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सचिन पायलट के बाद किरोड़ी-बेनीवाल से भिड़ गए अशोक गहलोत!

अशोक गहलोत, किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल के बीच सियासी तकरार ने राजस्थान की राजनीति को फिर से गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में बयान दिया कि उनकी सरकार को गिराने की कोशिशें किरोड़ी लाल मीणा और हनुमान बेनीवाल ने मिलकर की थीं। उन्होंने कहा कि 2020 के मानेसर प्रकरण में साजिशें रची गई थीं और उनकी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास हुआ था। 

हालांकि तब सचिन पायलट कैंप के विधायक बगावत कर मानेसर चले गए थे और गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों को जयपुर और जैसलमेर के होटलों में 34 दिन तक रखा था। कांग्रेस आलाकमान की मध्यस्थता के बाद पायलट और उनके साथी विधायक वापस लौटे और सरकार बची। लेकिन गहलोत का ताजा आरोप यह संकेत दे रहा है कि वह इस पूरे प्रकरण के पीछे बाहरी हाथों को भी जिम्मेदार मानते हैं।

इस बयान पर हनुमान बेनीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि, “अशोक गहलोत जी, 2018 विधानसभा चुनाव के बाद जब सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री बनने के लिए मुझसे समर्थन मांगा था, तब मैंने बिना शर्त सचिन पायलट को सीएम बनाने के लिए अपनी पार्टी के तीन विधायकों का समर्थन देने की पेशकश की थी। लेकिन मानेसर प्रकरण कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह का नतीजा था। वहां आपसी खींचतान के कारण ही यह संकट पैदा हुआ। मेरी भूमिका हमेशा जनभावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट और सार्वजनिक रही। गहलोत जी को स्मरण दिलाना चाहता हूं कि राजस्थान के इतिहास में यह दर्ज रहेगा कि जिनके शासन में युवाओं के सपनों के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ हुआ, वो कालखंड आपका था। पेपर लीक के मामलों में आपके नजदीकी नेताओं और सीएमओ तक पर सवाल उठे, लेकिन आपने चुप्पी साधी। बेरोजगार युवाओं का भविष्य आपके संरक्षण में बैठे दलालों ने बर्बाद कर दिया। आपने अपने ही मंत्रियों और विधायकों को होटल में नजरबंद रखा और वहीं से सरकार चलाई। अपराध और पेपर लीक में राजस्थान नंबर एक बन गया। ऐसे में आपको किसी और पर आरोप लगाने का नैतिक अधिकार ही नहीं है।”

हनुमान बेनीवाल ने गहलोत सरकार पर तीखा हमला जारी रखते हुए यह भी लिखा कि, “गहलोत जी ने 15 साल तक आलाकमान की परिक्रमा करके जनता को ठगा। आपकी सरकार ने युवाओं के सपनों को तोड़ा, किसानों की आवाज को दबाया और भ्रष्टाचार को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया। आप अपने ही मंत्रिमंडल में सामंजस्य नहीं बैठा पाए, यही कारण था कि आपको होटल से सरकार चलानी पड़ी।”

इधर, भाजपा के कद्दावर नेता और मौजूदा मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने भी गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा, “आदरणीय श्री अशोक गहलोत जी का आरोप है कि मैं उनकी सरकार गिराने में लगा था, लेकिन सच्चाई यह है कि इसके सूत्रधार वे खुद थे। दूसरों के हक पर डाका डालने की वजह से ही बगावत हुई। उन्होंने कुर्सी तो बचा ली, लेकिन जनता की नजरों में सरकार गिर गई थी। युवाओं की मेहनत और सपनों का सौदा नकल माफिया से किया गया। मैंने कई बार सबूत दिए लेकिन कार्रवाई करने की बजाय दोषियों को संरक्षण मिला। आपकी सरकार जनता की नजरों में उसी दिन गिर गई जब आपने भ्रष्टाचार को सरकारी संस्कार बना दिया। मंत्री, अधिकारी और विधायकों ने आपके संरक्षण में राजस्थान को लूटने के रिकॉर्ड तोड़ दिए। यही कारण है कि जनता ने मौका मिलते ही हिसाब चुकता किया और आपको विपक्ष में बिठा दिया।”

इन बयानों से स्पष्ट है कि राजस्थान की राजनीति में पुराने घाव अब भी हरे हैं। गहलोत का यह बयान न सिर्फ कांग्रेस की अंदरूनी कलह को याद दिलाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वह अपने शासनकाल की अस्थिरता के लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं। वहीं बेनीवाल और मीणा इस मौके को गहलोत की नाकामियों को गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। पेपर लीक, भ्रष्टाचार और युवाओं के मुद्दे इन दोनों नेताओं के हमलों का मुख्य आधार हैं।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि गहलोत का यह बयान कांग्रेस के भीतर पायलट खेमे को घेरने के साथ-साथ विपक्षी नेताओं को भी कठघरे में खड़ा करने की कोशिश है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि भाजपा और आरएलपी इस बहाने गहलोत सरकार के पूरे कार्यकाल को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, क्योंकि कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं फिर से जोर पकड़ सकती हैं और विपक्ष इस अवसर को अपने हित में भुनाने की कोशिश करेगा।

राजस्थान की राजनीति का यह अध्याय दिखाता है कि सत्ता की कुर्सी के लिए कैसे साजिश, बगावत, होटल पॉलिटिक्स और आरोप-प्रत्यारोप आम हो गए हैं। जनता के असली मुद्दे — शिक्षा, रोजगार, किसान और भ्रष्टाचार — इन सियासी खींचातानी में कहीं पीछे छूट गए हैं। लेकिन चुनावों के मौसम में यही मुद्दे सबसे ज्यादा उछाले जाते हैं और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति फिर से चरम पर पहुंच जाती है।

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