प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ समिट के दौरान विदेश से एक वीडियो जारी कर देश के लोगों को जीडीपी आंकड़ों को लेकर बधाई दी है। भारत ने 2026-27 की तिमाही में 7.8 फीसदी जीडीपी हासिल की है। दुनिया के कई देश युद्ध से जूझ रहे हैं, खाड़ी देशों से तेल नहीं मिलने के कारण भारत का तेल खर्च कई गुणा बढ़ गया है, पाकिस्तान के साथ भारत का कारोबार बंद है तो चीन के साथ भी इतना आसान नहीं है। इधर, श्रीलंका, बंग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ौसी देश संकटों से जूझ रहे हैं और भारत ने अपने लक्ष्य के बराबर जीडीपी दर हासिल की है। इसलिए पीएम मोदी ने देश के लोगों को बधाई दी है, साथ ही अपील की है कि मेक इन इंडिया की तरह से वेड इन इंडिया और मेड इन इंडिया पर फॉकस करना चाहिए, शादियां देश में करनी चाहिए और घूमने के लिए विदेश के बजाए देश में ही स्थान ढूंढना चाहिए। आखिर मोदी ने ऐसा क्यों कहा है? क्या वजह है कि पीएम मोदी ने लोगों को कम से कम विदेश जाने, शादियां भारत में करने और घूमने भी विदेश नहीं जाने की अपील की है। मोदी की इस छोटी अपील के पीछे देश का पूरा अर्थशास्त्र जुड़ा है।
भारत के आयात-निर्यात, विदेशी शादियों, मेक इन इंडिया उत्पादन और पर्यटन आंकड़े देश की आर्थिक दिशा और घरेलू खर्च के पैटर्न दोनों को समझने में मदद करते हैं। आधिकारिक आंकड़ों और उद्योग अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025–26 में भारत का माल और सेवा मिलाकर कुल निर्यात लगभग 860.1 अरब डॉलर रहा, जबकि कुल आयात लगभग 979.4 अरब डॉलर तक पहुंचा। इसका मतलब है कि भारत को इस अवधि में कुल मिलाकर लगभग 119.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा झेलना पड़ा। यदि केवल माल की बात करें, तो निर्यात लगभग 441.78 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात लगभग 775–776 अरब डॉलर के आसपास रहा, जिससे माल का व्यापार घाटा लगभग 333–334 अरब डॉलर निकलता है। यानी भारत की निर्यात इंजन तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कुछ कच्चे माल के भारी आयात के कारण घाटा अभी भी बड़ा बना हुआ है।
इसी संदर्भ में एक और चर्चित मुद्दा है विदेशों में शादियां और लग्जरी ट्रैवल पर होने वाला खर्च। हालांकि सरकार “शादी के लिए विदेश जाने वालों” की अलग से गिनती नहीं छापती, लेकिन रिज़र्व बैंक के आंकड़े और मीडिया रिपोर्ट्स से तस्वीर साफ़ होती है। FY 2025–26 में भारतीय निवासियों ने Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत केवल “Travel” हेड के तहत लगभग 16.44 अरब डॉलर विदेश भेजे। इसमें शिक्षा, चिकित्सा और घूमने-फिरने के साथ-साथ शादी-समारोह से जुड़े खर्च भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NRI और अमीर तबके की विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग्स पर सालाना खर्च लगभग एक लाख करोड़ रुपये के आसपास होने का अनुमान है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर सरकारी नहीं है, लेकिन उद्योग और मीडिया विश्लेषण पर आधारित है, और बताता है कि कैसे विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा लग्जरी सामाजिक खर्चों में बाहर जा रहा है। जबकि, भारत में होने वाली बड़ी डेस्टिनेशन वेडिंग्स, खासकर राजस्थान, गोवा, उदयपुर, जयपुर जैसे हब्स में प्रति शादी बजट अक्सर 5 से 50 करोड़ रुपये के बीच होता है, और सुपर-लग्जरी केसों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च भी देखा गया है।
मेक इन इंडिया के तहत उत्पादन और निर्यात की तस्वीर भी उभर कर सामने आई है। हालांकि “कुल मेक इन इंडिया प्रोडक्शन” का एक ही आधिकारिक नंबर नहीं होता, लेकिन प्रमुख सेक्टरों के आंकड़े रास्ता दिखाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में FY 2025–26 में उत्पादन लगभग 13.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि निर्यात लगभग 4.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा। यह 2014–15 के मुकाबले क्रमशः लगभग 7 गुना और 11 गुना वृद्धि दर्शाता है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन लगभग 1.78 लाख करोड़ रुपये रहा और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। समग्र तौर पर, माल निर्यात FY 2025–26 में लगभग 441.78 अरब डॉलर रहा, जो “मेड इन इंडिया” माल के वैश्विक बाज़ार में बढ़ते स्वीकार्य होने का संकेत देता है।
पर्यटन के मामले में दो तरफ़ा बहाव दिखाई देता है। एक तरफ भारतीयों का विदेश यात्रा पर बढ़ता खर्च है, दूसरी तरफ भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों से होने वाली कमाई शामिल है। उद्योग अनुमानों के मुताबिक, 2026 में आउटबाउंड ट्रिप्स, यानी भारतीयों द्वारा विदेश यात्रा लगभग 40–44 मिलियन के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि 2025 में यह लगभग 37–39 मिलियन के आसपास था। LRS के तहत travel remittance जून 2026 में अकेले 1.37 अरब डॉलर रहा, जो पूरे वर्ष के 16.44 अरब डॉलर के ट्रेंड के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। दूसरी ओर, 2025 में लगभग 2.02 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटक भारत आए और इससे लगभग 31.7 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आय हुई। कुछ अन्य स्रोत 2024 के लिए लगभग 35 अरब डॉलर और 2025 के लिए लगभग 31.69 अरब डॉलर बताते हैं, जिसमें औसत खर्च और मिक्स में बदलाव को कारण बताया गया है।
इन आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो एक स्पष्ट तस्वीर बनती है, जो बताता है कि भारत का निर्यात इंजन मज़बूत हो रहा है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे रणनीतिक सेक्टरों में, लेकिन आयात की रफ़्तार अभी भी तेज़ है, जिससे व्यापार घाटा बना हुआ है। साथ ही घरेलू खर्च के पैटर्न में लग्जरी और सामाजिक खर्च— जैसे विदेशी शादियां और आउटबाउंड ट्रैवल का हिस्सा उल्लेखनीय है, जो विदेशी मुद्रा के आउटफ्लो में योगदान देता है। वहीं, पर्यटन के ज़रिए भारत को मिलने वाली कमाई भी महत्वपूर्ण है, हालांकि आउटबाउंड खर्च के मुकाबले यह अभी कम है। नीति-निर्माताओं के लिए चुनौती यह है कि वे निर्यात को और बढ़ावा दें, आयात में कुशलता लाएं, और पर्यटन व सेवा निर्यात से विदेशी मुद्रा आय को और मज़बूत करें, ताकि व्यापार घाटा धीरे-धीरे संकुचित हो सके।

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