Popular

सचिन पालयट बनेंगे राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री, केरलम ने यही तय किया है!


कांग्रेस पार्टी की तरफ से, गांधी परिवार की ओर से सचिन पायलट ही राजस्थान के आगले मुख्यमंत्री होंगे। राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा जैसे आलाकमान की चाहत के खिलाफ भी होगा तो भी सचिन पायलट को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। उनकी पॉपुलरिटी, उनकी मेहनत, उनकी वफादारी और चमत्कारिक चेहरे के आगे गांधी परिवार को झुकना होगा और इस बार अशोक गहलोत के जादू को नेगलेट करके अपने सबसे आकर्षक चेहरे को राजस्थान के सीएम की कुर्सी सौंपी जाएगी। गहलोत अपना जादू चलाने का काम तो करेंगे, लेकिन वो काम नहीं कर पाएंगे, जो सचिन पायलट कर रहे हैं। राजस्थान तीस साल से सत्ता बदलने का रिवाज अपनाकर बैठा है, और इसलिए इस बार कांग्रेस की सत्ता आने की पूरी संभावना है, जिसमें सीएम की कुर्सी सचिन पायलट को मिलने वाली है। 

तो हाल ही में पांच राज्यों के रिजल्ट के बाद कांग्रेस को केरलम राज्य में बहुमत मिला है, जहां कांग्रेस ने वीडी सतीशन को अपना मुख्यमंत्री बनाया है, जबकि यहां पर सबसे ज्यादा विधायकों का सपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ था। बड़ी बात यह है कि यह काम कांग्रेस आलाकमान की मर्जी के खिलाफ जाकर हुआ है। यानी राहुल गांधी, सोनिया गांधी प्रियंका वाड्रा भी चाहती थीं कि अपने वफदार केसी वेणुगोपाल को ही सीएम बनाया जाए, लेकिन वातावरण ऐसा बना कि आलाकमान की मर्जी के खिलाफ वीडी सतीशन को सीएम बनाना पड़ा। वीडी सतीशन पेशे से एक वकील हैं और 2001 से आज दिन तक कभी चुनाव नहीं हारे हैं। पिछली विजयन सरकार के समय ​नेता प्रतिपक्ष थे। लेकिन इन योग्यताओं के अलावा भी एक बड़ी योग्यता उनके पास थी, और वो थी जनता का भरपूर सपोर्ट। दरअसल सतीशन ने चुनाव से पहले घोषणा कर दी थी कि इस बार यदि कम से कम 100 सीटों के सथ यूडीएफ की सरकार ने नहीं बनेगी, तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे। यह चुनौती उनकी जनता के लिए थी, लेकिन सीएम बनने की चुनौती इससे कहीं बढ़ी थी। क्योंकि पिनराई विजयन के खिलाफ एंटी इंकमबेंसी होने के कारण सत्ता तो बदलनी ही थी, लेकिन सत्ता बदलने के बाद सीएम कौन बनेगा, यह तय करना सवैंधानिक रुप से विधायकों को तय करना था, जबकि वास्तव में देखा जाए तो यह काम कांग्रेस आलाकमान का था। यह भी कहा जाता है कि जब वेणुगोपाल का नाम सीएम के लिए फाइनल किया जा चुका था, तब केरलम की जनता ने वायनाड में राहुल गांधी के खिलाफ पोस्टर लगा दिए कि यदि सतीशन को सीएम नहीं बनाया तो वायरनाड भूल जाओ। इसके अलावा मुस्लिम लीग, जो कि कांग्रेस अलाइंस है, उसने भी सतीशन पर वीटो कर दिया था। मुस्लिम लीग के 30 विधायक हैं, और इतने विधायक कम होने पर सरकार बन ही नहीं सकती थी। लगातार 10 दिन ​तक दिल्ली में मंथन किया गया। कई बार सोनिया गांधी से राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, मल्किार्जुन खड़गे और केसी वणुगोपाल ने मुलाकात की। राहुल गांधी ने वेणुगोपाल के साथ बैठकें करी, लेकिन जब केरलम की राजनीति का सच सामने आया तो वेणुगोपाल को पार्टी हित में पीछे हटने को कहा गया। कांग्रेस के सबसे वफादार सिपाही होने के कारण उनसे सीएम की कुर्सी का बलिदान मांगा गया, वेणुगोपाल चाहते तो विधायकों के दम पर सीएम बन सकते थे, लेकिन उन्होंने कांग्रेस आलाकमान की वफादारी के आगे सीएम पद को ठोकर मार दी। 

