एक नेता जो कभी ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री था, जो उनका सबसे भरोसेमंद चेहरा था, जिसने नंदीग्राम आंदोलन में ममता के साथ कंधे से कंधा मिलाया था, और उसी नेता ने पाँच साल में ममता को दो बार चुनाव में हराया। दोस्त से दुश्मन ऐसा बना कि उनकी 15 साल की सरकार उखाड़ फेंकी, और आज वो बंगाल के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाला है। यह राजनीति की किताब में लिखी जाने वाली अद्भुत कहानी है।
8 मई 2026 को कोलकाता के न्यूटाउन स्थित विश्वबांग्ला कन्वेंशन सेंटर में BJP विधायक दल की बैठक हुई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया। 9 मई 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में शपथ ग्रहण समारोह ग्रहण, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत BJP शासित करीब 20 राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूदगी। BJP ने 293 विधानसभा सीटों में से 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया और TMC 80 सीटों पर सिमट गई। यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं है। यह 15 साल के TMC राज का अंत है और इस अंत के नायक हैं सुवेंदु अधिकारी, जो अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री चुने जा चुके हैं।
सुवेंदु अधिकारी राज्य के प्रभावशाली महिष्य समुदाय से आते हैं जिसका पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर जिले में खासा राजनीतिक असर है। उनके पिता सिसिर अधिकारी और परिवार के अन्य सदस्य भी सक्रिय राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं। मेदिनीपुर जिले के कंथी इलाके में अधिकारी परिवार की राजनीतिक जड़ें दशकों पुरानी हैं। सुवेंदु के पिता सिसिर अधिकारी लंबे समय तक यहीं से सांसद रहे। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी भी सांसद रहे। यह एक पूरा राजनीतिक परिवार है, जैसे सिंधिया परिवार मध्यप्रदेश में, वैसे ही अधिकारी परिवार बंगाल के मेदिनीपुर में है।
सुवेंदु अधिकारी ने अपनी राजनीतिक यात्रा TMC से शुरू की। ममता बनर्जी के साथ 2007-2008 के नंदीग्राम आंदोलन में उन्होंने सबसे अहम भूमिका निभाई थी। जब वामपंथी सरकार ने नंदीग्राम में ज़मीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन करने वालों पर गोलियाँ चलवाईं, तब सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। उस आंदोलन ने ममता को बंगाल की सत्ता दिलाई और सुवेंदु को ममता का सबसे भरोसेमंद नेता बनाया। 2011 में जब TMC सत्ता में आई तो सुवेंदु कैबिनेट मंत्री बने। परिवहन, सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग उनके पास रहे। मेदिनीपुर में उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि उन्हें "मेदिनीपुर का बाहुबली" कहा जाता था, लेकिन धीरे-धीरे ममता और सुवेंदु के बीच दूरियाँ बढ़ने लगीं।
2020 के अंत में सुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच की दरार सार्वजनिक हो गई। कहा जाता है कि ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की बढ़ती ताकत और पार्टी में उनके वर्चस्व से सुवेंदु अधिकारी नाराज थे। दिसंबर 2020 में सुवेंदु ने TMC से इस्तीफा दिया, और जनवरी 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में BJP जॉइन की। यह वो मोड़ था, जिसने बंगाल की राजनीति बदल दी। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता ने खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन उनके सामने थे सुवेंदु अधिकारी। यह मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों का नहीं था। यह एक बड़ी नेता और उसके शिष्य का मुकाबला था। ममता को लगा था कि जिस नंदीग्राम की माटी से उनकी राजनीति उठी, वहाँ वो जरूर जीतेंगी, लेकिन सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम में हरा दिया। यह बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा upset था। 2021 में BJP 77 सीटें जीती और TMC ने 213 सीटों से सरकार बनाई। BJP हारी, लेकिन सुवेंदु जीते। वो नेता प्रतिपक्ष बने और अगले पाँच साल के लिए ममता सरकार के सबसे बड़े आलोचक रहे।
नेता प्रतिपक्ष के रूप में सुवेंदु ने TMC के हर भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम बखूबी किया। शारदा चिटफंड घोटाला, नारदा स्टिंग, संदेशखाली में महिलाओं पर अत्याचार, राशन घोटाला, हर मुद्दे पर सुवेंदु आगे रहे। संदेशखाली में जब TMC नेताओं पर महिलाओं के उत्पीड़न के आरोप लगे तो सुवेंदु ने उसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। RG Kar Medical College में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी के बाद जब पूरा बंगाल सड़कों पर उतरा, तब सुवेंदु सबसे आगे थे। उन्होंने मेदिनीपुर से लेकर जंगलमहल तक जनसंपर्क किया। हर जिले में, हर बूथ पर, TMC के जो छोटे नेता पार्टी से नाराज थे, उन्हें BJP में लाया, और 2026 का चुनाव आते-आते बंगाल में वो माहौल तैयार हो गया जो ममता बनर्जी के लिए घातक साबित हुआ।
सुवेंदु अधिकारी ने न केवल नंदीग्राम सीट बरकरार रखी, बल्कि इस बार ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में भी हरा दिया। लगातार दो चुनावों में ममता को हराने की उपलब्धि भारतीय राजनीति में एक ही बार होती है। BJP ने 293 सीटों में से 207 सीटें जीतकर बंगाल में पहली बार अपनी सरकार बनाई। बंगाल में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर 2 डिप्टी CM बनाए, ताकि उत्तर और दक्षिण बंगाल के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन साधा जा सके। कैबिनेट में RG Kar मामले की पीड़िता की माँ रत्ना देबनाथ, पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार और पूर्व NSG कमांडो दीपंजन चक्रवर्ती जैसे नामों की चर्चा है। सुवेंदु अधिकारी की कहानी एक सबक है, कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त नहीं होता, कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता। जो आज आपका सबसे करीबी है, वो कल आपका सबसे बड़ा चुनौती बन सकता है। ममता ने सुवेंदु अधिकारी को बनाया, और सुवेंदु ने ममता को उखाड़ दिया। ये सिर्फ एक नेता की नहीं, बल्कि उस बंगाल की जीत है, जो 34 साल वामपंथ और 15 साल TMC के बाद एक नया रास्ता चुन रहा है।

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