1100 करोड़ की सड़कों में 4-4 फीट कीचड़ भरा है



राजस्थान में चुनाव नजदीक हैं और नेताओं ने अपने क्षेत्र की तरफ दौड़ लगानी शुरू कर दी है। सभी मंत्री और विधायक अपने अपने क्षेत्र में जनता के बीच जन सपंर्क करने में लगे हुए हैं। इस बीच मैंने भी राज्य की विधानसभा सीटों पर ग्राउंड रिपोर्ट शुरू की है। सबसे पहले मैं भरतपुर जिले में पहुंचा, जहां पर 7 विधानसभा सीटें हैं। यहां पर नदबई विधानसभा सीट पर अभी बसपा से जीतने के बाद पलटी मारकर कांग्रेस में शामिल होने वाले जोगेंदर अवाना विधायक हैं। जो​गेंदर आवाना वैसे तो नोएडा के रहने वाले हैं, लेकिन बसपा से टिकट लेकर भरतपुर की नदबई विधानसभा से चुनाव लड़ा था। यहां पर भाजपा की कृष्णेंद्र कोर दीपा लगातार 15 साल विधायक थीं, जिनके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी होने का फायदा अवाना को मिला। दीपा के बारे में स्थानीय जनता का कहना है कि वो किसी से मिलती नहीं थीं, इस वजह से रोष था और उसका फायदा अवाना को मिला।


अवाना वो विधायक हैं, जो जीते तो बसपा के टिकट पर थे, लेकिन राजेंद्र गुढ़ा समेत अपने सभी 6 साथियों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। आपको याद होगा एक बार राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने विधानसभा के भीतर सेमिनार के दौरान कहा था कि उनकी पार्टी बसपा उनको ही टिकट देती है, जो सबसे अधिक पैसे देता है। इस हिसाब से हो सकता है​ कि अवाना ने भी पैसे के दम पर टिकट लिया हो। नदबई विधानसभा सीट पर कुछ महीनों पहले एक मूर्ति प्रकरण हुआ था, जिसमें जोगिंदर अवाना काफी सक्रिय थे। उस दौरान आरोप लगे थे कि अवाना ने फूट डालकर दो समाजों को लड़ाने का काम किया था। उसके कारण अवाना के खिलाफ कई गांवों में बहुत अत्यधिक गुस्सा भरा हुआ है। मैं कई गांवों में घूमा, जहां पर लोगों का कहना है कि अवाना को गांव में घुसने ही नहीं देंगे। उनके खिलाफ विरोध ने आग का रूप धारण कर लिया है।


कुछ महीने पहले एक ओडियो वायरल हुआ था, जिसमें विधायक अवाना ने कहा कि एसडीएम लगाना है, लेकिन जाट नहीं होना चाहिए। यानी जाट समाज से अवाना को बहुत अधिक नफरत है, जबकि इस सीट पर सबसे अधिक करीब 65 हजार वोट अकेले जाट समाज के हैं। इनके उपर जाट और जाटव जातियों में वैमन्स्य डालकर चुनाव जीतना चाहते हैं। आवाना के उपर लोगों के गुस्से का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि बीते पांच साल में वह कई गांवों के जा नहीं पा रहे हैं। जोगिंदर अवाना का दावा है कि उन्होंने नदबई में 1100 करोड़ की सड़कें बनवाई हैं। जयपुर—आगरा राजमार्ग से जब डेरा मोड से होते हुए नदबई की तरफ जाते हैं, तब पता चलता है कि यहां पर कुछ नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सड़क को बनाने वाले ठेकेदार से मोटा पैसा मांगा गया था, जिसके लिए मना कर दिया, इसलिए अवाना खुद ही सड़क नहीं बनने दे रहे हैं। जब मैं गांवों में पहुंचा तो देखा कि गांव के रास्ते बदं पड़े हैं। पानी भरा हुआ है और सड़कों में चार—पांच फिट तक के गड्डे खुदे हुए हैं। कई गांवों में से निकलने के लिए मुझे दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ा। एक दो जगह ऐसी थी, जहां पर ट्रेक्टर से लोग बाहर निकल पाते हैं। करीब आधा दर्जन गांवों में ग्राउंड रिपोर्ट करने के बाद एक दिन नदबई में रिटायर कर्मचारियों का सम्मान करते हुए अवाना मिले। सवालों के जरिए मैंने जनता का दुख दर्द उनको बताने का प्रयास किया। क्योंकि गांवों में जगह जगह लोग आरोप लगाते हैं, इसका एक वीडियो मेरे चैनल पर अपलोड़ हो चुका है और अभी तीन चार वीडियो और अपलोड़ होने हैं, जिनको देखकर आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि लोग आरोप लगा क्यों रहे हैं। लोगों का कहना है कि विधायक जोगेंदर अवाना लोगों से पैसे लेकर ट्रांसफर करते हैं। ना केवल ट्रांसफर करते हैं, बल्कि ट्रांसफर रद्द करवाने के लिए भी भी ढाई—तीन लाख रुपये लेते हैं। 


