अशोक ग​हलोत ने सचिन पायलट का कॅरियर चौपट कर दिया!



राजस्थान की राजनीति में आखिरकार वही हुआ, जिसका पिछले साढ़े तीन साल से डर था। लंबे समय से संघर्ष कर रहे सचिन पायलट के सीएम बनने के सभी रास्ते बंद हो गये हैं। यानी पायलट का कॅरियर अशोक गहलोत ने चौपट कर दिया है! 13 जुलाई 2020 में सीएम अशोक गहलोत की जगह सचिन पायलट को सीएम बनाने की मांग को लेकर हुई बगावत के बाद एक महीने तक सरकार अस्थिर रही, आखिर कांग्रेस आलाकामन की दखलअंदाजी के बाद पायलट कैंप ने सरकार को समर्थन दिया और फिर सरकार स्थिर हो गई। 


तब से कांग्रेस के लगातार यह प्रयास चल रहे थे कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच स्थाई सुलह हो जाये। 6 जुलाई तक गहलोत पायलट के बीच 11 बार सुलह की मीटिंग्स हो चुकी हैं। गुरुवार को जब दिल्ली में राजस्थान के टॉप 30 कांग्रेसी नेताओं के साथ आखिरी मीटिंग हुई तो उसके साथ ही सभी तरह की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। 


भले ही सचिन पायलट ने पत्रकारों से बात करते हुए सबकुछ ठीक होने का दावा किया हो, लेकिन कांग्रेस ने जब यह तय किया है कि सीएम किसी को प्रोजेक्ट नहीं किया जायेगा, तब यह बात भी साफ हो गई है कि सत्ता रिपीट होने की स्थिति में वर्तमान सीएम अशोक गहलोत ही अगले सीएम होंगे।


बीते साढ़े तीन साल में यह साफ हो गया है कि अशोक गहलोत से बड़ा कांग्रेस में दूसरा कोई नेता नहीं है। यह बात अभी तक भी प्रुव नहीं है कि अशोक गहलोत के पैरों में चोट लगी है या केवल पॉलिटिकल चौट ही है, किंतु जिस तरह से मंत्रीपरिषद की बैठक के ठीक सुबह ही चौट लगना और वो भी एक साथ दोनों अंगुठों में फ्रेक्चर हो जाना, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह बात खुद अशोक गहलोत ने भी कहा है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी के बिना एक्सीडेंट के पैर के दोनों अंगुठों में फ्रेक्चर हो गया है। 


अशोक गहलोत के बोलने के अंदाज से साफ हो जाता है​ कि उन्होंने किस पर इतना जबरदस्त व्यंग्य किया है? गहलोत के इस कटाक्ष के बाद भी यदि कांग्रेस आलाकमान और सचिन पायलट उनके मन की बात को नहीं समझ पाये तो समझ में आता है कि आखिर किस वजह से दोनों युवा गांधी सचिन पायलट को सीएम नहीं बना पा रहे हैं? 


कहा जाता है कि सोनिया गांधी हमेशा से अशोक गहलोत के पक्ष में रही हैं और आज भी गहलोत पर सबसे अधिक भरोसा करती हैं। यह बात और है कि गांधी परिवार को चलाने वाले सभी पुराने कांग्रेसी अशोक गहलोत के बेहद खास हैं, जो सभी सूचनाएं उनको पहुंचाने का काम करते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि इनको आर्थिक लालन पालन भी अशोक गहलोत ही करते हैं। 


कितनी ही मीटिंग हो जाये, लेकिन सचिन पायलट एक बार फिर गहलोत के सामने राजनीतिक तौर पर कमजोर साबित हो जाते हैं। भले ही गहलोत तीसरी बार सीएम बनकर शासन कर रहे हों, लेकिन अशोक गहलोत की सबसे बड़ी कमजोरी जहां ब्यूरोक्रेसी है, वहीं पॉलिटिक्स सबसे बड़ी मजबूती भी है। 


वह सातों दिन, 24 घंटे राजनीति करने के बाद भी थकते नहीं हैं। उनको राजनीति में जीने का मजा आता है। इस वजह से अशोक गहलोत के सामने लड़ने वाले को राजनीतिक तौर पर उन्हीं की स्टाइल में उनसे अधिक कूटनीतिज्ञ होना जरूरी है। 


