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ट्रंप की सुरक्षा में हर घंटे 2 लाख डॉलर खर्च होते हैं


“एक आदमी का दौरा… और पूरा एक देश उल्टा हो जाता है, पूरी दुनिया तनाव में होती है...इस दौरे के लिए 1000 होटल रूम, 2 लाख डॉलर प्रति घंटे का हवाई जहाज़, परमाणु हमले का बटन हर वक्त साथ और ये सब सिर्फ एक विदेश यात्रा के लिए। आइए जानते हैं कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति किसी दूसरे में देश जाते हैं, तो उसकी सुरक्षा में क्या-क्या तामझाम होता है।”

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बढ़ते विदेशी कर्ज को लेकर सभी सरकारों, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हिदायत दी है कि खर्चा कम करें। खुद पीएम मोदी भी सोमवार को अपने घर से ओफिस केवल दो गाड़ियों से पहुंचे। एक तरफ जहां भारत अपने खर्चे घटा रहा है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा पर ही हर घंटे 2 लाख डॉलर से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। ट्रंप इन दिनों चीन के दौरे पर हैं, जिससे जीडीपी में अमेरिका से टक्कर मिल रही है। एशिया में जो देश तानाशाही के लिए जाना जाता है, जहां होने वाली गलत चीजें कभी बाहर नहीं आती हैं, जहां से कोरोना का जन्म हुआ था। दो दशक पहले चीन को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ने ही काफी सहायता दी थी, लेकिन अब उसी चीन की इकॉनोमी इतनी बड़ी हो चुकी है कि अमेरिका को सीधी टक्कर मिल रही है। ईरान से युद्ध के दौरान चीन और रसिया ने अमेरिका की तमाम बातों को नैगलेट कर ईरान की खूब मदद की है।

और शायद इसलिए अमेरिका को चीन से दोस्ती करने की सूझ रही है। ट्रंप के इस दौरे पर चीन के साथ कई तरह के समझौते होंगे, इसलिए 17 कंपनियों के सीईओ साथ गए हैं। चीन को पता है कि ट्रंप का यह दौरा कितना जरूरी है। उसे भी ताइवान को मिलने वाली अमेरिकी मदद को रोकना है, ताकि समय आने पर ताइवान को अपने कब्जे में लिया जा सके। ताइवान को अमेरिका ने करीब 11 अरब डॉलर की हथियार मदद की थी और अभी 14 अरब डॉलर की मदद पाइपलाइन में है। मई 2025 में दोनों देशों के बीच टैरिफ जंग के बाद यह पहली बड़ी बैठक होने जा रही है, जिसपर दुनियाभर की नजरें हैं। जब अमेरिकी राष्ट्रपति किसी दूसरे देश का दौरा करते हैं, तो यह महज़ एक राजनयिक यात्रा नहीं होती, यह दुनिया का सबसे महंगा, सबसे सुरक्षित और सबसे जटिल लॉजिस्टिक ऑपरेशन होता है, जिसमें करीब 25 सरकारी संगठन और हज़ारों लोग शामिल होते हैं। 

सीक्रेट सर्विस की एडवांस टीम राष्ट्रपति के पहुँचने से हफ्तों पहले उस देश में पहुँच जाती है, अमेरिकी राष्ट्रपति जहां की यात्रा करने वाले होते हैं। यह टीम रास्तों का सर्वे करती है, तमाम वेन्यू की सुरक्षा जाँच करती है, सुरक्षित कॉरिडोर तय करती है और इमरजेंसी एक्सिट के रास्ते तैयार करती है। सीक्रेट सर्विस किसी भी दौरे से एक हफ्ते पहले पहुँचती है, ताकि राष्ट्रपति और उनकी लिमोज़ीन के लिए सभी नियोजित रास्ते सुरक्षित हों।

एयर फोर्स वन दो विशेष रूप से संशोधित बोइंग 747-200बी विमानों में से एक होता है, जिनके टेल कोड 28000 और 29000 हैं, और यह किसी हमले की स्थिति में मोबाइल कमांड सेंटर की भूमिका निभा सकता है। इस विमान में 4,000 स्क्वायर फुट का फ्लोर स्पेस है, जिसमें एक प्रेसिडेंशियल सूट, बड़ा ऑफिस, कॉन्फ्रेंस रूम, एक मेडिकल सूट, जिसे ऑपरेशन थिएटर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, और दो फूड गैली हैं, जो एक साथ 100 लोगों को खाना परोस सकती हैं। एयर फोर्स वन को ऑपरेट करने में करीब 2 लाख डॉलर प्रति घंटे का खर्च आता है। विदेश यात्राओं के दौरान अतिरिक्त स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों को एयर फोर्स C-32 यानी संशोधित बोइंग 757 पर भेजा जाता है।

