मोदी की अपील को गंभीरता से क्यों लें?


हमारे देश पर 255 लाख का कर्जा बताया जाता है और इसी आधार पर विपक्ष के द्वारा मोदी सरकार को जमकर घेरा जाता है। यह भी दावा किया जाता है कि विकास के जो आंकड़े सरकार पेश करती है, वो झूठे हैं, लेकिन इस वर्ष की पहली तिमाही के 7.8 फीसदी जीडीपी आंकड़ों के उत्साह से उत्साहित होकर पीएम मोदी ने विदेश से ही वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड़ कर दिया। इसमें मोदी ने देश को बधाई दी और दावा किया कि भारत आज दुनिया में युद्ध और अस्थिरता के माहौल को पीछे छोड़कर तेजी से ग्रोथ करती अर्थव्यवस्था बना है। साथ ही मोदी ने अपील करते हुए कहा कि हमें विदेश से कम से कम सोना खरीदना है, मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया की तरह ही वेड इन इंडिया को अपना होगा, यानी भारत के जो लोग विदेशों में जाकर शादियां करते हैं उनको भारत में ही करनी चाहिए। मोदी ने देश के लोगाों से बहुत कुछ कहा है। आज हम इसी विषय पर डिटेल से बात करेंगे कि मोदी ने शादियों और सोने के आयात रोकने पर इतना बल क्यों दिया है?

तो बात करते हैं भारत की अर्थव्यवस्था के उन आंकड़ों की, जो शायद आपको कहीं एक जगह न मिलें। इस वीडियो में हम जानेंगे कि भारत हर साल विदेशों से कितने रुपयों का सामान मंगाता है, कितना निर्यात करता है, और क्या भारत को व्यापार में घाटा होता है या लाभ।  साथ ही, हम यह भी देखेंगे कि भारतीय विदेशों में शादियों और घूमने पर कितना पैसा खर्च करते हैं, और विदेशी पर्यटक भारत से कितनी कमाई कराते हैं।  तो चलिए, शुरू करते हैं। 

सबसे पहले बात करते हैं भारत के कुल आयात और निर्यात की। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात, यानी माल और सेवा मिलाकर, रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर रहा, जो भारतीय रुपये में लगभग 72 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। इसमें माल निर्यात लगभग 441.78 अरब डॉलर था और सेवा निर्यात 421.3 अरब डॉलर। वहीं, कुल आयात 979.4 अरब डॉलर रहा, यानी लगभग 82 लाख करोड़ रुपये। इसका मतलब है कि भारत को कुल मिलाकर 119.3 अरब डॉलर, यानी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का व्यापार घाटा हुआ।  अब यदि हम केवल माल यानी merchandise की बात करें तो स्थिति और स्पष्ट होती है। अप्रैल से जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक माल निर्यात 177.78 अरब डॉलर रहा, जबकि माल आयात 292.38 अरब डॉलर रहा। इससे माल व्यापार घाटा 118.6 अरब डॉलर हो गया, यानी लगभग 9.9 लाख करोड़ रुपये। 

अब सवाल यह है कि भारत आयात क्या करता है? भारत के कुल आयात का लगभग 46 से 55% केवल कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना, और मशीनरी जैसी चार वस्तुओं में चला जाता है। अन्य प्रमुख आयात वस्तुओं में शामिल पेट्रोलियम उत्पाद, जिन पर भारत की ऊर्जा जरूरतें बहुत निर्भर हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन, जो मुख्यतः चीन, वियतनाम और कोरिया से आते हैं, मशीनरी और औद्योगिक उपकरण, और रासायनिक उत्पाद व फार्मास्यूटिकल का कच्चा माल जर्मनी, जापान और चीन से आता है।  निर्यात की बात करें, तो भारत के प्रमुख निर्यात में शामिल हैं पेट्रोलियम उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा, और आईटी सेवाएं। अमेरिका के साथ भारत का व्यापार लाभ 2025-26 में 31.2 अरब डॉलर रहा, हालांकि यह 2024-25 के 43.19 अरब डॉलर से 28% कम है। 

अब आते हैं सोने के आयात पर, जो भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर का सोना आयात किया, जो लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। यह 2024-25 के 58 अरब डॉलर से 24% अधिक है। हैरानी की बात यह है कि वॉल्यूम में गिरावट के बावजूद कीमतें बढ़ने से आयात बिल बढ़ गया। 2021-22 में 868.4 टन सोना आयात हुआ था, जो 2025-26 में घटकर 718.74 टन रह गया, लेकिन आयात बिल 45.5 अरब डॉलर से बढ़कर 71.7 अरब डॉलर हो गया। 

सोना भारत मुख्यतः स्विट्जरलैंड से मंगाता है, जो लगभग 40% हिस्से के साथ सबसे बड़ा स्रोत है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से 16% से अधिक आता है, और जून 2026 में UAE से आयात 175.2% बढ़कर 649.4 मिलियन डॉलर हो गया। दक्षिण अफ्रीका से लगभग 10% आता है। अप्रैल से जून 2026 में सोना आयात 47.1% बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो चिंता का विषय बना हुआ है। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2026 में नागरिकों से एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। अब बात करते हैं विदेशों में शादियों की। भारतीयों की विदेशी शादियों का ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2028 तक भारत की 30 से 32% शादियां डेस्टिनेशन वेडिंग होंगी। वर्तमान में औसत घरेलू डेस्टिनेशन वेडिंग बजट 58 लाख रुपये है, जबकि औसत अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन वेडिंग बजट 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है। यद्यपि सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है कि हर साल कितने भारतीय विदेशों में शादी करते हैं, लेकिन LRS यानी Liberalised Remittance Scheme के तहत यात्रा संबंधी विदेशी प्रेषण से अंदाजा लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल LRS प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा, यानी लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये, जिसमें यात्रा सबसे बड़ा हिस्सा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NRI और अमीर तबके की विदेशी शादियों पर कुल खर्च लगभग 1 लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष होने का अनुमान है।

भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग्स की बात करें, तो उदयपुर, गोवा, मुंबई, जयपुर, नीमराणा जैसे स्थान प्रमुख पसंदीदा गंतव्य हैं। घरेलू डेस्टिनेशन वेडिंग्स का औसत बजट 58 लाख रुपये है, और यह खर्च 8% सालाना की दर से बढ़ रहा है। लग्जरी शादियों का बजट 5 से 50 करोड़ रुपये के बीच होता है, और सुपर-लग्जरी केसों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च भी देखा गया है। अब आते हैं उस सवाल पर कि भारतीय विदेश घूमने कितने जाते हैं और कितना खर्च करते हैं। RBI के LRS डेटा के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में कुल LRS प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा, यानी लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये विदेश भेजे गए। मई 2026 में अकेले यात्रा पर खर्च 1.28 अरब डॉलर था, यानी लगभग 10,600 करोड़ रुपये। जून 2026 में यात्रा खर्च 1.36 अरब डॉलर हो गया, जो मई से 6.6% अधिक था। उद्योग अनुमानों के मुताबिक 2026 में आउटबाउंड ट्रिप्स यानी भारतीयों द्वारा विदेश यात्रा लगभग 40 से 44 मिलियन रहने का अनुमान है, यानी 4 से 4.4 करोड़। प्रधानमंत्री मोदी ने मई 2026 में नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्रा न करने की अपील की थी, लेकिन जून में ही यात्रा खर्च 10.7% बढ़ गया। 

अब इसका उल्टा सवाल— विदेशों से कितने लोग भारत आते हैं और इससे भारत को कितनी कमाई होती है? 2025 में भारत में 9.15 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, यानी 91.5 लाख, जो 2024 की तुलना में 8.07% कम है।  यदि NRI को भी शामिल करें, तो कुल अंतरराष्ट्रीय आगमन 20.22 मिलियन रहा, यानी 2.02 करोड़, जो 1.71% की गिरावट दर्शाता है। पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय 2025 में लगभग 2.7 ट्रिलियन रुपये रही, यानी लगभग 32 अरब डॉलर, जो 2024 की तुलना में 9.5% कम है। 2024 में यह आय लगभग 35 अरब डॉलर थी। लेकिन यहाँ एक अच्छी खबर भी है। विदेशी पर्यटकों की गिरावट के बीच, घरेलू पर्यटन ने रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। 2025 में घरेलू पर्यटक यात्राएं 4.29 अरब तक पहुंचीं, यानी 429 करोड़, जो 2024 की तुलना में लगभग 46% की वृद्धि है। यह घरेलू पर्यटन उद्योग के लिए एक बड़ी राहत की बात है, क्योंकि घरेलू पर्यटकों से होने वाली आय विदेशी पर्यटकों की तुलना में कई गुना अधिक है। अनुमानों के मुताबिक भारत के यात्रा और पर्यटन क्षेत्र ने 2025 में अर्थव्यवस्था को 263.6 अरब डॉलर का योगदान दिया, यानी लगभग 22 लाख करोड़ रुपये, और 46.2 मिलियन नौकरियों का समर्थन किया। 

अंत में मेक इन इंडिया की बात करें। इस पहल के तहत भारत ने आयात रोकने पर जोर दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का 2025-26 में उत्पादन 13.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि निर्यात 4.24 लाख करोड़ रुपये रहा। यह 2014-15 से लगभग 7 गुना और 11 गुना वृद्धि दर्शाता है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मेक इन इंडिया ने न केवल विदेशी मुद्रा की बचत की है, बल्कि निर्यात के जरिए अर्जन भी बढ़ाया है।

यह भारत की अर्थव्यवस्था की एक विस्तृत तस्वीर है। एक तरफ रिकॉर्ड निर्यात और घरेलू पर्यटन में उछाल है, तो दूसरी तरफ आयात बिल, खासकर सोने और कच्चे तेल का, चिंता का विषय बना हुआ है। विदेशों में शादियों और घूमने पर होने वाला खर्च विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो को बढ़ा रहा है, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है। प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद सोना खरीद और विदेश यात्रा में कमी नहीं आई है, जो बताता है कि व्यवहार परिवर्तन में समय लगता है। मेक इन इंडिया जैसे पहलें सकारात्मक दिशा में हैं, लेकिन आयात निर्भरता कम करने के लिए और प्रयासों की आवश्यकता है। अंततः, भारत को अपनी विदेशी मुद्रा बचाने के लिए आयात को कम करना, निर्यात को बढ़ाना, और घरेलू पर्यटन को और मजबूत करना होगा, तभी हम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन पाएंगे और जीडीपी रफ्तार और तेज गति पकड़ पाएगी।


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