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IPL का ताला, खिलाड़ियों का हाला: राजस्थान का खेल मंत्री किसके लिए काम करता है?


सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर का सबसे बड़ा खेल परिसर। आज वहां सुबह पांच बजे जो लड़का एथलेटिक्स की प्रैक्टिस के लिए गेट पर पहुंचा, उसे वापस लौटा दिया गया। जो कुश्ती का पहलवान हर रोज़ अखाड़े में पसीना बहाता था, वो बाहर खड़ा रहा। आर्चर अपना किट लेकर गेट पर खड़े रहे, कबड्डी वाले मानसिक कुश्ती करनी पड़ रही है और तैराक अपना शूट लेकर निराशा के साथ वापस लौट रहे हैं, वजह हैं बीसीसीआई के गार्ड, जिन्होंने साफ कहा कि ये खिलाड़ी अंदर नहीं जा सकते। यह सबकुछ राजधानी जयपुर में हो रहा है और इसके लिए ज़िम्मेदार है एक ऐसा खेल मंत्री, जो खुद ओलंपिक मैडलिस्ट है। 

आज का सवाल सीधा खेल मंत्री से, आखिर राजस्थान के खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ किसके लिए काम करते हैं? 8 करोड़ राजस्थानियों के लिए या बीसीसीआई और आईपीएल फ्रेंचाइज़ी के लिए? इन दिनों IPL 2026 का सीज़न चल रहा है। राजस्थान रॉयल्स की किक्रेट टीम गुवाहाटी में लगातार तीन जीत के बाद अब जयपुर लौट रही है और SMS स्टेडियम एक बार फिर बीसीसीआई की झोली में डाल दिया गया है। 

दीवारें, कुर्सियां, मैदान, गेट, सब कुछ BCCI के बाउंसरों के हवाले है। राज्य सरकार के कर्मचारी, क्रीड़ा परिषद के अधिकारी, यहां तक कि खेल सचिव तक को बिना बीसीसीआई की अनुमति के स्टेडियम में घुसने का हक नहीं, लेकिन असली सवाल यह है कि एसएमएस स्टेडियम सिर्फ क्रिकेट का मैदान नहीं है। यह एक विशाल खेल परिसर है, जिसमें एथलेटिक्स ट्रैक, कुश्ती हॉल, बॉक्सिंग रिंग, तैराकी परिसर, तीरंदाजी रेंज, और फुटबॉल-हॉकी के मैदान समाहित हैं। यहां हर सुबह-शाम सैकड़ों नहीं, हज़ारों खिलाड़ी.... राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय स्तर की तैयारी करने वाले युवा, प्रैक्टिस करते हैं और जब आईपीएल आता है, तो इन सबकी प्रैक्टिस ठप हो जाती है। 

उनका रुटीन टूट जाता है। उनका भविष्य पार्किंग में खड़ा होकर इंतज़ार करता रहता है। अब जरा हिसाब लगाइए, आईपीएल 2026 का सीज़न 28 मार्च से शुरू होकर जून तक चलता है, यानी करीब ढाई महीने तक इसकी धूमधाम होती है। उससे पहले स्टेडियम की तैयारी के लिए कम से कम एक महीना चाहिए। आयोजन के बाद साज़-सज्जा समेटने में एक महीना और लगता है। आरसीए के विवादों, बीसीसीआई से रिक्वेस्ट-मिन्नत, और मंत्री जी की रील्स की वाहवाही में एक और महीना चाहिए। कुल जोड़ लीजिए, साल के कम से कम 5 से 6 महीने केवल क्रिकेट के नाम स्वाहा। और यह सिलसिला नया नहीं है। 

टाटा कंसल्टेंसी की एक रिपोर्ट में एसएमएस स्टेडियम को क्रिकेट मैच की मेजबानी के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया था। राज्य सरकार की नींद तब उड़ी, जब राजस्थान रॉयल्स ने राज्य सरकार से इंडेम्निटी वॉइवर मांगा और बीसीसीआई ने जयपुर में मैच देने पर संशय जताया। यानी खेल मंत्री जी हरकत में तब आए, जब आईपीएल का मैच छिनने की नौबत आई, लेकिन तब नहीं जब कोई एथलेटिक्स का खिलाड़ी अपने ट्रैक से बेदखल हुआ। मुख्य सचिव ने खुद कमान संभाली, खेल परिषद और आरसीए को साइडलाइन करके PWD से स्टेडियम का काम कराया। करोड़ों रुपए खर्च हुए, लेकिन किस मकसद से? ताकि बीसीसीआई खुश हो और जयपुर को आईपीएल का मैच मिले। राज्य के खिलाड़ियों की सुविधा के लिए नहीं, बीसीसीआई को खुश करने के लिए। 

अब सबसे बड़ा सवाल, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ साहब से, आप 2004 के एथेंस ओलंपिक में डबल ट्रैप शूटिंग में सिल्वर मैडल जीते। स्वतंत्रता के बाद व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। आप जानते हैं कि ओलंपिक तक का सफर क्या होता है। रोज़ की प्रैक्टिस, एकाग्रता, मैदान का अनुशासन, और घंटों, नहीं दिनों नहीं, बल्कि बरसों की निरंतरता। तो आप से पूछना है, जब जयपुर के एक शूटर, एक पहलवान, एक धावक, एक आर्चर, एक तैराक का मैदान बंद हो जाता है आईपीएल के नाम पर, तो क्या आपको अपनी युवावस्था याद नहीं आती? क्या तब आप भी यही सहन करते, जब आपका रेंज बंद कर दिया जाता? 

आप दिसंबर 2023 से राजस्थान सरकार में उद्योग, युवा मामले और खेल विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। यानी खेल आपकी ज़िम्मेदारी है। सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि राज्य में खेला जाने वाला हर खेल। कुश्ती, तीरंदाजी, एथलेटिक्स, हॉकी, बॉक्सिंग, ये सब भी आपके ही खाते में आते हैं मंत्री जी। तो बताइए, आप खुद कहते हैं कि “मैं खुद खिलाड़ी रहा हूं, मुझे इनकी समस्याएं पता हैं” तो फिर इन खिलाड़ियों की समस्या का समाधान क्यों नहीं होता? बयान देने और ज़मीन पर काम करने में यह फासला क्यों है? राजस्थान के खिलाड़ियों को ओलंपिक में जाना है। उसके लिए रोज़ अभ्यास चाहिए, मैदान चाहिए, सुविधाएं चाहिए, लेकिन जब राज्य का सबसे बड़ा खेल परिसर साल के आधे महीने एक व्यावसायिक क्रिकेट लीग की जागीर बन जाता है, तो ओलंपिक का सपना कैसे पूरा होगा? 

आईपीएल में विराट और रोहित खेलते हैं, लेकिन वो मेडल नहीं दिलाते। वो बीसीसीआई के लिए खेलते हैं, खुद के लिए खेलते हैं। जबकि देश को मेडल दिलाता है वो खिलाड़ी, जो सुबह चार बजे उठकर ट्रेनिंग करता है, और जिसका मैदान आपकी प्राथमिकता नहीं। राठौड़ साहब, आपसे एक ही सवाल है, क्या राजस्थान सरकार की खेल नीति बीसीसीआई के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी, या कभी उस पहलवान, उस तीरंदाज़, उस धावक, उस तैराक के लिए भी कुछ होगा जो एसएमएस स्टेडियम के गेट के बाहर खड़ा है और जिसे स्टेडियम के अंदर जाने की इजाज़त नहीं? राजस्थान की 8 करोड़ जनता आपसे इसका जवाब मांग रही है।​​​​​​​​​​​​​​​​

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