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IPL: झुंझुनूं से ईडन गार्डन तक मुकुल चौधरी की कहानी

 


राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक छोटी-सी बात होती है। वहां की रेत में सपने उगते तो हैं, लेकिन पानी के बिना मुरझा भी जाते हैं। झुंझुनूं में खेल सुविधाओं की भारी कमी थी, परिवार की आर्थिक स्थिति कोई बड़ी नहीं थी, लेकिन एक पिता था दलीप कुमार चौधरी, जिसने अपने बेटे के जन्म से पहले ही तय कर लिया था कि यह लड़का क्रिकेट खेलेगा। यह सिर्फ एक पिता की इच्छा नहीं थी, यह एक जिद थी, उस जिद की, जो गरीबी की दीवार के सामने भी नहीं झुकती।

दलीप कुमार पहले एक शिक्षक थे, फिर उन्होंने रियल एस्टेट और होटल व्यवसाय में कदम रखा, सिर्फ इसलिए कि बेटे की क्रिकेट ट्रेनिंग का खर्च उठाया जा सके। सोचिए उस पिता को, जो हर रोज़ इस हिसाब से काम करता था कि आज जो कमाया, वो मुकुल की प्रेक्टिस में लगेगा। यह बलिदान किसी के पास कैमरा नहीं था रिकॉर्ड करने को, कोई अवॉर्ड नहीं था देने को, लेकिन इसी बलिदान ने एक दिन ईडन गार्डन को हिला देने वाला बल्लेबाज़ तैयार किया।

मुकुल को शुरुआती कोचिंग के लिए सीकर के SBS क्रिकेट अकादमी भेजा गया। झुंझुनूं से सीकर यह सफर सिर्फ किलोमीटरों में नहीं, एक बच्चे के आत्मविश्वास में भी था। घर से दूर, अनजान जगह, नई चुनौतियां हर दिन एग्जाम ले रही थी। मुकुल ने खुद Man of the Match मिलने के बाद कहा, “12-13 साल की उम्र में क्रिकेट शुरू किया। झुंझुनूं में ज़्यादा academy नहीं थी, तो जयपुर आ गया। फिर देखा कि T20 क्रिकेट कितना बड़ा हो रहा है, तो गुड़गांव भी गया और वहां 3-4 महीने रहा।” यह वाक्य सुनने में आसान लगता है, लेकिन इसमें छुपा है एक बच्चे का वह दर्द जो हर नई जगह जाकर खुद को फिर से साबित करता है।

जयपुर की उस अरावली academy ने मुकुल दिया, और मुकुल जैसे ही कार्तिक शर्मा और अशोक शर्मा जैसे आईपीएएल सितारे दिए। एक दिलचस्प बात यह है कि मुकुल ने wicketkeeping तब शुरू की, जब academy के खेलों में कोई और keeper उपलब्ध नहीं था। आवश्यकता ने उसे वह रोल दिया जो आज उसकी पहचान बन चुका है। जीवन कभी-कभी ऐसे ही काम करता है, जो परिस्थिति मजबूरी लगती है, वही एक दिन वरदान बन जाती है।

मुकुल चौधरी ने press conference में बताया कि वे रोज़ प्रेक्टिस में 100 से 150 छक्के मारते हैं। सोचिए, 100 से 150 छक्के हर दिन। कोई IPL contract नहीं, कोई गारंटी नहीं, कोई यह नहीं कह रहा था कि तुम्हें कभी team में जगह मिलेगी, फिर भी वो अँधेरे में खड़े होकर, थकान में डूबे हुए, रोज़ बेटिंग नेट में घुसते थे और गेंद को उठाकर आसमान की तरफ भेजते थे। यही वो काम है जो चैंपियन और बाकी सबके बीच फर्क करता है, वो दिन जब कोई नहीं देख रहा होता।

उनकी इंस्प्रेशन हैं एमएस धोनी। और इसके सबूत हैं वो helicopter shot, जो उन्होंने ईडन गार्डन में Vaibhav Arora को मारे। मुकुल ने कहा कि “मैंने यह shot बचपन से practice किया है। धोनी जिस तरह innings finish करते थे, यहाँ तक कि यॉर्कर पर भी छक्का मारते थे, अगर आप ऐसी गेंद पर छक्का मार सकते हैं, तो bowler सोचने पर मजबूर हो जाता है।” यह सिर्फ एक shot की बात नहीं है, यह उस मानसिकता की बात है जो प्रेशर में नहीं टूटती, बल्कि और धारदार हो जाती है।