अब इस बात को समझ लीजिये कि अशोक गहलोत के चौटिल होने के बाद भी राजस्थान को लेकर इतनी महत्वपूर्ण मीटिंग इतनी जल्दीबाजी में क्यों बुलाई गई? असल बात यह है कि इस बैठक के जल्दी बुलाने के पीछे भी अशोक गहलोत का ही दिमाग है। कहा जाता है कि मीटिंग बुलाने वाले अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की चाबी राहुल गांधी के पास है और राहुल गांधी को राजनीतिक तौर पर चलाने वाले कांग्रेसी नेताओं की चाबी अशोक गहलोत के हाथ में है। 


अब इस बात को स​मझिये की अशोक गहलोत ने जल्दी मीटिंग क्यों बुलाई? आप देख रहे होंगे कि अशोक गहलोत को कुछ महीनों में जब भी दिल्ली बुलाया जाता है, तभी वह बीमार हो जाते हैं। इस बार भी गहलोत को दिल्ली की बैठक में शामिल होने का दबाव था। 


इस बात की भनक अपने खास सूत्रों से अशोक गहलोत को पहले ही लग चुकी थी। इस वजह से पॉलिटिकल फ्रेक्चर हुआ। इस घटना के कारण पहले ही दिन डॉक्टर्स ने बताया कि अशोक गहलोत का उपचार किया गया है और सात दिन बाद जांच करके पता किया जायेगा कि आगे कितने दिनों के आराम की जरुरत होगी?


इसका मतलब सात दिन तक अशोक गहलोत हिलेंगे ही नहीं, यह बात और है कि शारीरिक रूप से हिलना और पॉलिटिकल तौर पर नहीं हिलना अलग अलग चीजें होती हैं। अशोक गहलोत ने साबित कर दिया है कि वह जब चाहेंगे, तभी उनसे कुछ करवाया जा सकता है।


उससे पहले कुछ नहीं करवाया जा सकता, चाहे फिर कांग्रेस आलाकमान हो या गांधी परिवार ही क्यों ना हो। सोशल मीडिया पर लोग लिख भी रहे हैं कि जब पैर में फ्रेक्चर होने के बावजूद घूम घूमकर चुनाव प्रचार कर सकती हैं, तो अशोक गहलोत अंगुठे की चौट ही कैसे रुक सकते हैं?


इधर, अशोक गहलोत सरकार ने महंगाई राहत कैंप के समापन होने के बाद नया प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। अब शुक्रवार से लोगों को एक प्रतियोगिता में भाग लेने का विकल्प दे दिया है। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वालों को प्रतिदिन 2.50 लाख रुपयों से ज्यादा का इनाम दिया जायेगा। आपको केवल महंगाई राहत के कारण राहत पाने वाले किसी से भी फायदा बुलवाने का वीडियो बनाना और आप एक हजार रुपये प्रतिदिन से एक लाख रुपये जीत सकते हैं। 


देशभर में पहली बार ऐसा प्रचार अभियान शुरू किया गया है, जिसका प्रचार खुद जनता करने जा रही है। प्रदेश के लाखों बेरोजागार युवा जो आलकल रील्स बनाकर समय पास कर रहे हैं, वो इस कंपीटीशन में हिस्सा लेकर सरकार का प्रचार करेंगे और पैसे कमाने का जुआ खेलते चले जायेंगे। 


लाखों में से केवल चार जनों को इनाम मिलेगा, बाकी वैसे ही ठगे जायेंगे, जैसे पेपर लीक होने के बाद लाखों युवा खूब मेहनत करने के बाद भी सलेक्शन नहीं होने के कारण ठगे जाते हैं। 


कहा जा रहा है कि गहलोत सरकार का प्रचार डिजाइन कर रहे डिजाइन वाले बॉक्स के बॉक्स में अभी बहुत जादू बाकी है। जादूगर की सरकार में पहली बार इस तरह के विज्ञापन जादू हो रहे हैं। 


इससे पहले सोशल मीडिया इंफ्लूएर्स को भी विज्ञापन देने का ऐलान कर दिया गया है। जिन सोशल मीडिया हैंडलर्स के अधिक फॉलोवर्स हैं, उनको लाखों रुपयों के विज्ञापन दिये जायेंगे। इसमें भी एक बड़ी बात यह है कि चाहे वो मीडिया से हो या नहीं, केवल उसके फॉलोवर्स होने चाहियें। 


