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सचिन पायलट के अलावा कितने "बहरुपिये" हैं?


BJP के राजस्थान प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल ने सचिन पायलट को "बहरुपिया" कहा। कहा कि उत्तर प्रदेश का आदमी राजस्थान आकर चुनाव लड़ता है और CM बनने की सोचता है। यह सुनकर बड़ा अच्छा लगा, लेकिन अगर सचिन पायलट बहरुपिया हैं, तो फिर नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, स्मृति इरानी, हेमा मालिनी जैसे दर्जनों नेता जो दूसरे राज्यों से चुनाव लड़ रहे हैं, वो क्या हैं? राधामोहन जी, एक काम कीजिए, अपनी ही पार्टी के नेताओं की list निकालिए और फिर देखिए कि "बहरुपिये" कितने हैं।

आज एक-एक करके उन नेताओं का ज़िक्र करते हैं जो दूसरे राज्यों से जाकर दूसरे राज्यों में चुनाव लड़े और जीते भी। नरेंद्र मोदी गुजरात के वडनगर में पैदा हुए। गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2014 में लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से लड़ा। गुजराती व्यक्ति, उत्तर प्रदेश से सांसद, देश के प्रधानमंत्री। राधामोहन जी, क्या मोदी जी भी "बहरुपिये" हैं? या यह नियम सिर्फ विपक्षियों के लिए है? आडवाणी जी कराची में पैदा हुए, जो अब पाकिस्तान में है। राजस्थान के गांधीनगर से नहीं, गुजरात के गांधीनगर से लंबे समय तक सांसद रहे, लेकिन इससे पहले मध्यप्रदेश की विदिशा सीट से भी चुनाव लड़े। BJP के सबसे बड़े नेताओं में से एक, और वो भी "बाहरी।" तो राधामोहन जी, इस तर्क से आडवाणी जी भी बहरुपिये थे? स्मृति ईरानी दिल्ली की, मुंबई उनकी कर्मभूमि है, लेकिन उन्होंने उत्तर प्रदेश के अमेठी से चुनाव लड़ा राहुल गांधी के खिलाफ। 2014 में हारीं, 2019 में जीतीं। मुंबई की महिला, अमेठी की सांसद, केंद्रीय मंत्री। क्या वो भी "बहरुपिया" थीं? या BJP में बाहर से आकर चुनाव लड़ना देशभक्ति है?

अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से हैं। ठीक है, यह उनका गृह राज्य है। लेकिन BJP में ऐसे दर्जनों नेता हैं जो RSS के निर्देश पर किसी भी राज्य में जाकर काम करते हैं, चुनाव लड़ते हैं, संगठन चलाते हैं। यह BJP की संस्कृति है। तो फिर यह नियम सिर्फ पायलट पर क्यों? राधामोहन जी, ज़रा यह भी बताइए, वसुंधरा राजे का जन्म कहाँ हुआ? मध्यप्रदेश के ग्वालियर में, सिंधिया परिवार से हैं, राजस्थान से कोई सीधा पारिवारिक नाता नहीं था। फिर भी झालावाड़ से चुनाव लड़ीं, दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री बनीं। क्या वो "बहरुपिया" थीं? अगर नहीं, तो पायलट पर यह नियम क्यों? भाजपा के नेता धमेंद्र पंजाब से थे, लेकिन बीकानेर से चुनाव जीते, हेमा मालिनी कहां की हैं? चुनाव मथुरा से लड़ती हैं, क्यों राधामोहन दासजी? टोंक से पूर्व में दो बार सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया हरियाणा से हैं, लेकिन सांसद टोंक से, फिर वो बहरुपिया नहीं है क्या राधामोहन दास जी?

राधामोहन जी, आप गोरखपुर, उत्तर प्रदेश से हैं। आप राजस्थान के प्रभारी हैं। आप राजस्थान की राजनीति में दखल दे रहे हैं, राजस्थान के नेताओं को "बहरुपिया" कह रहे हैं, तो जनाब, यह काम आप किस हैसियत से कर रहे हैं? क्या यह भी "बहरुपियापन" नहीं है? अब कांग्रेस की बात करें। सोनिया गांधी इटली की हैं, उत्तर प्रदेश के रायबरेली से सांसद रहीं। राहुल गांधी दिल्ली में पले-बढ़े, अमेठी और वायनाड से चुनाव लड़े। सचिन पायलट उत्तर प्रदेश से हैं, राजस्थान से MLA और Minister रहे। यह सिर्फ कांग्रेस की नहीं, पूरे भारतीय लोकतंत्र की परंपरा है।

भारत का संविधान कहता है कि कोई भी नागरिक देश के किसी भी हिस्से से चुनाव लड़ सकता है। यह अधिकार संविधान ने दिया है। इसे "बहरुपियापन" कहना संविधान का अपमान है। राधामोहन दास जी से एक सवाल, अगर दूसरे राज्य से आकर चुनाव लड़ना गलत है, तो क्या आप मोदी जी से कहेंगे कि वो वाराणसी छोड़कर गुजरात से लड़ें? क्या वसुंधरा राजे को ग्वालियर जाने की सलाह देंगे? नहीं। क्योंकि यह नियम सिर्फ विपक्ष के लिए है। राजनीति में आरोप लगाने से पहले अपनी पार्टी का घर देखना ज़रूरी है। शीशे में देखिए राधामोहन जी, जैसे आपने बताए, वो "बहरुपिये" आपकी पार्टी में भी भरे पड़े हैं। राधामोहन दास अग्रवाल के इस बयान पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, कमेंट करके जरूर बताएं।


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