ऑपरेशन राइज़िंग लॉयन: कैसे इज़राइल ने ईरान के दिल में घर बना लिया? एक दशक की तैयारी, एक रात की तबाही


ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनैई मारे जा चुके हैं और ईरान अब तबाही के मुहाने पर खड़ा है, ठीक वैसे ही जैसे इराक, सीरीया, लिबिया और अफगानिस्तान बर्बाद हुए थे।......तो यह कहानी तब शुरू होती है, जब 13 जून 2025 की सुबह तीन बजे तेहरान के बाहरी इलाके में एक युवा ईरानी, जिसका कोडनेम "S.T." था, वो अंधेरे में झाड़ियों के पीछे छुपा हुआ था। 

उसके हाथ में एक compact missile controller था और निशाने पर था ईरान का वह anti-aircraft battery जो राजधानी तेहरान की आसमानी सुरक्षा करती थी। यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं था, यह "Operation Rising Lion" की असली शुरुआत थी। उसी रात, करीब 70 लड़ाके, जिसमें ईरानी असंतुष्ट, कुर्द विद्रोही, अज़री militants और बलूच आदिवासी पूरे ईरान में अपनी-अपनी जगह पर मोर्चा संभाल चुके थे। ये किसी देश के सैनिक नहीं थे, ये थे Mossad की वह अदृश्य सेना, जिसे इसी एक रात के लिए चुना और तैयार किया गया था।

शुरुआत: 2007 से चली आ रही "Shadow War"

साल 2007 में nuclear वैज्ञानिक अर्देशिर होसेनपुर की हत्या ने उस सिलसिले की शुरुआत की, जो बाद में Mossad के खाते में गया। 2009 में Masoud Ali-Mohammadi को उनके घर के बाहर मार दिया गया। यह कोई संयोग नहीं था, यह एक systematic plan था जो इजराइल द्वारा ईरान में संचालित था और दशकों तक चला। इज़राइल की ईरान के भीतर खुफिया operations की जड़ें 1979 की ईरानी क्रांति तक जाती हैं, जब अयातुल्लाह अली खामेनैई को सत्ता भी नहीं मिली थी। तब से Mossad लगातार ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में घुसपैठ करती रही है।

2016 — पायलट उड़ाते रहे, कोई जानता न था

साल 2016 से ही Israeli Air Force के pilots गुपचुप तरीके से ईरानी हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भर रहे थे। ये एयरक्राफ्ट ईरान के हर radar sweep, हर missile सिलो, हर anti-aircraft battery की mapping करते हुए, ताकि हमले के दिन detection से बचा जा सके। Missile Silo ज़मीन के नीचे बनी बेहद मजबूत, बेलनाकार कंक्रीट और स्टील की संरचनाएं होती हैं, जिनका उपयोग परमाणु या अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को सुरक्षित रखने और सीधे लॉन्च करने के लिए किया जाता है। ये बंकर दुश्मन के परमाणु हमले को झेलने में सक्षम होते हैं, जिससे देश को Second Strike की क्षमता मिलती है। करीब 9 साल तक इजराइल का यह मिशन चुपचाप चलता रहा और तेहरान को इसकी भनक तक नहीं लगी।

जनवरी 2018 — तेहरान के गोदाम में 'डाका'

31 जनवरी 2018 की रात, 24 से कम Mossad agents दक्षिण तेहरान के Shorabad इलाके के एक गोदाम में घुसे। वहाँ ईरान ने अपने गुप्त परमाणु कार्यक्रम के 32 तिजोरियों में हज़ारों दस्तावेज़ छुपाए थे। इन Agents ने ईरान के alarm system को jam किया, लोहे के दरवाज़े तोड़े और सिर्फ साढ़े 6 घंटों में करीब 50,000 कागज़ी दस्तावेज़ और 55,000 pages की electronic files, 183 CD-ROMs में डालकर चुरा लिए। सुबह 7 बजे जब security shift आई, उससे पहले एजेंट्स की टीम निकल चुकी थी। इन दस्तावेज़ों ने Iran के nuclear weapons program का पूरा खाका खोल दिया।

2020 — बेडरूम में रखी गन ने की हत्या

इसके करीब एक साल बाद November 2020 में Iran के top nuclear scientist Mohsen Fakhrizadeh की हत्या हुई। ईरानी अधिकारियों ने माना कि यह हत्या remote-controlled और AI-guided equipment से की गई। कथित तौर पर इस हत्या के पीछे दो कारण बताए गए। जनवरी 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के जवाब में ईरान की कमजोर प्रतिक्रिया रही और डोनाल्ड ट्रम्प के 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन से हारने की बढ़ती संभावना थी। 

साथ ही ईरान के जेसीपीओ से बाहर होने की कोशिश कर रहा था। जेसीपीओ वह करार था, जिसमें ईरान ने चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ 14 जुलाई, 2015 को एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ, जिसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित किया गया था। 