ऐसे किसी भी व्यक्ति को विज्ञापन दिये जायेंगे। खास बात यह भी है कि फॉलोवर्स की संख्या से भी अधिक मायने रखती है विभागीय अनुशंषा, जिसकी अनुशंषा विभाग करेगा, उसको ​विज्ञापन मिलेगा।


लेकिन अब आम उस आदमी को भी रोजगार दे दिया गया है, जिसके हाथ में मोबाइल है। यानी जो युवा अब तक पढ़ लिखकर नौकरी मांगने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था, उसको वीडियो बनाकर सट्टे की तरह चलने वाली प्रतियोगिता के रोजगार में लग जायेगा। 


इससे एक तरफ जहां लाखों में से एक व्यक्ति को इनाम मिलेगा, तो सट्टेबाजी की तरह उम्मीद में पैसा खर्च करने वाले युवाओं की तरह अपना पूरा समय वीडियो बनाने और इनाम निकलने की उम्मीद में बैठा रहेगा और सरकार का प्रचार भी फोकट में करता रहेगा।


कहने का मतलब यह है कि लाखों युवाओं को रोजगार दिलाने का वादा करके सत्ता में आये अशोक गहलोत ने प्रदेश के युवाओं को चुनाव तक स्थाई रोजगार दे दिया है। अब आप उस बात पर गौर करिये कि कैसे अशोक गहलोत ने सचिन पायलट के सीएम बनने के सभी रास्ते बंद कर दिये हैं। 


दरअसल, किसी भी राज्य में जब कोई दल सत्ता में होता है, तो वहां पर सीएम फेस की लड़ाई होती ही नहीं है। सीएम चेहरे की लड़ाई केवल विपक्ष में होती है। इस वजह से दिल्ली में यह भी तय हुआ कि कांग्रेस सीएम फेस घोषित नहीं करेगी, मतलब यह कि सचिन पायलट को सीएम फेस आगे करके नहीं लड़ा जायेगा और चुनाव के बाद अशोक गहलोत को ही सीएम बनाया जायेगा। 


वैसे भी आजकल गहलोत और उनके समर्थक मंत्री—विधायक साफ कहते हैं कि अशोक गहलोत ही चौथी बार सीएम बनेंगे। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में अशोक गहलोत के सामने चौथी बार सीएम के नारे भी लगाये गये थे। 


अब समझने वाली बात यह है कि सचिन पायलट क्या करेंगे? क्या राष्ट्रीय महासचिव और सीडब्ल्यूसी सदस्य बनकर पायलट संतुष्ट हो जायेंगे या फिर उनके मन में कुछ और चल रहा है? सही बात तो यह है कि सचिन पायलट अब तक अशोक गहलोत के सामने पराजित ही रहे हैं। 


यदि वह सीएम नहीं बन पाये हैं और आगे भी उनको प्रोजेक्ट नहीं किया जा रहा है, तो पायलट की गहलोत के सामने जीवन की सबसे बड़ी हार होगी। साथ ही अशोक गहलोत का सपना भी पूरा हो जायेगा, जो पालकर बैठे हैं कि जीवनभर पायलट को सीएम नहीं बनने दूंगा। 


अब यह सचिन पायलट के उपर है कि वो कांग्रेस में रहकर अशोक गहलोत के बयानों से बेइज्जत होते रहेंगे या नया रास्ता अपनाकर कांग्रेस को अपने अपमान का जवाब देंगे। माना जा रहा है कि पायलट के द्वारा पार्टी बनाने का समय न्यूनतम होता जा रहा है, इसलिये उनके पास केवल भाजपा का दामन थामने का रास्ता बचा है। 


किंतु फिलहाल इसकी भी संभावना दिखाई नहीं दे रही है। संभवत: पायलट अब विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस में ही रहेंगे, लेकिन पार्टी के सत्ता में आने के बाद फिर सीएम बनने की लड़ाई लड़ेंगे और यदि फिर उनका सीएम नहीं बनाया गया तो लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी तोड़कर भाजपा में जा सकते हैं। हालांकि, पायलट के समर्थक अब बुरी तरह से निराश हो चुके हैं। लोगों के सोशल मीडिया मैसेज से साफतौर पर उनके समर्थकों की मन की भावना समझी जा सकती है।

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