परीक्षा और पेपर लीक की शुरुआत: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने सितंबर 2021 में पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) और प्लाटून कमांडर की 859 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की, जिसमें लगभग 7.97 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे, लेकिन फरवरी 2024 में पेपर लीक का बड़ा घोटाला सामने आया, जिसमें पेपर माफिया द्वारा प्रश्नपत्र लगभग 15–20 लाख रुपये में बांटे जाने के आरोप लगे।
जांच और गिरफ्तारियाँ: राज्य सरकार ने एसआईजी (SOG) से जांच कराई। इसके तहत 125 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया — जिसमें पेपर माफिया, उम्मीदवार, और RPSC के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। RPSC के पूर्व सदस्य रघु राम रैका, उनके बेटे और बेटी, साथ ही बाबुलाल कटारा भी गिरफ्तार किए गए। कई ट्रेनी SI भी बर्खास्त हुए।
सरकार का रुख: जून 2025 में SOG सहित चार जांच एजेंसियों ने भर्ती रद्द करने की सिफारिश की थी गुरुवार अदालत में । लेकिन सरकार ने जुलाई 2025 में बताया कि एक कैबिनेट उप-समिति ने रद्द न करने की सलाह दी और मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसका समर्थन किया।
अदालत का फैसला: लंबी सुनवाई के बाद, 28 अगस्त 2025 को राजस्थान उच्च न्यायालय (जिसके न्यायाधीश जस्टिस समीर जैन थे) ने भर्ती को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि व्यापक अनियमितताओं और RPSC के कई सदस्यों की संलिप्तता के चलते इसे जारी रखना न्यायसंगत नहीं है । कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही असंतुलित उम्मीदवार पुलिस में शामिल होने से कानून और व्यवस्था प्रभावित हो सकती है । रद्द की गई 859 पदों को 2025 की नई भर्ती में जोड़ा जाएगा और पूर्व परीक्षा में शामिल उम्मीदवार फिर से उपस्थित हो सकते हैं।
विवाद का मूल कारण:
पूरा घोटाला पेपर लीक और RPSC के वरिष्ठ सदस्य शामिल होने से प्रेरित था, जिसने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठा दिया। कोर्ट ने कहा कि जब “सही और गलत उम्मीदवारों को विभाजित करना कठिन हो” जाए, तो पूरे भर्ती को रद्द करना ही उचित है।
यानि भविष्य की कहानी: अदालत के फैसले के बाद सरकार ने फैसला किया कि:
- रद्द किए गए 859 पदों को नए SI भर्ती में शामिल किया जाए।
- सभी उम्मीदवार, चाहे पहले शामिल थे या नहीं, नए रूप से आवेदन कर सकेंगे।
कौन-किसने श्रेय लिया — हनुमान बेनीवाल बनाम किरोड़ी लाल मीणा:
- किरोड़ी लाल मीणा (कृषि मंत्री): उन्होंने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “सच की जीत हुई है”।
- हनुमान बेनीवाल (RLP सांसद): उन्होंने इसे “युवाओं के प्रति न्याय” बताया और खुद या RLP द्वारा चलाए गए चार महीने के धरना, प्रदर्शन और आंदोलन को श्रेय दिया । बेनीवाल ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह कांग्रेस की तरह भ्रष्टाचार को बचाने की कोशिश कर रही थी।
- ब्रेकडाउन: एक समाचार में कहा गया कि इस रद्दीकरण का श्रेय कई पक्षों को जाता है — सरकार, पुलिस, मीणा, बेनीवाल, और सबसे ज़्यादा प्रभावित उम्मीदवारों को।
2021 की SI भर्ती परीक्षा का रद्द होना एक लंबी और जटिल न्यायिक, राजनीतिक, और सामाजिक लड़ाई का परिणाम है। पेपर लीक, सत्ता में जुड़े भ्रष्टाचार, SOG-जांच, अदालत की सख्ती और जनता के दबाव ने मिलकर निष्पक्षता बहाल की राह आसान बनाई। अंततः, अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया, यदि सिस्टम दूषित है, तो उसे सुधारना जरूरी है।
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