तीसरी बार जीतकर मंत्री बनने की फिराक में अध्यक्ष. Chittodgarh Election 2024



राजस्थान का चित्तौड़गढ़ का किला दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यह किला विश्व का एकमात्र किला है, जहां पर तीन शताब्दियों में तीन बड़े जौहर हुए हैं। पहला जौहर रावल रतन सिंह के शासनकाल अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय 1303 में रानी पद्मिनी रघुवंशी के नेतृत्व में हजारों स्त्रियों ने एक साथ जौहर किया गया। दूसरा जौहर राणा विक्रमादित्य के शासनकाल में गुजरात के शासक बहादुर शाह के आक्रमण के समय में रानी कर्णावती के नेतृत्व में 8 मार्च 1534 ई. हुआ। तीसरा जौहर राणा उदयसिंह के शासनकाल में अकबर के आक्रमण के समय 25 फरवरी 1568 में पत्ता सिसोदिया की पत्नी फूल कंवर के नेतृत्व में किया गया। 

चित्तौड़गढ़ की मिट्टी वैसे तो महाराणा प्रताप के पूर्वजों की धरती भी है, जहां अपने शासन को बचाने के लिए योद्धाओं के घोड़ों के कारण साल भर गर्दा उड़ता था, लेकिन इन दिनों यहां पर सीमेंट के कारण गर्दा उड़ता है। हालांकि, अभी लोकसभा चुनाव का मौसम है तो राजनीति का गर्दा ज्यादा उड़ रहा है। सांवरिया सेठ की यह धरती इन दिनों भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी और निर्दलीय विधायक चंद्रभान आक्या की अदावत के कारण काफी चर्चा में है। जोशी लगातार तीसरी बार जीतकर केंद्रीय मंत्री के लिए तैयारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ चंद्रभान आक्या को सीएम भजनलाल ने मनाकर पार्टी के साथ चुनाव प्रचार करने के लिए तैयार कर लिया है, लेकिन कांग्रेस ने पूर्व कैबिनेट मंत्री उदयलाल आंजना को टिकट देकर जीत का दावा ठोक दिया है।  

सीपी जोशी और उदयलाल आंजना के बीच कौन मजबूत है और आम चुनाव बाद क्या परिणाम रहने की संभावना है, यह सब जानेंगे, लेकिन लोकसभा चुनाव सीट के विश्लेषण की इस कड़ी में आज यह जानना जरूरी है कि चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट का क्या महत्व है? चित्तौड़गढ़ सीट पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी लगातार तीसरी बार मैदान में हैं। इस सीट का महत्व इसलिए नहीं है कि सीपी जोशी चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद जब सीएम बनाने की बारी आई तो सीपी जोशी भी खुद को सीएम का बड़ा दावेदार मान रहे थे, लेकिन जब भजनलाल शर्मा को सीएम बनाया गया तब सीपी जोशी का दिल टूट गया। सरकार गठन के बाद कई दिनों तक सीपी जोशी के चेहरे पर इस बात का दुख साफतौर दिखाई देता रहा है। 

अब यह कहा जा रहा है कि जोशी को आम चुनाव जीतने के बाद चित्तौड़गढ़ से केंद्रीय मंत्री बनाया जाएगा। पीएम मोदी के पिछले दो कार्यकाल को गंभीरता से देखा जाए तो पाली, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जयपुर ग्रामीण, नागौर, श्रीगंगानगर, अजमेर जैसी सीटों से जीतने वाले सांसदों को केंद्र में मंत्री बनाया जा चुका है। इस बार चुनाव के बाद पूर्वी राजस्थान, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, शेखावाटी अंचल से मंत्री बनाने का नंबर आ सकता है। इसलिए सीपी जोशी के समर्थकों का मानना है कि उनके सांसद के जीतने पर इस बार केंद्र में मंत्री बनने का नंबर आएगा। शनिवार को ही सीपी जोशी को भाजपा अध्यक्ष बने एक साल हुआ है और इस अवसर पर उनके समर्थक सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि राजस्थान में 115 विधायकों के साथ बहुमत की सरकार बनाने का काम उन्होंने किया है।

