राजस्थान के हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एसआई भर्ती-2021 को रद्द करने वाले एकलपीठ के आदेश को अंततः बरकरार रखा है। इसी के साथ इस विवादित भर्ती का पाँच साल पुराना दर्दनाक सफर एक अहम मोड़ पर आ पहुँचा है।
पेपर लीक से शुरू हुई थी कहानी
13 से 15 सितंबर 2021 के बीच आयोजित राजस्थान पुलिस SI भर्ती परीक्षा पर पेपर लीक और धांधली के गंभीर आरोप लगे थे। इस भर्ती के तहत 859 पदों पर चयन हुआ था। जाँच में सामने आया कि भर्ती में पेपर लीक और धोखाधड़ी में RPSC के छह सदस्यों की गहरी संलिप्तता थी। तत्कालीन RPSC चेयरमैन के आवास पर बाबूलाल कटारा के दौरे का जिक्र करते हुए कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात भी कोर्ट में आई।
एकलपीठ ने भर्ती को बताया ‘गैरकानूनी’
28 अगस्त 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2021 SI भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पेपर लीक घोटाले से इतनी गहराई तक दूषित हो चुकी थी कि निष्पक्ष चयन संभव ही नहीं था। एकलपीठ ने RPSC को भर्ती रद्द करने के साथ ही इन पदों को 2025 की भर्ती में शामिल करने के आदेश भी दिए थे।
चयनित अभ्यर्थी गए डिवीजन बेंच
एकलपीठ के इस फैसले से चयनित अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया। चयनित अभ्यर्थी विक्रम पंवार और अन्य ने डिवीजन बेंच में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि भर्ती रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी और चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति प्राप्त की। अभ्यर्थियों की दलील थी कि कुछ लोगों की गलती की सजा पूरी भर्ती को नहीं दी जा सकती।
डिवीजन बेंच ने जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई कर एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। चयनित सब-इंस्पेक्टर ट्रेनिंग तो जारी रख सकते थे, लेकिन उन्हें फील्ड पोस्टिंग देने पर रोक रही।
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा डिवीजन बेंच का अंतरिम आदेश
जब डिवीजन बेंच ने एकलपीठ के फैसले पर रोक लगाई तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की डबल बेंच के अंतरिम आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि ट्रेनिंग कर रहे चयनित अभ्यर्थी न तो ट्रेनिंग जारी रख पाएंगे और न ही उन्हें फिलहाल फील्ड पोस्टिंग दी जाएगी। सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट की डबल बेंच को तीन महीने के भीतर मामले का अंतिम फैसला सुनाने का सख्त निर्देश दिया।
31 मार्च की डेडलाइन भी चूकी, अब नई परीक्षा के बीच उलझा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि SI और प्लाटून कमांडर परीक्षा से जुड़े हाईकोर्ट के लंबित मामलों का निपटारा 31 मार्च 2026 तक कर दिया जाए। लेकिन निर्धारित समयसीमा तक इन मामलों का निपटारा नहीं हो सका और इस बीच 5 अप्रैल को नई भर्ती परीक्षा आयोजित करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।
इसी के चलते अभ्यर्थी सूरजमल मीणा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर परीक्षा को कम से कम चार सप्ताह स्थगित करने की मांग की। 2 अप्रैल को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने 2021 भर्ती में शामिल सभी अभ्यर्थियों को नई SI परीक्षा-2025 में अस्थायी रूप से शामिल होने की मंजूरी दे दी, साथ ही स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही आदेश संशोधित किया
3 अप्रैल को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने 2 अप्रैल के आदेश में संशोधन किया और स्पष्ट किया कि राहत केवल याचिकाकर्ता सूरजमल मीणा तक सीमित रहेगी। इस संशोधन के बाद करीब 95,400 उम्मीदवार इस राहत के दायरे से बाहर हो गए। राजस्थान सरकार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले केवल 713 अभ्यर्थियों को पहले ही एडमिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
राजस्थान SI और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2025, 5 और 6 अप्रैल 2026 को निर्धारित समय पर आयोजित की जाएगी और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा।
अब क्या होगा?
डिवीजन बेंच का अंतिम फैसला अब एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखते हुए आ चुका है। इसका सीधा मतलब है कि SI भर्ती-2021 विधिक रूप से रद्द मानी जाएगी। इन अभ्यर्थियों का अंतिम परिणाम तब तक घोषित नहीं किया जाएगा जब तक राजस्थान हाईकोर्ट संबंधित मामलों पर अंतिम निर्णय नहीं सुना देता। पेपर लीक में शामिल दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे अलग से चलते रहेंगे। यह मामला राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
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