राष्ट्रपति की मोटरकेड में दो एक समान लिमोज़ीन कारें शामिल होती हैं, जिन्हें ‘द बीस्ट’ कहा जाता है। यह 7-सीटर काली बख्तरबंद लिमोज़ीन कार करीब 20 लाख डॉलर की होती है। इसे सील्ड पैनिक रूम में तब्दील किया जा सकता है, जिसमें ऑक्सीजन टैंक, नाइट-विज़न कैमरा और रिइनफोर्स्ड स्टील प्लेटिंग है, जो बुलेट, केमिकल अटैक और बम का सामना कर सकती है। इसके के​डीलेक में केवलर-रिइनफोर्स्ड टायर और स्टील रिम हैं, जो टायर पंक्चर हो जाने पर भी गाड़ी को चलाते रहते हैं। इसकी खिड़कियों में 13 सेंटीमीटर मोटा लैमिनेटेड ग्लास है और पैनल में 20 सेंटीमीटर मोटा मिलिट्री-ग्रेड आर्मर है। द बीस्ट को एयर फोर्स वन पर नहीं, बल्कि C-17 और C-5 मिलिट्री एयरक्राफ्ट पर ले जाया जाता है, और हमेशा एक साथ कई C-17 और C-5 विमान भेजे जाते हैं। 

मरीन वन, जो कि दुनिया के सबसे सुरक्षित और उन्नत हेलीकॉप्टरों में से एक है, जिसे आमतौर पर HMX-1 "नाइटहॉक्स" स्क्वाड्रन द्वारा संचालित किया जाता है। मरीन वन को ऑपरेट करने में 16,700 से लगभग 20,000 डॉलर प्रति घंटे का खर्च आता है। यह राष्ट्रपति का ऑफिशियल हेलीकॉप्टर है, जो विशेषकर तब उपयोग में आता है जब सड़क मार्ग संभव या सुरक्षित न हो।

न्यूक्लियर फुटबॉल एक काला चमड़े का ब्रीफकेस है, जिसमें टॉप-सीक्रेट सामग्री है जो अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी भी स्थान से, चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हों, परमाणु हमले को अधिकृत करने की क्षमता देती है। इसे पाँच मिलिट्री एड्स में से एक हमेशा अपने हाथ में लेकर राष्ट्रपति के साथ चलता है। इस ब्रीफकेस में स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर अटैक लॉन्च करने के लिए ज़रूरी कोड्स भरी एक हार्ड ड्राइव है। 

काउंटर असॉल्ट टीम, यानी CAT सीक्रेट सर्विस की एक विशेष टैक्टिकल यूनिट है, जिसका प्राथमिक काम राष्ट्रपति, मोटरकेड या किसी सुरक्षित स्थान पर किसी संगठित हमले को विफल करना, दबाना और खत्म करना है। काउंटर स्नाइपर टीम बाहरी स्थलों पर लॉन्ग-रेंज ऑब्जर्वेशन और रियल-टाइम इन्फॉर्मेशन गैदरिंग करती है, और ये अत्यंत प्रशिक्षित प्रिसिज़न मार्क्समैन होते हैं। 

व्हाइट हाउस के फिज़ीशियन और एक पूरी तरह सुसज्जित मेडिकल टीम हर यात्रा में राष्ट्रपति के साथ जाती है, जो एयर फोर्स वन पर या ज़मीन पर कहीं भी एडवांस्ड आपातकालीन चिकित्सा सेवा दे सकती है। राष्ट्रपति के ब्लड ग्रुप की बोतलें भी हमेशा साथ रखी जाती हैं और एक सैटेलाइट फोन से दुनिया के किसी भी कोने से संपर्क बनाए रखा जा सकता है। 

किसी बड़े विदेशी दौरे में 1,000 होटल के कमरे बुक करना सामान्य बात है। राष्ट्रपति के साथ उनका स्टाफ, कैबिनेट सेक्रेटरीज़, उनके अपने स्टाफ और सुरक्षाकर्मी होते हैं, और अगर फर्स्ट लेडी साथ हों तो उनकी अलग सुरक्षा टीम और स्टाफ का एक और पूरा लेयर जुड़ जाता है। राष्ट्रपति आमतौर पर अपने साथ 13 पत्रकारों को लेकर चलते हैं, जिनमें तीन वायर रिपोर्टर, दो प्रिंट रिपोर्टर, चार फोटोग्राफर, तीन सदस्यीय टेलीविज़न क्रू और एक रेडियो रिपोर्टर होते हैं। 

राष्ट्रपति अपने पर्सनल शेफ को भी साथ ले जाते हैं। राष्ट्रपति के भोजन को लेकर जहर या छेड़छाड़ का खतरा इतना गंभीर माना जाता है कि विदेश में परोसा जाने वाला भोजन भी अमेरिकी नियंत्रण में रहता है। एयर फोर्स वन पर बैठे-बैठे राष्ट्रपति कमांडर-इन-चीफ के रूप में काम कर सकते हैं, यहाँ तक कि युद्ध का निर्देश और परमाणु युद्ध का आदेश भी दे सकते हैं। यह विमान एक उड़ती हुई सिचुएशन रूम है। अकेले एयर फोर्स वन का खर्च करीब 2 लाख डॉलर प्रति घंटा है, और यह तो सिर्फ ऊपरी आँकड़ा है। इसके अलावा मिलिट्री कार्गो प्लेन, सीक्रेट सर्विस का विशाल तंत्र और अन्य खर्चे अलग हैं। यानी अमेरिकी राष्ट्रपति के एक पूरे विदेशी दौरे की वास्तविक लागत कई गुना ज़्यादा होती है।


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