जयपुर। भारत के इतिहास में विज्ञान, खेल और रक्षा की महान उपलब्धियों के साथ अब राजस्थान की लोककला का नाम भी स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026’ में जयपुर के अंतरराष्ट्रीय अलगोजा वादक रामनाथ चौधरी का नाम विशेष रूप से सम्मिलित किया गया है। उन्होंने नाक से लगातार 20 मिनट 35 सेकंड तक अलगोजा बजाकर यह कीर्तिमान स्थापित किया।
कौन हैं रामनाथ चौधरी?
जयपुर के बाड़ा पदमपुरा गाँव के निवासी रामनाथ चौधरी दुनिया के एकमात्र ऐसे कलाकार हैं जो नाक से अलगोजा बजाने की दुर्लभ विधा में पारंगत हैं। चौधरी नाक से अलगोजा बजाने वाले दुनिया के एकमात्र कलाकार हैं और 12 फीट लम्बी मूँछें रखने का भी रिकॉर्ड उनके नाम है।
रामनाथ चौधरी के अनुसार, आठ वर्ष की आयु में जब वे पहली बार अलगोजा बजा रहे थे, तब वाद्य यंत्र मुँह की जगह नाक के पास चला गया और नाक से साँस खींचते ही वह बज उठा। बस, तभी से उन्होंने नाक से अलगोजा बजाने की यह अनूठी कला शुरू कर दी। पिछले 60 वर्षों से वे इस कला का निरंतर प्रदर्शन करते आ रहे हैं और इस कला को संजोने में उनकी तीन पीढ़ियाँ वर्षों से काम कर रही हैं।
लिम्का बुक 2026 में क्या है खास?
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2026 में एक ही वर्ष (2024-25) की असाधारण उपलब्धियाँ दर्ज हैं। भारत की महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक ICC वर्ल्ड कप विजय, पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स द्वारा 700 लोकोमोटिव का निर्माण, रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण, एकल दिन में 5 लाख से अधिक हवाई यात्रियों का नया रिकॉर्ड, और दुनिया के सबसे ऊँचे रेलवे पुल का उद्घाटन। इन राष्ट्रीय एवं ऐतिहासिक उपलब्धियों की सूची में रामनाथ चौधरी की लोककला को भी विशेष स्थान मिला है, जो इस सम्मान की महत्ता और भी बढ़ा देता है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और सम्मान
वर्ष 2000 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी रामनाथ चौधरी की मूँछों और नाक से अलगोजा बजाने की कला से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें अपने साथ अमेरिका ले गए। इसके बाद चौधरी ने अमेरिका, जर्मनी, दुबई, ऑस्ट्रेलिया, जापान सहित एक दर्जन से अधिक देशों में राजस्थानी लोककला का प्रचार-प्रसार किया।
उनकी लोककला को पहले वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स एवं इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है। अब लिम्का बुक 2026 में स्थान मिलना उनकी साधना का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। रामनाथ चौधरी अपनी 12 फीट लंबी ऐतिहासिक मूँछों, कच्ची घोड़ी नृत्य, परंपरागत वेशभूषा और अनूठे वादन से देश-विदेश में राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान बन चुके हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्वीकृति
राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने रामनाथ चौधरी से सचिवालय में भेंट करते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार केंद्र को सिफारिश भेजेगी, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लोककला क्षेत्र में पदक एवं सम्मान दिलाया जा सके। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भी राजभवन में उनकी कला का प्रदर्शन देखा और उनकी लोक संगीत साधना को महत्वपूर्ण बताते हुए शुभकामनाएँ दीं।
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स:— भारत का गौरव
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भारतीयों की विश्व रिकॉर्ड उपलब्धियों को दर्ज करने वाली वार्षिक संदर्भ पुस्तक है, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के भारतीय संस्करण के रूप में जानी जाती है। इसे पहली बार 1990 में प्रकाशित किया गया था।
रामनाथ चौधरी की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समूचे राजस्थान की लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का गौरव है। जब अंतरिक्ष से लेकर क्रिकेट मैदान तक भारत नए परचम लहरा रहा है, उसी सूची में राजस्थान के एक लोककलाकार का नाम शामिल होना यह सिद्ध करता है कि भारत की असली शक्ति उसकी विविधता और संस्कृति में बसती है।
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