जमीनी हकिकत जानने के दौरान नदबई विधानसभा क्षेत्र में मुझे कई सरकारी शिक्षक मिले, जो ट्रांसफर के इस दर्द को दबाए बैठै हैं। विधायक अवाना का डर इतना है कि कोई शिक्षक कैमरे के सामने बोल नहीं पाते हैं, लेकिन कैमरे के पीछे अपना दर्द सुनाते हुए रोने तक लग जाते हैं। विधायक और उनके लोगों द्वारा तीन—तीन लाख रुपये लेकर भी तबादला नहीं करने के आरोप आम हैं। कुछ लोगों के आरोप हैं कि उनसे पैसे लेने के लिए बेवजह दूर ट्रांसफर किए गए, जो कोर्ट से स्टे लेकर वापस बैठै हैं। 


जब मैंने खुद विधायक अवाना से पैसे लेकर ट्रांसफर करने का सवाल पूछा तो मुझ पर उलटा भड़क गए और मुझे ही भला बुरा कहने लगे, जबकि आरोप परेशान, दुखी, पीड़ित जनता के हैं, जनता अवाना के भ्रष्टाचार से त्रस्त है, सब लोग चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। जोगिंदर अवाना ने मुझपर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सवाल उनसे क्यों पूछा गया, मुकदमा करने की धमकी तक दे डाली। साथ में उनके लोगों द्वारा मारपीट करने की धमकी दी गई। कार्यक्रम के दौरान अवाना के पाले हुए गुंड़ों ने कैमरे के पीछे गुंडागर्दी की और मारपीट करने पर उतारू हो गए, जबकि स्थानीय जनता ने बताया कि समाज को बांटने के लिए खुलकर जातिवाद करते हैं, क्षेत्र में सड़कें है नहीं, और शिक्षकों के ट्रांसफर में सैकडों लोगों से पैसे लेकर लौटाए नहीं जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर अवाना की खुली गुंडागर्दी का आलम यह है कि पत्रकार के रूप में सवाल पूछने पर मुझपर ही भड़क उठे। उनको यह भी पता नहीं है कि एक पत्रकार का काम केवल सवाल पूछना है, सवाल वो जो जनता आरोप लगा रही है। जनता की सुध लेने, उनका दर्द जानने, क्षेत्र में काम कराने पर जोगेंदर अवाना का बिलकुल ध्यान नहीं है, जबकि जाति के आधार पर लोगों को बांट रखा है, सड़कों की बदहाल हालत आप देख ​लीजिए, जिनके लिए कह रहे हैं कि 1100 करोड़ की सड़कें बनाई हैं, बल्कि जब पत्रकार जमीनी सच्चाई को देखकर उनसे सवाल पूछते हैं, तो उनके पाले हुए गुंड़े मारपीट करने की धमकी देते हैं, खुद जोगेंदर अवाना मुकदमा करने की धमकी देते हैं, केवल सवाल पूछने पर मुकदमा करने की धमकी देते हुए झल्ला जाते हैं। 


