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भारत के कृषि एवं पशुपालन को बचाने में जुटे हैं मोदी?

जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर ऑलगेमाइन ने एक बड़ा दावा किया है। अखबार का कहना है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चार से पाँच बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने की कोशिश की, लेकिन मोदी ने कॉल रिसीव नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप भारत पर लगातार दबाव बना रहे थे कि वह अपना कृषि और डेयरी बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोले, लेकिन मोदी ने साफ शब्दों में इनकार कर दिया। मोदी का कहना था कि भारत का कृषि और डेयरी सेक्टर करोड़ों किसानों और पशुपालकों की जीविका से जुड़ा है, इसे किसी भी हालत में विदेशियों के लिए नहीं खोला जा सकता।

अखबार ने लिखा है कि यह मोदी सरकार की रणनीति का हिस्सा है, जिससे भारत अपने घरेलू कृषि ढांचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा करना चाहता है। मोदी जानते हैं कि अगर अमेरिकी दूध और कृषि उत्पाद भारत में बड़े पैमाने पर आने लगे तो देशी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यही वजह है कि मोदी ने ट्रंप की कॉल को नजरअंदाज किया।

लेकिन इस बीच आज से अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लागू कर दिया है। इसका असर भारत के कई उत्पादों के निर्यात पर पड़ने वाला है। खासतौर पर स्टील, एल्युमिनियम, टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग सामान पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ेगा। आंकड़ों के मुताबिक भारत हर साल अमेरिका को करीब 80 अरब डॉलर का निर्यात करता है। इसमें से स्टील और एल्युमिनियम का हिस्सा करीब 10 फीसदी है, जबकि फार्मा और टेक्सटाइल का हिस्सा 15 फीसदी तक है। विशेषज्ञों का कहना है कि 50 फीसदी टैरिफ लगने से भारत के इन सेक्टरों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा घटेगी और निर्यातकों को बड़ा झटका लग सकता है।

हालांकि रणनीतिक रूप से देखा जाए तो मोदी सरकार का कदम साफ संकेत देता है कि भारत अमेरिकी दबाव के आगे झुकेगा नहीं। चाहे वह ट्रंप हों या कोई और राष्ट्रपति, भारत अपने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार है। यही वजह है कि मोदी सरकार अमेरिकी टैरिफ झेलने के बावजूद कृषि बाजार नहीं खोल रही।

इससे साफ है कि आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में तनातनी बढ़ सकती है। लेकिन मोदी का दांव यह है कि भारत का 140 करोड़ का घरेलू बाजार इतना बड़ा है कि विदेशी कंपनियाँ आखिरकार भारत की शर्तों पर ही यहाँ व्यापार करने को मजबूर होंगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को चार-पाँच बार फोन किया, लेकिन मोदी ने बात नहीं की। अखबार का कहना है कि ट्रंप भारत से कह रहे थे कि वह अपना कृषि और डेयरी बाजार अमेरिका के लिए खोले, लेकिन मोदी ने साफ कहा कि ये बाजार केवल भारतीय किसानों और पशुपालकों के लिए है और इसे कभी विदेशियों के लिए नहीं खोला जाएगा।

अब आते हैं असली खबर पर। अब से, यानी 27 अगस्त 2025 से, अमेरिका ने भारत पर लागू अमेरिकी आयात शुल्क—टैरिफ—को बढ़ाकर 50% कर दिया है। इससे प्रभावित क्षेत्र, खासकर कृषि और डेयरी के साथ-साथ कई अन्य श्रम-गहन और मूल्य-आधारित उत्पादों में भारी संभावित नुकसान मुमकिन है।

प्रभावित क्षेत्र और अनुमानित नुकसान

1. कृषि एवं डेयरी

—वित्तीय वर्ष 2024–25 में भारत के कृषि और पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात लगभग 5.1 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें डेयरी का हिस्सा 180 मिलियन डॉलर था।

—अमेरिकी बाजार में लगे टैरिफ के बाद, डेयरी उत्पादों पर 30–40% शुल्क की मार मालूम होती है।

—कृषि क्षेत्र का कुल अमेरिकी निर्यात लगभग 60.85 बिलियन डॉलर है—लगभग 70% निर्यात पर 50% टैरिफ लागू हो गया है।

2. कपड़ा, वस्त्र और तैयार-मेड वस्त्र

—CRISIL के अनुसार 45,000 करोड़ रुपये के राजस्व वाले इस क्षेत्र में वृद्धि की गति लगभग आधी रह सकती है—3–5% रहने की संभावना; जो पहले इस से दोगुनी थी।

—तैयार-मौसम वस्त्र क्षेत्र के 120 से अधिक निर्माताओं को शामिल कर यह अनुमान लगाया गया कि लगभग ₹45,000 करोड़ वार्षिक राजस्व प्रभावित हो सकता है।

3. रत्न, गहने और हीरे

—लगभग 10 बिलियन डॉलर के निर्यात वाले इस क्षेत्र पर भारी दबाव; अपेक्षित आदेश रद्दीकरण और प्रतिस्पर्धा से नुकसान की आशंका है।

4. मछली, समुद्री उत्पाद और अन्य कृषि आधारित सामान

—समुद्री खाद्य पदार्थों, क्रिप्स और फ़्रोजन खाद्य पर भी गहरी मार: अनुमानित प्रभावित निर्यात 40–50% तक।

5. रसायन, चमड़ा, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग वस्तुएँ

—सम्मानित क्षेत्रों जैसे रसायन, चमड़ा, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग वस्तुओं पर भी भारी टैरिफ—इससे इन क्षेत्रों का अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान।

6. हीरा-काटने वाला उद्योग (सूरत)

—वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, सूरत में हीरे की उद्योग लगभग ठहर गई है। 50,000 नौकरी समाप्त और 1 लाख और संभावित रूप से प्रभावित।

व्यापक आर्थिक प्रभाव

—नोमुरा ने अनुमान लगाया है कि 30–40% निर्यात-धामियों पर टैरिफ का प्रभाव पड़ेगा—विशेष रूप से MSMEs पर भारी असर; GDP ग्रोथ अनुमानित 6% तक घट सकती है।

—रुइटर्स के अनुसार, अमेरिका के टैरिफ के प्रभाव से वर्ष भर में $37 बिलियन से अधिक निर्यात सीमित हो सकते हैं—करीब 40% तक गिरावट।

—FT की रिपोर्ट के मुताबिक इससे GDP में अनुमानित 1 अंक तक गिरावट आ सकती है।

—Reuters के विश्लेषणानुसार GDP पर असर सिर्फ 0.2–0.5% तक सीमित हो सकता है लेकिन निर्यात में $25–55 बिलियन तक की गिरावट संभव है।

—जर्मन अखबार का दावा आधारित प्रतीत होता है, हालांकि ठोस FAZ स्रोत अभी सामने नहीं आया।

—मोदी सरकार स्पष्ट संदेश दे रही है— कृषि/डेयरी बाजार भारत के किसानों के लिए है, और उस पर कोई समझौता नहीं होगा।

—50% अमेरिकी टैरिफ ने कृषि, डेयरी, वस्त्र, रत्न, इंजीनियरिंग और समुद्री क्षेत्र जैसे मुख्य निर्यात क्षेत्रों में भारी दबाव उत्पन्न कर दिया है।

—अनुमानित आर्थिक प्रभाव: लगभग $37 बिलियन का निर्यात नुकसान, GDP वृद्धि दर में कमी, और विशेष उद्योगों—विशेषकर MSMEs और सूरत की हीरा कटिंग इकाइयों को गंभीर झटका।

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