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अन्नामलाई: बीजेपी का वो तुरुप का इक्का, जिसे 'बलि' से बचा लिया गया?


"क्या तमिलनाडु में बीजेपी ने अपने सबसे बड़े योद्धा को हटाकर अपनी हार खुद लिखी? या फिर यह अमित शाह और मोदी के उस 'डीप गेम' का हिस्सा है, जिसे समझने में अच्छे-अच्छे राजनीतिक विश्लेषक मात खा गए? जब पूरा देश कह रहा था कि अन्नामलाई को हटाना बीजेपी की सबसे बड़ी भूल है, तब दिल्ली के बंद कमरों में के अन्नामलाई को 2031 का मुख्यमंत्री बनाने की पटकथा लिखी जा रही थी। आज इस वीडियो में हम उस सच से पर्दा उठाएंगे कि आखिर क्यों बीजेपी ने जोसेफ विजय की जीत के सामने अन्नामलाई की 'सियासी बलि' नहीं दी और कैसे तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके के खात्मे के बाद अब सिर्फ भगवा लहराने की तैयारी है। स्वागत है आपका, राजनीति की उस बिसात पर जहाँ हार कर भी जीतने वाले को अन्नामलाई कहते हैं।"

तमिलनाडु में जब जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके का उदय हुआ, तो एक लहर साफ थी। बीजेपी के आंतरिक सर्वे बता रहे थे कि इस बार जनता द्रविड़ राजनीति के दोनों ध्रुवों, डीएमके और एआईएडीएमके से ऊब चुकी है, लेकिन वह विकल्प के तौर पर एक तमिल सिनेमाई चेहरे यानी जोसफ विजय को मौका देना चाहती है। बीजेपी जानती थी कि अगर इस चुनाव में अपने स्टार चेहरे के अन्नामलाई को सीएम चेहरा बनाया गया और बीजेपी हार गई, तो अन्नामलाई जैसे 'चमत्कारी चेहरे' की साख पर वो धब्बा लगेगा, जिसे मिटाना मुश्किल होगा। राजनीति में सबसे टिकाऊ चेहरे को तब तक बचाकर रखा जाता है, जब तक आपकी जीत निश्चित न हो। अन्नामलाई को भाजपा अध्यक्ष पद से हटाकर एक साधारण नेता बनाना हार का ठीकरा फोड़े जाने से बचाना था। बीजेपी की रणनीति साफ थी, विजय को आने दो, उन्हें पांच साल सरकार चलाने दो, क्योंकि बीजेपी जानती है कि जोसेफ विजय के पास ग्लैमर तो है, लेकिन प्रशासनिक अनुभव और जमीन पर कैडर की कमी उन्हें पांच साल में विफल कर देगी।

कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई, जिन्हें तमिलनाडु में 'सिंघम' के नाम से जाना जाता था, उन्होंने खाकी छोड़कर खादी इसलिए नहीं पहनी कि वह सिर्फ विधायक बनें। उनका लक्ष्य तमिलनाडु की जड़ों में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को पहुंचाना था। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले अन्नामलाई ने अपनी 'एन मन, एन मक्कल', मेरी भूमि, मेरे लोग पदयात्रा के जरिए तमिलनाडु के 234 निर्वाचन क्षेत्रों में वह आग जला दी, जो दशकों से शांत थी। उन्होंने द्रविड़ विचारधारा के उस अहंकार को चुनौती दी, जिसने दशकों तक हिंदी विरोध और सनातन विरोध की राजनीति की। अन्नामलाई बीजेपी के लिए केवल एक नेता नहीं, बल्कि तमिलनाडु में पार्टी का 'पुनर्जन्म' हैं। यही कारण है कि बीजेपी आलाकमान ने उन्हें पांच साल के लिए 'रिजर्व' पर रखा है, ताकि जब टीवीके फेल हो और द्रविड़ दल अप्रासंगिक हो जाएं, तब अन्नामलाई एक निर्विवाद नायक बनकर उभरें।

तमिलनाडु की राजनीति में अब तक सिर्फ दो ही नाम चलते थे, करुणानिधि का परिवार या जयललिता की विरासत, लेकिन आज एआईएडीएमके बिखर चुकी है और डीएमके परिवारवाद के बोझ तले दबी है। जोसेफ विजय की टीवीके एक 'ट्रांजिशन फेज' है, यानी एक ऐसा बदलाव जो जनता ने जल्दबाजी में चुना है। कांग्रेस तमिलनाडु में केवल एक 'पिछलग्गू' पार्टी बनकर रह गई है, जिसका कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है। ऐसे में, जैसे पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया और टीएमसी के किले को ढहाया, वही स्क्रिप्ट अब तमिलनाडु के लिए तैयार है। बंगाल में जो काम सुवेंदु अधिकारी ने किया, तमिलनाडु में वही काम अन्नामलाई करेंगे। जब पांच साल बाद जोसेफ विजय की सरकार के खिलाफ गुस्सा पैदा होगा, तब जनता के सामने केवल एक ही विकल्प होगा, एक ईमानदार पूर्व आईपीएस अधिकारी, जो तमिलनाडु की संस्कृति और भारत की अखंडता की बात करता है।

बीजेपी अपनी रणनीति 5 या 10 साल आगे के ​हिसाब से बनाती है। अन्नामलाई को पांच साल इंतजार करने को कहना कोई सजा नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी है। इस दौरान अन्नामलाई जमीन पर बीजेपी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को तैयार करेंगे। जब 2031 के चुनाव आएंगे, तब अन्नामलाई बीजेपी के स्टार प्रचारक नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री पद के एकमात्र दावेदार होंगे। बीजेपी का मानना है कि जोसेफ विजय की जीत एक बुलबुला है, जो प्रशासनिक विफलताओं के साथ फूट जाएगा, ठीक वैसे ही, जैसे दिल्ली में केजरीवाल का फूट चुका है। तब तमिलनाडु में जो शून्य पैदा होगा, उसे भरने के लिए बीजेपी ने अन्नामलाई को सुरक्षित रखा है। अन्नामलाई का 'साधारण नेता' बना रहना दरअसल एक लंबी छलांग से पहले के दो कदम पीछे हटना है।

जो लोग अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें बीजेपी की 'वेट एंड वॉच' नीति को समझना होगा। तमिलनाडु में भगवा क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। यह संघर्ष लंबा जरूर है, लेकिन परिणाम वैसा ही होगा, जैसा हमने बंगाल में देखा। क्या आपको लगता है कि जोसेफ विजय की चमक के आगे के अन्नामलाई का राष्ट्रवाद टिक पाएगा? क्या 2031 में तमिलनाडु को अपना पहला बीजेपी मुख्यमंत्री मिलेगा?

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