ये लोग जब एक पत्रकार को प्रश्न पूछने पर ही मुकदमा करने और मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं, तो आप अंदाजा लगा लीजिए कि आमजन के साथ इनका क्या बर्ताव होता होगा? मोटे तौर पर देखें तो गांव—गांव में घूमकर जनता के मिलने पर बाद यह दावा किया जा सकता है कि इस बार जनता का मूड बिलकुल भी जोगेंदर अवाना के पक्ष में दिखाई नहीं देता है, हर आदमी इनके भ्रष्टाचार से दुखी है, ट्रांसफर उद्योग से त्रस्त है, जातिवादी करने से परेशान है, विकास के नाम पर पैसे की बंदरबाट के कारण नदबई काफी पीछे चला गया है। वैसे मैं यह कहूं कि जोगेंदर अवाना वही कर रहे हैं, जो कांग्रेस के मूल चरित्र में तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। पिछले दिनों कांग्रेस समेत सहयोगी दलों ने टीवी मीडिया से जुड़े 14 बड़े पत्रकारों की एक सूची जारी की थी, जिसमें उनका बॉयकाट करने को कहा गया है। आप सहज ही समझ सकते हैं कि सवाल पूछना केवल अवाना जैसे विधायकों को बुरा नहीं लगता है, बल्कि उपर तक यही आलम है। उससे पहले इमरजेंसी के दौरान भी पत्रकारों पर सेंसरशिप लगा दी गई थी। इसलिए यह कहा जाए कि सवाल पूछने वाले पत्रकारों को जेल में डाल देना, उनको बैन कर देना, उनका बहिष्कार करना और मुकदमे लगाने के लिए मारपीट करना भी इनका मूल चरित्र है, तो गलत नहीं होगा। इससे समझ यह भी आता है कि जोगेंदर अवाना ने इस परिपाटी को आगे बढ़ाने का काम किया है। 


रही बात जोगेंदर अवाना की मुझे धमकी देने की, तो मैं जो​गेंदर अवाना और उनके गुंडे तत्वों को पूरी शिद्दत से चुनौती देता हूं कि मेरे खिलाफ मुकदमा करें, मारपीट करके दिखाएं, हाथ उठाना तो बहुत दूर की बात है, इसके बारे में नजदीक आकर भी दिखाएं। मैं खुलेआम जोगिंदर अवाना को फिर चुनौती देते हुए आमंत्रित करता हूं कि जाएं कोर्ट और करें मेरे खिलाफ मुकदमा और जो गुंडे धमकी देते हैं, उनको भेजें मारपीट करने के लिए। जोगिंदर अवाना, आपने देखे होंगे कोई खरीदे हुए पीआर वाले, कभी सच्चे पत्रकारों से पाला नहीं पड़ा होगा आपका। नदबई विधानसभा क्षेत्र में उनके ही कार्यक्रम में मैंने जोगिंदर अवाना और उनके गुंडों के बीच में पूरी ईमानदारी निडर होकर सवाल पूछे हैं, किसी का डर ना तो पहले था और ना आगे होगा। एक और चुनौती मैं जोगिंदर अवाना को समय देना चाहता हूं। यदि विधायक जोगेंदर अवाना में हिम्मत है तो निष्पक्ष जगह पर दें मेरे को इंटरव्यू, जहां उनके पाले हुए गुंडे ना हों, जहां बीच में बोलने वाला कोई नहीं हो। मैं उनके​ विधानसभा में हुए कार्यों और जनता के आरोपों के आधार पर उनका मुंह बंद कर दूंंगा, उनकी हिम्मत नहीं जो मेरे सवालों के जवाब दे पाएं। यदि मेरे सवालों के जवाब दे पाएं तो मुझे कहें, और यदि नहीं दे सकते तो मान लूंगा कि क्षेत्र की जनता जो भ्रष्टाचार, ट्रांसफर के पैसे लेने और जातिवाद करने के आरोप लगा रही है, वो सभी आरोप सच हैं। 


आखिर में इतना ही कहना चाहूंगा कि नदबई विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं, जनता के गुस्से, भ्रष्टाचार, विकसित हो चुके ट्रांसफर उद्योग और जो​गेंदर अवाना के पाले हुए गुंडों की गुंडागर्दी के कारण यदि कांग्रेस ने अवाना को टिकट दिया तो 100 प्रतिशत हारेंगे, कोई उनकी हार को रोक नहीं सकता। उनको बोरी बिस्तर बांधकर घर बैठना होगा। हालात यहां तक खराब हैं कि खुद कांग्रेस के कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भी जोगिंदर अवाना के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी से त्रस्त हैं, पार्टी में गुटबाजी होने के कारण इन सच्चे कार्यकर्ताओं की सुनवाई ही नहीं हो रही है। 

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