राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शनिवार को एसआई भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द कर दिया। 859 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में 15 से 20 लाख रुपये में पेपर बेचे गए, यानी पेपर खरीदने के लिए करोड़ों का लेनदेन हुआ और पकड़े गए RPSC के एक सदस्य ने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने अपने परिजनों को नकल कराई थी, यानी परीक्षा से पहले ही पेपर लीक कर दिया था।
कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर RPSC की साख को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरपीएससी को भंग करने मांग युवाओं में एक बार फिर उठने लगी है। हालांकि, विपक्ष मौन साधकर सरकार के साथ खड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि जो भाजपा विपक्ष में बैठकर इस संस्था को भंग करने की मांग करती थी, वो सत्ता में आते ही चुप क्यों हो गई? भाजपा के सत्ता मिलते ही वो आवाज कहां गई, जो विपक्ष में रहते दबंगता आरपीएससी भंग करने का दम भरा करती थी।
अब कोर्ट का इतना बड़ा डिसीजन आया है तो सरकार भी आरपीएससी को भंग करने पर विचार कर रही होगी। इन चीजों को आगे विस्तार से समझेंगे, लेकिन अभी आगे बढ़ने से पहले आइए एक बार शॉर्ट में ही RPSC को समझते हैं। आरपीएससी का गठन 16 अगस्त 1949 को एक अध्यादेश जारी करके हुआ। संविधान के भाग-14 में आर्टिकल 315 से 323 तक राज्य लोक सेवा आयोग की संरचना, कार्यकाल, सेवा शर्तें और शक्तियों के बारे में प्रावधान दिया गया है। RPSC के चैयरमेन और मैम्बर्स का अपॉइंटमेंट राज्यपाल द्वारा किया जाता है, लेकिन उन्हें पद से हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को है।
एक सदस्य छह साल की अवधि या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद पर रह सकता है। कमीशन के आधे सदस्यों को भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम 10 वर्ष काम करने का अनुभव होना कंप्लसरी है। संविधान में सदस्यों की संख्या और योग्यता का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, ये सब राज्यपाल के विवेक पर छोड़ा गया है। अधिकारिक रूप से वर्तमान में RPSC में 1 अध्यक्ष और 10 सदस्य हैं। बाबूलाल कटारा पेपर लीक करके जेल में है, मंजू शर्मा और संगीता आर्य ने एकलपीठ के फैसले के बाद इस्तीफा दिया था और जसवंत राठी का निधन होने के कारण चैयरमेन समेत कुल 7 मैम्बर ही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार RPSC भंग कर सकती है? राजस्थान सरकार को आरपीएससी भंग करने का अधिकार नहीं है। RPSC एक संवैधानिक संस्था है, इसके चैयरमेन या किसी मैम्बर को केवल भारत के राष्ट्रपति के आदेश से ही पद से हटाया जा सकता है। संविधान के आर्टिकल 317(2) के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की जाँच के दौरान राज्यपाल द्वारा आरोपी अध्यक्ष या सदस्य को निलम्बित किया जा सकता है। यानी राज्य सरकार सीधे RPSC भंग नहीं कर सकती, इसके लिए संविधान संशोधन या केंद्र सरकार की भूमिका ज़रूरी होगी।
अब सवाल यह उठता है कि फिर विपक्ष में रहते भाजपा ने यह वादा क्यों किया था? सत्ता से बाहर रहते भाजपा ने बड़े जोर-शोर से कहा था कि सत्ता में आते ही RPSC भंग करेंगे और 17 भर्ती परीक्षाओं की जांच CBI से करवाएंगे। यही डिमांड कांग्रेस के भीतर से सचिन पायलट ने की थी। चार महीने जयपुर में धरना देकर हनुमान बेनीवाल ने भी आरपीएससी भंग कर नई संस्था गठन की मांग की थी। सांसद रहते किरोड़ीलाल मीणा ने भी यही मांग दोहराई थी। इसलिए तब जनता ने मान लिया था कि भाजपा सत्ता में आते ही इस बार आरपीएससी में बदलाव होगा।
बड़े-बड़े वादे कर दिसंबर 2023 में भाजपा सत्ता में आई। भाजपा सरकार बने 29 महीने बीते चुके हैं, लेकिन RPSC ज्यों की त्यों खड़ी है। 17 भर्तियों की CBI जांच का कोई नाम-निशान नहीं। विपक्ष में होने के बावजूद सचिन पायलट अब राजस्थान में कोई मुद्दा नहीं उठाते, शायद बड़े नेता राहुल गांधी के साथ दिल्ली की राजनीति में व्यस्त हैं। किरोड़ीलाल मीणा अब मंत्री हैं, उन्हें सत्ता का स्वाद मिल गया है तो RPSC को भूल चुके हैं। हनुमान बेनीवाल अकेले आज भी RPSC भंग करने और UPSC की तर्ज पर नई पारदर्शी संस्था बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
यही राजस्थान की राजनीति का सबसे बड़ा दोगलापन है। जो मांग विपक्ष में होती है, वो सत्ता में आते ही गायब हो जाती है। भाजपा ने RPSC भंग करने का वादा किया था, लेकिन अब वही RPSC राजा हरिश्चंद्र का महल बनकर उनके ही शासन में भी काम कर रही है, उन्हीं पुराने ढर्रे पर काम कर रही है, परीक्षाएं करवा रही है और भर्ती कर रही है।
अब असली सवाल यह है कि क्या RPSC की जगह नई पारदर्शी संस्था बन सकती है? UPSC की तरह काम करने वाली कोई संस्था राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा बनाई जा सकती है? तकनीकी रूप से इसका जवाब हां है। राज्य सरकार RPSC के ढांचे में बदलाव के लिए विधानसभा में कानून ला सकती है। सदस्यों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सकती है, जैसे लोकायुक्त की तर्ज पर एक स्वतंत्र समिति का गठन हो जो राज्यपाल को नाम recommend करे। परीक्षाओं का डिजिटलीकरण और real-time monitoring हो तो काफी कुछ बदल सकता है। लेकिन यह सब करने की इच्छाशक्ति चाहिए, जो विपक्ष में खूब दिखती है और सत्ता में आते ही हर पार्टी की लापता हो जाती है।
SI भर्ती 2021 के रद्द होने से राजस्थान के हज़ारों युवाओं का सपना एक बार फिर टूटा है, जिन्होंने सालों मेहनत की, लाखों रुपये कोचिंग पर खर्च किए, उनको कोई जवाब देने वाला नहीं है। RPSC में जिस सदस्य बाबूलाल कटारा ने घपले की बात मानी, उसके खिलाफ जेल जाने के अलावा क्या कार्रवाई हुई? भाजपा सरकार के पास इन सवालों का जवाब नहीं है। राजस्थान की जनता यह जानना चाहती है कि क्या RPSC का सुधार होगा या यह संस्था भ्रष्टाचार की पाठशाला बनी रहेगी। भाजपा के पास आज सत्ता है, केंद्र में भी भाजपा की ही मोदी सरकार है, अगर सही नीयत होती तो अब तक रास्ता निकल जाता, लेकिन जब वादे चुनाव जीतने के लिए होते हैं, सुधार के लिए नहीं तो RPSC जैसी संस्थाएं यूं ही खड़ी रहती हैं और सरेआम, बहुत ही बेशर्मी से युवाओं के सपने तोड़ती रहती रहती हैं।

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