वैसे हकीकत यह है कि राजस्थान में भाजपा सरकार बनाने का सबसे अधिक क्रेडिट तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां को जाता है। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ जैसे संघर्ष करने वाले नेताओं को भी इसका श्रेय जाता है। डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने कई बार दावा किया है कि सरकार बनाने का सारा काम डॉ. सतीश पूनियां ने किया था। आपको याद होगा आखिरी महीनों में सतीश पूनियां की जगह सीपी जोशी को अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन तब तक सरकार की विदाई का मार्ग तय हो गया था। ऐसे में सीपी जोशी को श्रेय वही नेता या कार्यकर्ता दे सकते हैं, जिनको सतीश पूनियां से व्यक्तिगत द्वेष हो या फिर सीपी जोशी के कट्टर समर्थक हों। अब बात करते हैं सीपी जोशी के मंत्री बनने से पहले जीतने या हारने की संभावना कितनी बन रही है। कांग्रेस ने राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री उदयलाल आंजना को मैदान में उतारा है। इससे पहले आंजना ने चित्तौड़गढ़ सीट पर भाजपा नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह को हराया था। साथ ही निम्बाहेडा विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे हैं। 

जातिगत आधार की बात की जाए तो चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट पर 85 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण और 15 प्रतिशत शहरी हैं। कुल आबादी का 13 फीसदी अनुसूचित जाति और 24 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं। इसके अलावा राजपूत और ब्राह्मण हैं, जो किसी भी प्रत्याशी की जीत और हार तय करते हैं। इसीलिए भाजपा ने तीसरी बार सांसद सीपी जोशी को प्रत्याशी बनाया, जो ब्राह्मण वर्ग से हैं, जबकि कांग्रेस ने पिछली बार गोपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया था, जो राजपूत समुदाय थे। जबकि 2014 के चुनाव में भाजपा के सीपी जोशी और कांग्रेस की डॉ. गिरिजा व्यास ब्राह्मण समुदाय से थे। 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां से डॉ. गिरिजा व्यास ने जीत दर्ज की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में चित्तौड़गढ़ सीट पर 64.5 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें से बीजेपी को 60 फीसदी और कांग्रेस को 33 फीसदी वोट मिले थे। उस चुनाव में बीजेपी से सीपी जोशी ने कांग्रेस की सिटिंग सांसद गिरिजा व्यास को 3,16,857 मतों के भारी अंतर से हराया था। बीजेपी से जोशी को 7,03,236 और कांग्रेस से गिरिजा व्यास को 3,86,379 वोट मिले थे।

चित्तौड़गढ़ से भाजपा की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह, पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के दामाद नरपत सिंह राजवी, असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के अलावा, उदयपुर राजघराने के महेंद्र सिंह मेवाड़ और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास सांसद रह चुकी हैं। आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट जनसंघ के खाते में गई, लेकिन उसके बाद साल 1957, 1962, 1967 के चुनावों में यहां कांग्रेस को जीत मिली। 1971 में जनसंघ ने एक बार फिर वापसी की। उसके बाद 1977 में जनता पार्टी ने इस सीट पर कब्जा जमाया। 1980 और 1984 में फिर कांग्रेस की वापसी हुई, जिसके बाद 1989, 1991, 1996 में भाजपा ने यहां जीत दर्ज की। साल 1998 में कांग्रेस, 1999, 2004 में बीजेपी तथा साल 2009 में एक बार फिर कांग्रेस विजयी रही।

इस तरह यदि उम्मीदवार दमदार हो तो यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला बराबरी का कहा जा सकता है, जबकि मोदी लहर का असर नहीं हो। चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र में 8 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ की 6 सीटें कपासन, बेगूं, चित्तौडग़ढ़, निम्बाहेड़ा, बड़ी सादड़ी, प्रतापगढ़ के अलावा उदयपुर की दो सीट मावली और वल्लभनगर शामिल हैं। तीन महीने पहले साल 2023 में संपन्न विधानसभा चुनाव में कपासन, बैंगू, निंबाहेडा, बड़ी सादड़ी, प्रतापगढ़ में भाजपा प्रत्याशी जीते हैं, जबकि मावली में कांग्रेस के पुष्कर लाल डांगी जीते और चित्तौड़गढ़ सीट पर भाजपा से बागी हुए चंद्रभान आक्या जीते हैं। चंद्रभान आक्या ने शनिवार को भाजपा को समर्थन दे दिया है। ऐसे में कहें कि संसदीय क्षेत्र की 8 में से 7 सीट भाजपा के पास है तो गलत नहीं होगा। 

जातिगत समीकरण और विधानसभा सीटों पर जीत के आधार पर बात की जाए तो भाजपा के उम्मीदवार सीपी जोशी बहुत भारी पड़ रहे हैं। ऊपर से उदयलाल आंजना के खिलाफ हाल ही में विदा हुई कांग्रेस सरकार के खिलाफ बनी एंटी इंकम्बेंसी के कारण हवा थमी नहीं है। चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक, जातिगत, राजनीतिक और भौगोलिक जैसे सभी पक्षों पर गौर करने के बाद कहा जाए कि भाजपा के सीपी जोशी लगातार तीसरी बार चुनाव जीत रहे हैं, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिए।

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