Popular

India छोड़कर लोग बाहर क्यों जा रहे हैं? वो सच जो आपको कोई नहीं बताएगा


हर साल लाखों लोग भारत छोड़ रहे हैं। 2024 में 4300 करोड़पति विदेश चले गए, 2023 में 5100 करोड़पतियों ने भारत छोड़ दिया। यह उस देश का सबसे बड़ा संकेत है जो 2047 में "विकसित भारत" का सपना देख रहा है?

आपने भी देखा होगा, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों में हर दूसरे घर से कोई न कोई Canada, Australia, UK या UAE जा रहा है। कोई पढ़ने जा रहा है, कोई नौकरी के लिए, कोई settle होने के लिए, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है, और इसकी असली कीमत क्या है? आज हम इस सवाल का जवाब आंकड़ों से, तथ्यों से और ज़मीनी हकीकत से ढूंढेंगे।

पहले भारत छोड़कर जाने वालों के आँकड़े देखिए। 2024 में 6 लाख से ज़्यादा भारतीयों ने UK, UAE, Canada, Australia और अमेरिका जाने के लिए देश छोड़ा। यह सिर्फ आम लोग नहीं हैं। हैनली एण्ड पार्टनर्स की रिपोर्ट के अनुसार 2023 में 5100 करोड़पति भारत छोड़ गए और 2024 में 4300 करोड़पतियों ने भारत की नागरिकता छोड़ी। 

यानी कमाने—खाने वाले गरीब ही नहीं, अमीर भी विदेश भाग रहे हैं। China के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जहां से करोड़पति बाहर जा रहे हैं। नीति आयोग ने खुद माना है कि 1 विदेशी student भारत आता है, उसके बदले 25 भारतीय students पढ़ने के लिए विदेश जाते हैं। यह brain drain नहीं, यह brain flood है।

अब सवाल यह है कि भारत के लोग विदेश क्यों जा रहे हैं? पहला कारण है Education का संकट। भारत में IIT, IIM, AIIMS जैसे world-class institutes हैं। 

लेकिन ये सब कितने लोगों के लिए है? IIT में हर साल 16,000 सीटें हैं, लेकिन JEE Advanced देने वाले 2 लाख से ज़्यादा students हैं, तो फिर बाकी कहाँ जाएं? बाकी उन colleges में जाते हैं, जहाँ न अच्छे teachers हैं, न industry कनेक्शन है, न research facility है। और जो genuinely talented हैं, वो विदेश का रुख करते हैं, जहाँ scholarship मिलती है, practical लर्निंग है और degree की global value है।

दूसरा कारण है Salary का गणित। भारत में एक software engineer की average starting salary 4 से 6 लाख रुपये सालाना है। वही engineer America में $80,000 से $1,20,000 यानी 70 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये से ज़्यादा कमाता है। Canada में $60,000 से $90,000 डॉलर है। Australia में $70,000 से $1,00,000 डॉलर। 

एक dollar की कीमत आज 93 रुपये के करीब है, तो विदेश जाने वाले की choice आसान हो जाती है। भारत में 40 घंटे काम करो, 50,000 रुपये मिलेंगे। वही काम विदेश में करो, 5 से 8 लाख रुपये महीना मिलता है। तो कोई भी निष्पक्ष इंसान यही फैसला करेगा।

तीसरा कारण है System और प्रशासनिक व्यवस्था। भारत में merit से ज़्यादा जुगाड़ चलता है। नौकरी के लिए connection चाहिए, टेंडर के लिए रिश्वत चाहिए, justice के लिए सालों इंतज़ार करना पड़ता है। नियुक्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप से परेशान युवा विदेश का रुख कर रहे हैं। 

विदेश में rule of law है। Time पर justice मिलता है। रिजर्वेशन नहीं है तो प्रतिभा की वरियता काम करती है। भ्रष्टाचार कम है, और यह सब मिलकर एक ऐसा environment बनाते हैं, जहाँ काबिल इंसान बिना किसी सिफारिश के आगे बढ़ता है।

चौथा कारण है करोड़पतियों का पलायन। भारत के अमीर UAE, USA, Singapore और Australia जाते हैं, क्योंकि वहाँ tax policies बेहतर हैं, business environment साफ है और wealth preservation आसान है। 

Congress नेता जयराम रमेश ने कहा कि ओपेक tax policies और आर्बेटरी tax प्रशासन के कारण business करने वाले Singapore, UAE और UK में रहना पसंद कर रहे हैं, और यह Union Government के tax base को कमज़ोर करता है। यानी जो लोग सबसे ज़्यादा tax देते थे, वही लोग देश छोड़ रहे हैं।

अब इसका दूसरा पक्ष भी सुनिए, क्या विदेश जाना सच में perfect solution है?  Canada में इन दिनों Indian students के साथ जो हो रहा है, वो किसी को नहीं पता था। Visa rules बदल गए, PR मिलना मुश्किल हो गया, housing crisis है, part-time jobs कम हैं। 

Australia में cost of living इतनी बढ़ गई है कि काम करके भी बचत नहीं होती। यानी भले ही एक लाख डॉलर महीने के कमा रहे हों, लेकिन खर्चा इतना अधिक होता है कि बचत होनी बंद हो चुकी है। UK में post-Brexit के बाद immigration policies कड़ी हो गई हैं, और America में H1B visa की uncertainty है। 

वहां भेदभाव आज भी होता है, बड़ा अकेलापन है, परिवार से दूरी है, और सबसे बड़ी बात, वहां भी struggle है, बस इसको बोलने की language अलग है। इतना विदेश जाने की प्रवृत्ति बढ रही है तो क्या भारत सरकार कुछ कर रही है? सरकार ने PIO और OCI cards का विलय किया है, ताकि प्रवासी भारतीयों की आवाजाही आसान हो।

 Startup India, Skill India जैसी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन यह काफी नहीं है। जब तक भारत में research funding नहीं बढ़ेगी, जब तक universities में industry-academia partnership नहीं होगी, जब तक governance transparent नहीं होगी और जब तक प्रतिभा को सच में तरजीह नहीं मिलेगी, तब तक brain drain रुकेगा नहीं।

अब एक नया trend भी उभर रही है, Reverse Brain Drain। यानी वो भारतीय जो विदेश गए, experience लेकर, पैसे कमाकर वापस आ रहे हैं, वो startup चला रहे हैं, नई companies खड़ी कर रहे हैं। यह एक positive sign है, लेकिन यह तभी और तेज़ होगा जब भारत अपना घर ठीक करे। 

फैसला simple है, देश छोड़ना solution नहीं है, लेकिन जो conditions लोगों को देश छोड़ने पर मजबूर कर रही हैं, उन्हें ठीक करना सरकार की ज़िम्मेदारी है, और जब तक वो नहीं होता, यह पलायन जारी रहेगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post