फिर आई वो रात, 9 अप्रैल 2026, स्थान था Eden Gardens, यानी पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता। LSG को 182 का target था। 16 ओवर बाद स्कोर था 128/7, मिशल मार्श, एडन मारकर, ऋषभ पंत, निकोलस पूरन, आयुष बडोनी, सब के सब पवेलियन लौट चुके थे। इसके बाद लखनउ की टीम में बचे थे सिर्फ tail-enders, और एक 21 साल का लड़का जो अभी IPL में खुद को साबित करने की कोशिश में था। पूरा Eden Gardens खचाखच, 70,000 दर्शक और सभी के सभी KKR के साथ थे। हर तरफ शोर था, हर तरफ KKR की जीत का जश्न लगभग शुरू हो चुका था।

54 रन बाकी थे, 24 गेंदें थीं, और मुकुल के पास सिर्फ पुच्छल्लों का साथ था। यह वो क्षण होता है जब ज़्यादातर लोग हार मान लेते हैं, लेकिन मुकुल ने यहाँ एक ऐसी पारी खेली जो cricket की किताबों में दर्ज हो गई। कैमरून ग्रीन के 19वें ओवर में उन्होंने दो छक्के और एक चौके से 16 रन ठोके। आखिरी ओवर में लखनउ को जीत के लिए 13 रन चाहिए थे, सामने कोलकाता के Vaibhav Arora गेंदबाज़ थे। मुकुल ने इस ओवर में दो छक्के मारे और फिर एक dramatic bye रन के साथ LSG जीत की लकीर पार कर गई। 

वो defining moment था जब आखिरी ओवर की penultimate गेंद पर Vaibhav Arora की wide delivery पर मुकुल घुटनों पर आए और powerful wrist-snap से गेंद को extra cover के ऊपर आसमान में उड़ा दिया, helicopter shot जो उन्होंने MS Dhoni को देखकर बचपन से practice की थी। उस एक shot में झुंझुनू की गर्म रेत थी, सीकर की academy थी, जयपुर की रातें थीं, गुड़गांव के वो 3-4 महीने थे, पिता दलीप चौधरी की तमाम मेहनत थी, सब कुछ उस गेंद के साथ Eden Gardens के उस stand में जा गिरा।

LSG head coach Justin Langer ने कहा था कि वो मुकुल को “India का सबसे खतरनाक No. 6 या No. 7 बल्लेबाज़” बनाएँगे। मुकुल ने press conference में यह सुनकर कहा, “जब इतना बड़ा coach आपके बारे में ऐसा कहे, तो ज़ाहिर है उसने कुछ देखा है आप में। उसने मुझ पर भरोसा किया, तो यह मेरा वक्त था उसे वापस चुकाने का।” यह जवाब एक mature cricketer का है, वो जो praise में नहीं बहता, बल्कि उसे fuel की तरह use करता है।

IPL 2026 auction में 30 लाख की base price वाले मुकुल चौधरी को लेकर LSG, Mumbai Indians और Rajasthan Royals के बीच जमकर बोली लगी और आखिर में LSG ने 2.60 करोड़ में उन्हें अपना बनाया। एक नंबर जो उस रात Eden Gardens में हुई तबाही के सामने बहुत छोटा लगता है।

मुकुल चौधरी की यह कहानी सिर्फ एक cricketer की कहानी नहीं है। यह उस हर इंसान की कहानी है जो किसी छोटे शहर में बड़ा सपना लेकर पैदा हुआ, जिसके पास resources नहीं थे लेकिन जिद थी, जिसका बाप पैसे नहीं दे सकता था लेकिन भरोसा दे सकता था, जो हर academy में नया था लेकिन हार नहीं था। यह कहानी बताती है कि रोज़ 100-150 छक्के मारने वाला इंसान एक दिन वो छक्का ज़रूर मारता है, जिसे पूरी दुनिया याद रखती है। झुंझुनूं की उस रेत ने एक सपना नहीं मुरझाने दिया और Eden Gardens की उस रात, वो सपना पूरे देश ने जीते-जागते देखा।​​​​​​​​​​​​​​​​

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