ईरान दो दशकों से अधिक समय से परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने के प्रयासों में लगा हुआ था। Israeli media के अनुसार मोहशीन फकरीजदेह को मारने के लिए Mossad ने एक one-tonne gun को टुकड़ों में ईरान में smuggle किया था, जिसे एक pickup truck के पीछे लगाया गया और Fakhrizadeh के मारे जाने के बाद वह truck खुद भी blast हो गया।

2024 का Hezbollah pager operation — और ईरान की आँखें खुलीं

September 2024 में Lebanon में हिज्बुल्लाह के हज़ारों pager devices एक साथ blast हुए। यह तभी संभव था, जब Mossad ने Hezbollah की पूरी supply chain में घुसपैठ कर ली हो। इसके बाद ईरान के supreme leader अयातुल्लाह अली खामेनैई के सलाहकार Ali Larijani ने November 2024 में खुद स्वीकार किया, "पिछले कुछ सालों में घुसपैठ की समस्या बहुत गंभीर हो गई है।", लेकिन ईरान के लिए अब बहुत देर हो चुकी थी।

April 2024 — वह पल जब इज़राइल ने ठान लिया

April 2024 में ईरान ने पहली बार सीधे इज़राइल पर missiles और drones दागे। लगभग सभी intercepted हो गए, लेकिन Mossad headquarters में इसे एक declaration of intent माना गया। इसके बाद mid-2024 में Israeli military ने formally एक full bombing campaign की planning शुरू की। November 2024 में Trump की जीत ने हिसाब बदल दिया। तब Hezbollah neutralized था, इस्राइल को Trump का support मिलने की उम्मीद थी, और Israel के officials ने इसे एक "window of opportunity" देखी।

ऑपरेशन की असली रीढ़: bodyguards के फोन से tracking

ईरान के top leaders जानते थे कि Mossad उनके phones track करती है। इसीलिए meeting में जाते वक्त वे खुद फोन नहीं लेते थे, लेकिन उनके bodyguards और drivers के phones active थे, जिनपर social media तक चल रहा था। Israel ने इन्हीं phones को hack करके senior leaders की exact location pinpoint की। ईरान के पूर्व Vice President Sasan Karimi ने बाद में माना कि "senior leaders ने phones नहीं रखे, लेकिन उनके guards और drivers ने कोई सावधानी नहीं बरती, इसी से Israel ने उन्हें ट्रैक कर लिया।"

13 जून 2025 — वह रात जब सब एक साथ हुआ

इसके बाद 13 जून 2025 की रात में Israeli Air Force के 200 से अधिक aircraft ने उड़ान भरी और 330 से ज़्यादा म्यूनिशंस से करीब 100 targets पर हमला किया, लेकिन सबसे पहले Mossad के ground operators ने काम किया। Mossad ने पहले ही Iran के भीतर कई जगह precision-guided weapons systems deploy कर दिए थे, जो Iranian surface-to-air missile installations के पास खुले में, vehicles पर छुपे हुए थे। जैसे ही Israeli Air Force का attack शुरू हुआ, ये सिस्टम activate हुए और सभी designated Iranian air defense targets को तबाह कर दिया।

सबसे बड़ा psychological trap — नकली phone call

Mossad ने Iranian communication channels का इस्तेमाल करके 13 जून 2025 को एक नकली "emergency meeting" का संदेश भेजा। IRGC Aerospace Force के पूरे senior leadership को, जिसमें Commander General Amir Ali Hajizadeh थे, उन सभी को एक underground bunker में बुलाया गया। जैसे ही वे सब उस bunker में इकट्ठा हुए, Israeli jets ने precision bombs से उसे नष्ट कर दिया। 20 senior officers मारे गए, जिनमें तीन chiefs of staff शामिल थे। जब commanders ही नहीं रहे, तो ईरान के पास 1,000 ballistic missiles का जो जवाबी हमला planned था, उसका order देने वाला कोई नहीं बचा।

वैज्ञानिकों के बेडरूम तक पहुँची थी Mossad

Israeli operatives ने ईरान के nuclear scientists की दिनचर्या, उनके घर और यहाँ तक कि उनके सोने की जगह तक का पता लगा लिया था। मौसाद ने एआई का इस्तेमाल करते हुए ये सब किया था। 13 जून 2025 की सुबह precision missiles ने 11 senior nuclear scientists के घरों पर हमला किया, जिसमें सभी मारे गये, यानी सूरज उगने से पहले ईरान का nuclear brain trust खत्म हो चुका था।

CIA की भूमिका — shadows में रहकर

22 जून को America ने "Operation Midnight Hammer" launch किया, जिसमें US bombers ने Iran के तीन nuclear facilities— जिनमें पहाड़ के अंदर बना Fordow शामिल था, उसपर GBU-57 "bunker buster" बम गिराए। यह कोम शहर के पास पहाड़ी में बनाया गया था। यह बम Israel के पास नहीं था और जिसके बिना Fordow को तबाह करना असंभव था। डोनाल्ड Trump की जीत के बाद Israel को विश्वास था कि अमेरिका साथ देगा और उसने इस्राइल की उम्मीद के अनुसार साथ भी दिया।

