीक होने व घपले के आरोप विपक्ष द्वारा लगातार लगाए गए हैं। इतने के बाद भी केजरीवाल, सिसोदिया, और संजय सिंह यहां पर शिक्षा मंत्री हरजौत सिंह बैंस का इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं।

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