अब सवाल यह उठता है कि पहली बार कांग्रेस ने ऐसे नेता को सीएम बनाया है, जो जनता की पसंद है, तो कांग्रेस जब किसी दूसरे राज्य में सत्ता पाएगी, तो वहां भी यही फॉर्मूला अपनाया जाएगा, या वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी? राजस्थान और मध्य प्रदेश में इसको लेकर सबसे अधिक चर्चा है। राजस्थान में 30 साल से सत्ता बदलने का रिवाज चल रहा है। ऐसे में कांग्रेसियों का मानना है कि 2028 में कांग्रेस की सत्ता आएगी। यदि कांग्रेस को सत्ता मिलेगी, तो क्या यहां भी केरलम की तरह जनता की पसंद को तहरीज दी जाएगी। राजस्थान में कांग्रेस ने पहले कभी ऐसा नहीं किया। आज से 28 साल पहले जनता ने परसराम मदेरणा को सीएम चुना था, लेकिन सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत को सत्ता सौंपी। इसके बाद 2008 में महिपाल मदेरणा, शीशराम ओला,  सीपी जोशी जैसे नेताओं को सीएम बनाने का मैंडेट मिला था, लेकिन सोनिया गांधी ने दूसरी बार अशोक गहलोत को सीएम पद दिया। जब 2018 में जनता ने सचिन पायलट के चेहरे पर कांग्रेस को वोट दिया, तब तीसरी बार सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत को चुना था, यह बात खुद अशोक गहलोत कई बार कह चुके हैं कि उनको सोनिया गांधी ने तीन तीन बार सीएम बनाया। गहलोत की यह स्वीकारोक्ति बताती है कि जनता की पसंद, विधायकों की पसंद को पीछे छोड़कर कांग्रेस को गांधी परिवार की पसंद ही मुख्यमंत्री बनता है। पिछली बार सचिन पायलट ने जनता के दम पर और विधायकों के दम पर सीएम बनने का सपना देखा था, लेकिन उनको यह पता नहीं था कि कांग्रेस में वही सीएम होता है, जो गांधी परिवार की पसंद होता है। पूर पांच साल तक तमाम प्रयासों के बाद भी सचिन पायलट को सीएम नहीं बनाया गया और जब एक साल पहले बनाने पर विचार किया गया तो अशोक गहलोत ने ही बगावत कर दी। दरअसल, जब तक कांग्रेस के अधिकांश विधायक अशोक गहलोत के साथ थे और यदि सचिन पायलट को सीएम बनाया जाता तो कांग्रेस की सरकार गिर सकती थी। इसलिए कांग्रेस आलाकमान ने अपने कदम पीछे खींच लिए। 

अब पिछले दो—ढाई साल से सचिन पायलट जहां गांधी परिवार के साथ हैं, तो अशोक गहलोत को दिल्ली में खास तवज्जो नहीं मिलने के कारण वो सोशल मीडिया के सहारे जनता की पसंद बनने का प्रयास कर रहे हैं। अशोक गहलोत की टीम उनकी रील्स बनाकर प्रसारित कर रही है, जबकि सचिन पायलट ने इस बार रील्स से निकलकर गांधी परिवार के रीयल करीबी बनने का काम कर रहे हैं, जो कांग्रेस की संस्कृति के हिसाब से शूट करता है। देखा जाए तो सचिन पायलट ने इस बार अशोक गहलोत का मार्ग पकड़ रखा है, जबकि अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के पदचिन्हों पर चलकर चौथी बार सीएम बनने की कोशिशों पर जोर दे रखा है। केरलम की कहानी ने सचिन पायलट और अशोक गहलोत, दोनों को सपना दिखाया है। पायलट को लगता है कि 2028 में भी कांग्रेस की तरफ से वो ही सबसे पॉपुलर चेहरा होंगे, और गहलोत को लगता है कि भले ही गांधी परिवार उनको पहले ​की तरह पसंद नहीं करे, लेकिन सोशल मीडिया के सहारे वो जनता की पसंद बनकर गांधी परिवार को अपने पाले में ले लेंगे। वैसे भी गहलोत की रणनीति इतनी सटीक रहती है कि कांग्रेस को बहुमत में आने से रोक ही देते हैं, जब​कि कांग्रेस में ही उनके करीबी एक दो दर्जन नेताओं को निर्दलीय चुनाव लड़ाकर खुद के लिए जुगाड़ रखते हैं। दूसरी तरफ सचिन पायलट का मानना है कि विधायक कांग्रेस के ही होने चाहिए, निर्दलीय या दूसरे दलों के विधायकों के बिना ही बहुमत की सरकार बननी चाहिए। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस बार भी इतिहास रिपीट होकर कांग्रेस को सत्ता मिलेगी? और क्या गांधी परिवार ने अपने करीबी वेणुगोपाल को रोककर सतीशन को सीएम बनाया है, वैसे ही राजस्थान में भी पॉपुलर चेहरे सचिन पायलट को सीएम बनाया जाएगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post