हमले के बाद Mossad chief David Barnea ने कहा: "हमने साबित किया कि ईरान में घुसा जा सकता है और हम यहीं नहीं रुकेंगे। Mossad की operational capabilities पहले से भी ज़्यादा मज़बूत हैं, खासकर ईरान के भीतर और तेहरान के दिल में।" यह सिर्फ जीत का बयान नहीं था, यह अगली चाल की चेतावनी भी थी, जिसे 28 फरवरी 2026 को ईरान के टॉप लीडर अयातुल्लाह अली खेमैनेई समेत ईरान की टॉप कंमांडरशिप को मारकर पूरा किया गया।

28 फरवरी 2026: खामेनेई को कैसे मारा गया?

अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या का सबसे अहम तत्व अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की वह जानकारी थी, जो उसने इज़रायल के साथ साझा की थी। CIA को पता चला कि 28 फरवरी 2026 की सुबह तेहरान के एक केंद्रीय परिसर में एक बैठक होने वाली है, जहाँ खामेनेई और देश के टॉप आर्मी कमांडर एक साथ जमा होंगे। यह वही परिसर था, जिसमें खामेनैई के दफ्तर, उनका आवास, राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के कार्यालय, सब एक साथ थे। मौसाद और CIA जून 2025 के बारह-दिवसीय युद्ध से भी पहले से खामेनेई की लोकेशन ट्रैक कर रही थी।

"Target of Opportunity" — समय बदला गया

इज़रायल और अमेरिका ने मूल रूप से रात के अंधेरे में हमला करने की योजना बनाई थी, जैसा जून 2025 के "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" में किया गया था। लेकिन CIA की इस खुफिया जानकारी ने सब बदल दिया। एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने कहा कि "टाइमलाइन को जानबूझकर आगे खींचने का फैसला किया गया।" यह एक "target of opportunity" था, यानी ऐसा मौका जो दोबारा नहीं मिलता।

सुबह 9:40 बजे — 30 बम, एक परिसर

खामेनेई के परिसर पर हमला दिन के उजाले में हुआ। इस हमले में इज़रायली विमानों ने उस स्थल पर 30 बम गिराए। साथ ही तेहरान में कम से कम दो और जगहों पर एक साथ हमले किए गए, ताकि ऑपरेशन की सफलता सुनिश्चित हो सके। मौसाद और सीआईए को सटीक जानकारी के बाद भी शंका थी कि कहीं खामेनैई वहां पर नहीं छुपा हो। उपग्रह चित्रों ने पुष्टि करी कि ईरान के टॉप लीडर की इमारत बुरी तरह तबाह हो गई थी। एक इज़रायली अधिकारी ने कहा कि खामेनेई का शव मलबे में मिला और उसकी तस्वीर PM नेतन्याहू को दिखाई गई।

कौन-कौन मारे गए?

खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, नाती और बहू भी मारे गए। 2 मार्च को उनकी पत्नी ने भी घावों के कारण दम तोड़ दिया। इसके अलावा ईरान के इमरजेंसी कमांड के खुफिया प्रमुख सलाह असादी, खामेनेई के सैन्य कार्यालय के प्रमुख मोहम्मद शिराज़ी, रक्षा अनुसंधान संगठन SPND के प्रमुख हुसैन जबल अमेलियान और पूर्व प्रमुख रेज़ा मोज़फ्फरी निया भी मारे गए। 1 मार्च को चीफ ऑफ स्टाफ अब्दोलरहीम मूसवी की मृत्यु की भी पुष्टि हुई, जो हमले में घायल हुआ था। CBS के अनुसार कुल 40 वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मारे गए।

जून 2025 में क्यों नहीं मारा?

दरअसल, 13 जून 2025 को शुरू हुए बारह-दिवसीय युद्ध में इज़रायल ने खामेनेई को मारने की योजना बनाई थी, लेकिन तब डोनाल्ड ट्रम्प ने वीटो मना कर दिया, क्योंकि उन्हें बड़े पैमाने पर रीजनल वॉर का डर था। 28 फरवरी 2026 को डोनाल्ड ट्रंप का वह संकोच खत्म हो गया, क्योंकि अमेरिका के पास अरब देशों के मंसूबों की पूरी जानकारी थी। जून 2025 में Mossad ने ईरान की वायु रक्षा और परमाणु वैज्ञानिकों को नष्ट किया और CIA ने महीनों तक खामेनेई की हर हरकत पर नज़र रखी। 28 फरवरी को जब सभी शीर्ष कमांडर एक ही कमरे में थे, तो दिन के उजाले में 30 बम गिराकर पूरी कमान संरचना को एक झटके में खत्म कर दिया गया।

Post a Comment

Previous Post Next Post