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पर्यटन मंत्री हजारों साल पुराने पत्थरों से सोना निकाल रहा है


एक राज्य जिसकी जमीन पर रेत है, पहाड़ हैं, किले हैं, महल हैं, रेगिस्तान है, झीलें हैं, और इसी जमीन पर टिका है अरबों रुपये का एक ऐसा कारोबार, जिसे सरकार "पर्यटन" कहती है, लेकिन जिसकी असली कमाई कहां जाती है, यह बहुत कम लोग जानते हैं। आपमें से कुछ ही लोग जानते होंगे कि राजस्थान के हजारों साल पुराने पत्थरों से पर्यटन मंत्री सोना निकालने का काम करा है। आज हम राजस्थान के पर्यटन की एक एक कर पूरी परतें उघाड़ेंगे, जो दिखाती हैं कि पर्यटन मंत्री चांदी नहीं, बल्कि सोना कूट रहा है। साथ ही देश के दूसरे राज्यों से तुलना करेंगे और यह भी बताएंगे कि जीरो इंवेस्ट के पर्यटन विभाग राजस्थान का सबसे "लाभदायक" विभाग क्यों है।

क्या आप जानते हैं भारत में ट्यूरिज्म कितना बड़ा बिजनेस है? भारत की कुल जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र का 5.22 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 2023 में पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय 2 लाख 31 हजार 927 करोड़ रुपये रही। 2024 में भारत में कुल 20.94 लाख विदेशी पर्यटक आए और फोरेन ट्यूरिज्म से 35 अरब डॉलर, यानी करीब 2 लाख 94 हजार करोड़ रुपये की आय हुई। यह रकम भारत के किसी भी राज्य के पूरे बजट से बड़ी है। सवाल यह है कि इस विशाल पर्यटन बाजार में कौन सा राज्य सबसे आगे है?

घरेलू पर्यटन में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर है, जहाँ 2024 में 64 करोड़ 68 लाख पर्यटक आए। इसके बाद तमिलनाडु में 30 करोड़ 68 लाख, कर्नाटक में 30 करोड़ 46 लाख, आंध्र प्रदेश में 29 करोड़ 3 लाख और राजस्थान में 23 करोड़ 1 लाख पर्यटक आए। विदेशी पर्यटकों में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है, जहाँ 37 लाख 10 हजार विदेशी पर्यटक आए। इसका मतलब राजस्थान पर्यटकों की संख्या में पाँचवें नंबर पर है, लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। संख्या और कमाई में फर्क होता है। उत्तर प्रदेश में 64 करोड़ पर्यटक आते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश धार्मिक यात्री हैं जो कम खर्च करते हैं। राजस्थान में आने वाले पर्यटक, खासकर विदेशी, बहुत ज़्यादा खर्च करते हैं। Heritage hotels में रुकते हैं, Jeep सफारी करते हैं, हस्तशिल्प खरीदते हैं, ऊँट की सवारी करते हैं। यानी प्रति पर्यटक आय के मामले में राजस्थान देश में सबसे आगे है।

पहले उत्तर प्रदेश में ताज महल, काशी, अयोध्या, मथुरा जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं। UP में एक करोड़ से अधिक कमरे hotel infrastructure में जोड़े गए हैं और प्रति रात पर्यटक औसतन 5,400 रुपये खर्च करता है। लेकिन ताजमहल को छोड़कर UP का पर्यटन मुख्यतः धार्मिक है, जिसमें विदेशी पर्यटकों का आकर्षण सीमित है। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है, जो विदेशी पर्यटकों की संख्या में पहले नंबर पर है, जहाँ 37 लाख 10 हजार विदेशी आए। मुंबई, अजंता-एलोरा, लोनावला, महाबलेश्वर जैसे डेस्टिनेशन हैं। महाराष्ट्र में बिजनेश tourism भी बड़ा है, लेकिन महाराष्ट्र का पर्यटन कंसंट्रेड है, जबकि राजस्थान का पर्यटन डिस्ट्रीब्यूटेड है, यानी जयपुर से लेकर जैसलमेर, उदयपुर, जोधपुर, अजमेर, पुष्कर, रणथम्भौर तक फैला हुआ है।

तीसरे नंबर पर तमिलनाडु है, जिसमें मंदिर पर्यटन सबसे बड़ा आकर्षण है। तिरुपति बाजाली, मदुरई का मीनाक्षी मंदिर, रामेश्वरम का मंदिर, कन्याकुमारी का विश्व प्रसिद्व मंदिर। यहां समुद्र तट भी हैं, लेकिन तमिलनाडु का पर्यटन मुख्यतः घरेलू है। विदेशी पर्यटकों के लिए राजस्थान की हैरिटेज अपील तमिलनाडु से कहीं ज़्यादा है।

2024 में राजस्थान में 23 करोड़ 21 लाख 56 हजार पर्यटक आए, जिनमें 23 करोड़ घरेलू और 20 लाख 72 हजार विदेशी पर्यटक थे। 2025 में यह संख्या बढ़कर 25 करोड़ 44 लाख हो गई, यानी 10 प्रतिशत की वृद्धि। राजस्थान के पास जो है, वो किसी और राज्य के पास नहीं है। तीन UNESCO World Heritage Sites, जन्तर मन्तर, जयपुर का ऐतिहासिक शहर और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान। 6 बड़े शाही किले, आमेर, मेहरानगढ़, चित्तौड़गढ़, जूनागढ़, रणथम्भौर और कुम्भलगढ़। दुनिया का एकमात्र रेगिस्तानी शहर जैसलमेर, जहाँ से Thar Desert Safari होती है। उदयपुर, जिसे Venice of the East कहा जाता है। पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर, जो दुनिया में अनोखा है। रणथम्भौर और सरिस्का जैसे Tiger Reserves। पुष्कर का Camel Fair, जो विश्व प्रसिद्ध है। Heritage Hotels, जहाँ रात का किराया 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक है। विदेशी पर्यटकों के लिए जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर और अजमेर टॉप डेस्टिनेशन बने हुए हैं, और राजस्थान में Golden Triangle यानी दिल्ली, आगरा, जयपुर का एक हिस्सा होने के कारण लगभग हर विदेशी पर्यटक जो भारत आता है, वो जयपुर ज़रूर आता है।

