चने-मूंग की 100 फीसदी खरीद पर केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी और उपमुख्यमंत्री बैरवा रहे निरुत्तर, धन्ना भगत की जन्मस्थली पर किसानों ने घेरा
जयपुर जिले की तहसील फागी के ग्राम चोरू में 10 अप्रैल को संत धन्ना भगत की जयंती पर आयोजित समारोह उस समय एक अप्रत्याशित राजनीतिक टकराव की भूमि बन गया, जब वहाँ उपस्थित किसानों ने एक ही मंच पर बैठे केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा को सीधे सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया।
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट की उपस्थिति में किसानों ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से मांग की कि जिस तरह अरहर, मसूर और उड़द की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का मार्ग प्रशस्त किया गया है, उसी तरह चने और मूंग की भी सौ फीसदी खरीद की घोषणा की जाए। इस मांग पर दोनों मंत्री मौन हो गए। जब वे विषयांतर करते हुए आलू-टमाटर को देश में कहीं भी बेचने की योजना का बखान करने लगे तो किसानों ने उन्हें बीच में ही टोक दिया। दोबारा वही बात दोहराई तो किसानों ने फिर रोक दिया। मंच पर बैठे केंद्रीय मंत्री के पास किसानों की मूल मांग का कोई जवाब नहीं था।
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का हाल भी कुछ अलग नहीं रहा। जब उनसे ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसलों को हुई क्षति की संपूर्ण भरपाई की घोषणा का आग्रह किया गया तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सभा में बैठे किसान बार-बार स्पष्ट घोषणा की मांग करते रहे, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने कोई ठोस आश्वासन देने से परहेज किया।
यह महज संयोग नहीं, बल्कि गहरी विडंबना है। चोरू और उससे सटा दूदू विधानसभा क्षेत्र, जो अजमेर लोकसभा सीट का हिस्सा है, इस पूरे इलाके की खेती की आर्थिक रीढ़ ही चना और मूंग है और भागीरथ चौधरी उसी अजमेर लोकसभा क्षेत्र से चुनकर संसद पहुंचे हैं, जबकि प्रेमचंद बैरवा दूदू से विधायक और फिर उपमुख्यमंत्री बने हैं। अपने ही मतदाताओं की सबसे ज़रूरी मांग पर दोनों जनप्रतिनिधि निरुत्तर रहे, यह तथ्य किसानों के जेहन में गहरी निराशा छोड़ गया।
इस मामले की पृष्ठभूमि भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी PM-AASHA के तहत तय किया गया था कि 25 प्रतिशत से अधिक की खरीद पर कृषि के साथ वित्त और वाणिज्य मंत्रालय की अनुमति अनिवार्य होगी। किसानों के लगातार विरोध के बाद 31 अगस्त 2022 को अरहर, मसूर और उड़द के लिए यह सीमा 25 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत की गई, और अंततः 31 मार्च 2024 को इन तीनों दलहनों से प्रतिबंध पूरी तरह हटाकर शत-प्रतिशत खरीद का रास्ता खोल दिया गया, लेकिन हर बार इस राहत से चना और मूंग को जानबूझकर बाहर रखा गया, जो एक भेदभावपूर्ण नीति जिसने किसानों में गहरा आक्रोश भरा है।
धन्ना भगत की पावन जन्मस्थली पर आयोजित जयंती समारोह में जो संयोग बना, उसने किसानों को अपने प्रतिनिधियों के सामने सीधे अपनी पीड़ा रखने का मौका दिया, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद जो उम्मीद जगी थी, वह भी इस मंच पर ठंडी पड़ गई। मंत्री और उपमुख्यमंत्री की चुप्पी ने यह स्पष्ट कर दिया कि चना और मूंग किसानों की लड़ाई अभी लंबी है।

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