नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की सभी मांगों को बुधवार सुबह 5 बजे मान ली गईं। रातभर पुष्कर घाटी के पास अपने हजारों समर्थकों के साथ धरने पर बैठे रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने किसानों की कई मांगों को लेकर मंगलवार को जयपुर कूच किया था।
वार्ता से पहले बेनीवाल ने दो टूक कहा कि वह सत्ता या पद की नहीं बल्कि मुद्दों की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने मेड़ता और रियां क्षेत्र के किसानों को पिछले साल का बकाया मुआवजा बाजार दर पर देने, गलत तरीके से आवंटित की गई 14 हजार बीघा गोचर भूमि के मामले में दोषियों पर कार्रवाई, नागौर में बजरी माफियाओं के खिलाफ ड्रोन सर्वे और मैनुअल जांच के जरिए सख्त एक्शन तथा भारी जुर्माना लगाने की मांग रखी। इसके साथ ही डेगाना के एसडीएम, डीएसपी और नागौर के माइनिंग इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए तत्काल निलंबन की मांग की। बेनीवाल ने चेतावनी दी कि यदि बाड़ी घाटी में वार्ता विफल होती है तो वे निश्चित रूप से जयपुर कूच करेंगे।
इससे पहले दिन में बेनीवाल रियांबड़ी में आठ दिनों से चल रहे किसानों के आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने प्रशासन को शाम चार बजे तक किसानों की मांगें मानने का अल्टीमेटम दिया था। समय पर सुनवाई नहीं होने पर वे अपने समर्थकों के साथ 11 किलोमीटर दूर नागौर-अजमेर हाईवे की ओर रवाना हो गए। प्रशासन ने पादुकलां में पहले से ही बेरिकेडिंग कर रखी थी और भारी पुलिस जाब्ता तैनात था। स्थिति को देखते हुए बेनीवाल का काफिला जयपुर की दिशा में मुड़ गया।
रैली से पहले बेनीवाल ने युवाओं और समर्थकों को अनुशासन बनाए रखने की हिदायत भी दी। उन्होंने कहा कि कोई भी उनके आगे निकलने की कोशिश न करे, बुजुर्ग पीछे और युवा आगे चलें। उन्होंने अधिकारियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कलेक्टर और अधिकारी कमरों में छिपे हुए हैं और घबराहट में बार-बार बाहर जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने बजरी माफिया का इलाज कर दिया था, लेकिन जनता ने आरएलपी का इलाज कर दिया और वोट नहीं दिया। अगर समय रहते समर्थन मिला होता और उनके पास पांच, सात या दस विधायक होते तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा या राज्यपाल के अभिभाषण की ऐसी हिम्मत नहीं होती, जिसे वे पहले भी कई बार फाड़ चुके हैं।
सरकार के आग्रह पर बेनीवाल नागौर-अजमेर जिले की सीमा पर स्थित बाड़ी घाटी में करीब तीन घंटे तक रुके रहे। पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक दिलीप चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सरकार की ओर से आए जिला कलेक्टर और एसपी से विस्तृत बातचीत की, लेकिन कुछ बिंदुओं पर प्रशासन की असहमति बनी रही। बेनीवाल ने मौके पर मौजूद समर्थकों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि सभी बिंदुओं पर सकारात्मक सहमति बने और आगे की बातचीत के परिणाम से उन्हें अवगत कराया जाएगा।
बाड़ी घाटी स्थित अटल सेवा केंद्र में बंद कमरे में प्रशासनिक अधिकारियों और बेनीवाल के प्रतिनिधिमंडल के बीच वार्ता जारी रही। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कमरे के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन की ओर से कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित, एसपी मृदुल कच्छावा और रियांबड़ी एसडीएम सूर्यकांत शर्मा मौजूद रहे, जबकि बेनीवाल की ओर से गिरधारी लाल भाटी, पूर्व विधायक इंदिरा बावरी, चेनाराम, सुरेंद्र बेड़ा और हरसूख चौधरी शामिल हुए। अधिकारियों ने बेनीवाल को दूसरे होटल में वार्ता के लिए बुलाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फिर इनकार कर दिया और दोहराया कि अधिकारी चाहें तो यहीं आकर बातचीत करें। देर रात तक चलती रही इस सियासी खींचतान ने साफ कर दिया कि किसान आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।


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