भारत की GDP में पर्यटन का योगदान 5.22 प्रतिशत है, लेकिन यह सिर्फ direct contribution है। Indirect contribution इससे कहीं ज़्यादा है। जब एक पर्यटक राजस्थान आता है तो वो hotel में रुकता है, जहाँ staff को रोजगार मिलता है। restaurant में खाता है, जहाँ cook से लेकर वेटर तक को काम मिलता है। हैंडिक्राफ्ट खरीदता है, जहाँ कारीगर को आय होती है। taxi करता है, जहाँ driver का परिवार चलता है। ऊँट की सवारी करता है, जहाँ रेगिस्तान के लोगों को रोजगार मिलता है। इस मल्टिप्येर इफेक्ट के कारण पर्यटन का एक रुपया अर्थव्यवस्था में 3 से 4 गुना आय पैदा करता है।

राजस्थान में पर्यटन से डायरेक्ट—इंडडारेक्ट करीब 40 से 50 लाख लोगों को रोजगार मिलता है। होटल उद्योग, taxi उद्योग, हैंडिक्राफ्ट, ऊँट और घोड़ा पालक, गाइड, tour ओपरेटर्स, travel ऐजेंसियां, ये सब राजस्थान के पर्यटन की रीढ़ हैं। राजस्थान में ट्यूरिज्म् डिपार्टमेंट को "सोने की खान" कहा जाता है, और यह महज कहावत नहीं, यह हकीकत है। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के पास पर्यटन विभाग है और राजस्थान पर्यटन नीति 2025 लॉन्च की गई है, जिसने सबकुछ बदलकर रख दिया है, जो विभाग पहले सोने की खान था, वो अब हीरों की खान बन चुका है।

सवाल यह उठता है कि पर्यटन मंत्री के पास क्या होता है? पर्यटन मंत्री के पास होती सरकारी होटलों की चैन, RTDC, जिसके पास पूरे राजस्थान में होटल हैं। Heritage sites पर लीज देने का अधिकार, यानी किसी private company को किला या हवेली लीज पर देना है तो यह काम पर्यटन मंत्री को ही करना होता है। Tourism projects की मंजूरी, जिसमें करोड़ों रुपये होते हैं। Adventure tourism के लाइसेंस, जैसे हॉट एयर बैलून, पैरागलाइडिंग, कैमल सफारी इत्यादि। ट्यूरिज्म फेस्टिवल आयोजन के कॉन्ट्रेक्ट, जैसे पुष्कर मेला, डेजेर्ट फेस्टिवल, तीज फैस्टिवल में स्टॉल्स और इवेंट्स की परमिशन। हैरिटेज होलेल्स को स्टार रैटिंग देने में भूमिका। यानी अगर किसी को जैसलमेर में रिजॉर्ट खोलना है, उदयपुर में हैरिटेज होटेल बनानी है, पुष्कर मेले में बड़ा स्टॉल लगाना है, या राजस्थान के किसी किले में शाम को साउंड and लाइट शॉ का कॉन्ट्रेक्ट चाहिए, तो रास्ता पर्यटन मंत्री के दफ्तर से ही होकर जाता है।

इसीलिए राजस्थान में हर सरकार में पर्यटन विभाग के लिए खींचतान होती है। जब कांग्रेस की सरकार थी तो पर्यटन विभाग गहलोत के विश्वासपात्र के पास था। BJP की सरकार में यह विभाग सबसे महत्वपूर्ण नेता को मिला। राजस्थान पर्यटन नीति 2025 के तहत राज्य को वैश्विक पर्यटन शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा गया है। Digital, धार्मिक और अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि राजस्थान के tourist spots पर infrastructure अभी भी कमज़ोर है। जैसलमेर तक अभी भी highway वर्ल्ड क्लास नहीं है। उदयपुर में parking की समस्या है। अजमेर में दरगाह के आसपास सफाई नहीं है। रणथंभौर में अवैध निर्माण हो रहे हैं जो टाइगर Reserve को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

राजस्थान के जो हैंडिक्राफ्ट के कलाकार हैं, जो ब्लू पॉटरी बनाते हैं, जो बंधेज बनाते हैं, जो मिनिएचर painting करते हैं, उनको पर्यटन का कितना फायदा मिलता है, यह एक बड़ा सवाल है? बड़े hotels और tour operators करोड़ों कमाते हैं और असली कारीगर दिहाड़ी मज़दूर की तरह काम करता है। राजस्थान का पर्यटन अगर सच में विकास का ज़रिया बनना है, तो नीति के कागज़ों से निकलकर उन 40 लाख लोगों तक पहुँचना होगा जो इस उद्योग की रीढ़ हैं। नहीं तो यह सोने की खान पयर्टन मंत्री जैसे कुछ लोगों की तिजोरी भरती रहेगी, और राजस्थान का असली खज़ाना, यानी यहाँ की विरासत, यहाँ के लोग, यहाँ की संस्कृति, धीरे-धीरे खोखली होती जाएगी।

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