एक तस्वीर हज़ार शब्दों के बराबर होती है, लेकिन कभी-कभी वो तस्वीर जो होती है उससे ज़्यादा वो बताती है जो नहीं होती है। बुधवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी भवन के बाहर राजस्थान के नेता अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने हाथ मिलाया। दोनों बिना झिझक मीडिया के सामने। कैमरों के सामने मुस्कुराए और गहलोत ने पत्रकारों को यहाँ तक कह दिया, "देख लो, फिर मत कहना कि दोनों में मतभेद है।" इसके बाद दोनों हँसे और अंदर चले गए। बाहर खड़े पत्रकार सोचते रहे, क्या सच में सब ठीक हो गया? लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद दोनों नेताओं के X पोस्ट ने पूरी हकीकत उजागर कर दी और वो हकीकत यह थी कि हाथ भले ही मिल जाएं, दिल मिलना संभव नहीं।
तो आगे बढ़ने से पहले समझते हैं उस दिन क्या हुआ? दिल्ली में कांग्रेस की OBC मीटिंग थी, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता मौजूद थे। मीटिंग का एजेंडा था, 2029 के लोकसभा चुनाव में OBC वोटों को कांग्रेस के साथ कैसे जोड़ा जाए। गहलोत और पायलट दोनों अपनी-अपनी गाड़ियों से उतरे, हाथ मिलाया और मीडिया के लिए एकता का नाटक परोसा और मीटिंग में अंदर चले गए। यह सब ठीक था, क्योंकि आलाकमान के सामने फूट नहीं दिखाई देनी चाहिए। यह राजनीतिक शिष्टाचार है, लेकिन जो इसके बाद हुआ, वो शिष्टाचार नहीं था, वो सियासी छोटापन था।
अशोक गहलोत नेX पर चार फोटो पोस्ट करी, चार फोटो और उन चारों में से एक में भी सचिन पायलट स्पष्ट नहीं दिखते। एक फोटो में धुंधला सा चेहरा है, बाकी में गायब और text में सचिन पायलट का नाम, एक बार भी नहीं। करीब एक घंटे बाद सचिन पायलट का जवाब आया। उन्होंने भी X पोस्ट की। उनकी पोस्ट में भी अशोक गहलोत का नाम नहीं था और जिस फोटो में दोनों साथ थे, उसमें गहलोत साफ नहीं दिखते। यह महज़ सोशल मीडिया पोस्ट नहीं थी। यह दो नेताओं के बीच की वो खाई थी जो शब्दों से नहीं, बल्कि कैंची से मापी जा रही थी, फोटो काटने की कैंची से। अब एक सवाल और सामने आया। जब दोनों नेताओं के यहां पूछा गया तो जवाब मिला कि ये फोटो AICC द्वारा जारी की जाती हैं, हम खुद नहीं चुनते। अगर यह सच है तो AICC में वो कौन शख्स है जो इस तरह से एक-दूसरे नेताओं की फोटो काटकर अलग-अलग देता है? और क्यों देता है? क्योंकि राहुल गांधी की पोस्ट देखिए, उसमें सभी नेता साफ दिखाई देते हैं। एक भी फोटो में कोई काट-छाँट नहीं तो फिर गहलोत और पायलट की पोस्ट में यह सर्जरी किसने और क्यों की?
यह सवाल जितना छोटा लगता है, उतना छोटा नहीं है। क्योंकि इस एक detail में राजस्थान कांग्रेस का पूरा संकट छिपा है। गहलोत और पायलट के बीच की खटास कोई नई बात नहीं है। 2020 में जब पायलट ने बगावत की, मानेसर में डेरा डाला और गहलोत सरकार गिराने की कोशिश की, तब से दोनों के बीच जो दूरी बनी, वो आज तक नहीं मिटी। गहलोत ने तब कहा था, नाकारा, निकम्मा और "गद्दार।" पायलट ने तब कहा था, "अहंकारी।" शब्द वापस लिए जा सकते हैं, लेकिन ज़ख्म नहीं भरते। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी यही हुआ। गहलोत CM फेस बनना चाहते थे। पायलट भी CM फेस बनना चाहते थे। गांधी परिवार ने किसी को CM फेस नहीं बनाया। नतीजा, कांग्रेस हार गई। अब दोनों नेता विपक्ष में हैं। और दोनों की नज़र 2028 पर है।
गहलोत की रणनीति क्या है? हर रोज़ मीडिया में रहो। PR कंपनी से रील्स बनवाओ। जयपुर में बैठकर बयान दो। ज़मीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखो। यह संदेश दो कि मैं अभी भी प्रासंगिक हूँ, मैं अभी भी ज़रूरी हूँ। गहलोत का तर्क है, मैं तीन बार CM रहा, मेरा अनुभव है, मेरा जनाधार है। पायलट की रणनीति क्या है? राजस्थान से दूरी। दिल्ली में गांधी परिवार के करीब रहो। team player बनो। यह दिखाओ कि 2020 वाला विद्रोही पायलट अब mature हो गया है। पायलट का तर्क है, जब गांधी परिवार मुझे राजस्थान भेजेगा तो मेरी ताक़त देखना। दोनों की रणनीतियाँ अलग हैं, दोनों की दिशाएँ अलग हैं और दोनों एक-दूसरे को कमज़ोर करने में लगे हैं, खुलकर नहीं, बल्कि चुपचाप। जैसे बुधवार की फोटो में हुआ, लेकिन दोनों जो भूल रहे हैं वो यह है, कि 2023 में राजस्थान की जनता ने कांग्रेस को क्यों हराया? इसलिए नहीं कि BJP बेहतर थी। बल्कि इसलिए कि कांग्रेस के दोनों बड़े नेता पाँच साल तक एक-दूसरे की टाँग खींचते रहे। विधायक दो खेमों में बँटे रहे। नीतियाँ बनीं लेकिन नीयत नहीं बनी। जनता ने पांच साल देखा और एक दिन में फैसला कर दिया।
अगर 2028 में भी यही खेल चला, गहलोत अपनी PR करते रहे, पायलट दिल्ली में बैठे रहे, और दोनों मीडिया के सामने हाथ मिलाकर X पर एक-दूसरे की फोटो काटते रहे, तो कांग्रेस 2028 में भी हारेगी और तब न गहलोत चौथी बार CM बनेंगे, न पायलट पहली बार। राजनीति में दुश्मन बाहर होता है तो लड़ाई आसान होती है। लेकिन जब दुश्मन घर के अंदर हो तो जीत नामुमकिन हो जाती है। राजस्थान कांग्रेस का सबसे बड़ा दुश्मन BJP नहीं है, वो तो विपक्ष है। राजस्थान कांग्रेस का सबसे बड़ा दुश्मन वो X पोस्ट है, जिसमें एक नेता दूसरे की फोटो काटकर पोस्ट करता है। वो हाथ मिलाना है जो दिल मिलाए बिना होता है और वो मुस्कान है जो कैमरा बंद होते ही गायब हो जाती है।

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