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NEET Paper Leak 2026: शिक्षा मंत्री बर्खास्त, एनटीए डायरेक्टर जेल में!


बीस-बाईस साल की उम्र में जब एक बच्चा तीन साल रात को जागकर, खाना-पानी भूलकर, रिश्ते-नाते छोड़कर सिर्फ एक सपने के लिए पढ़ता है, डॉक्टर बनने का सपना, और फिर परीक्षा के 9 दिन बाद सरकार कहती है कि “परीक्षा रद्द” कर दी गई है, तो यह सिर्फ एक सरकारी नोटिफिकेशन नहीं होता, यह उस बच्चे की रीढ़ तोड़ने का सरकारी फरमान होता है, जो दिन और रात में फर्क करना भूल जाता है, और यह इस बार पहली दफा नहीं हुआ। नीट यूजी पेपर 2024 में भी लीक हुआ था। अब 2026 में फिर से लीक हो गया। देश की टॉप क्लास एजेंसी द्वारा करवाया गया NEET का पर्चा फिर लीक हो गया, 22 लाख, 70 हजार बच्चों का भविष्य फिर दांव पर लग गया, और सिस्टम एक बार फिर अपनी नाकामी की कहानी दोहरा रहा है। दो साल पहले की तरह फिर से जांच सीबीआई को सौंप दी गई है।

दरअसल, 3 मई 2026 को NEET-UG 2026 की परीक्षा हुई। देश के 551 शहरों में, 5,400 से ज़्यादा केंद्रों पर, 22 लाख 70 हज़ार से अधिक छात्र बैठे। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चली, पेन-पेपर मोड में, यानी पूरी तरह से ओफलाइन हुई। लेकिन एक्जाम शुरू होने के 42 घंटे पहले ही, यानी 1 मई की रात को ही एक “गेस पेपर” वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर वायरल हो चुका था, जिसमें 410 सवाल थे और उनमें से करीब 120 सवाल असल NEET पर्चे के बायोलॉजी और केमिस्ट्री सेक्शन से हू-ब-हू मेल खाते थे। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप, यानी SOG ने जब यह जाल खींचा, तो धागा चूरू के एक MBBS स्टूडेंट तक पहुँचा, जो केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है। उसने यह मेटेरियल 1 मई को सीकर में एक दोस्त को भेजा। वहाँ से यह PG हॉस्टल्स में, कोचिंग ग्रुप्स में, करियर काउंसलर्स के ज़रिए और सोशल मीडिया पर “forwarded many times” के टैग के साथ हज़ारों छात्रों तक फैल गया।

महाराष्ट्र के लातूर में एक निजी कोचिंग संस्थान ने परीक्षा से पहले एक मॉक टेस्ट करवाया, जिसमें 42 सवाल असल NEET पर्चे से मिलते थे। वहाँ एक अभिभावक ने लातूर SP दफ्तर में शिकायत दर्ज करवाई। SP अमोल तांबे ने तत्काल जाँच के आदेश दिए। इधर, राजस्थान SOG ने देहरादून, सीकर, झुंझुनूं से 15 सस्पेक्टेड को हिरासत में लिया। सीकर के करियर काउंसलर राकेश कुमार समेत 5 लोगों को 7 मई को गिरफ्तार किया गया, अगले दिन 4 कई और NEET एस्पिरेंट्स पकड़े गए। जयपुर से कथित मास्टरमाइंड मनीष को दबोचा गया। नासिक से महाराष्ट्र पुलिस ने राजस्थान पुलिस के अनुरोध पर शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया, और 12 मई को सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत के बाद CBI को पूरा मामला सौंप दिया।

CBI ने 24 घंटे के भीतर भारतीय न्याय संहिता की आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और विश्वासघात की धाराओं के तहत, साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और 2024 के Public Examinations Act के तहत FIR दर्ज की। इसके बाद सीबीआई की 12 ठिकानों पर छापेमारी हुई, 5 लोग गिरफ्तार हुए और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ होने की बात CBI खुद कह रही है। सीबीआई की एंट्री के साथ ही 12 मई को NTA ने पूरी NEET-UG परीक्षा रद्द कर वो काम किया, जो उसने अपने पूरे इतिहास में कभी नहीं किया था। एनटीए के इस एक फैसले से 22 लाख, 70 हजार से ज़्यादा बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया।

ऐसा नहीं है कि नीट पेपर पहली बार लीक हुआ है। ज़रा 2024 का जख्म भी याद कीजि, जब भी NEET का पर्चा लीक हुआ था। 5 मई 2024 को परीक्षा के दिन सुबह, पटना और हज़ारीबाग से पेपर लीक हुआ। तब भी CBI की जाँच में सामने आया था कि 155 छात्रों ने सीधे इस लीक का फायदा उठाया। कुछ छात्रों ने 30 से 50 लाख रुपये देकर पर्चा खरीदा था। AIIMS पटना, RIMS रांची और भरतपुर के मेडिकल कॉलेजों के MBBS छात्र इस धंधे में सॉल्वर बनकर काम कर रहे थे। देशभर में छात्र सड़कों पर उतरे, NTA के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह को जून 2024 में बर्खास्त किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 18वीं लोकसभा के पहले संबोधन में इसका ज़िक्र किया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पेपर लीक हुआ, लेकिन री-टेस्ट कराने से इनकार कर दिया। उसके बाद सरकार ने उच्चस्तरीय समिति बनाई, जिसने अक्टूबर 2024 में रिपोर्ट दी कि NEET को CBT, यानी कंप्यूटर-आधारित परीक्षा में बदला जाए, लेकिन दुर्भाग्य देखिए, वो सिफारिश आज तक लागू नहीं हुई।

अब 2026 में वही हुआ, जो होना ही था, क्योंकि जो व्यवस्था टूटी हुई है, उसे सिर्फ समिति बनाकर नहीं जोड़ा जा सकता। संसदीय स्थायी समिति की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट, जो कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में आई थी, उसने खुलकर लिखा था कि 2024 में NTA द्वारा आयोजित 14 बड़ी परीक्षाओं में से कम से कम 5 में “बड़ी गड़बड़ियाँ” हुई थीं। UGC-NET रद्द, CSIR-NET स्थगित, NEET-PG टाला गया, CUET के नतीजे महीनों की देरी से आए। NTA को तीन साल से भी कम समय में तीन डायरेक्टर मिले, सुबोध कुमार सिंह गए, राजेश लखानी अक्टूबर 2025 में आए, और NEET 2026 के ऐन पहले अभिषेक सिंह को कुर्सी दी गई। जिस संस्था का कप्तान ही बदलता रहे, बाकी कुछ नहीं बदला, उसका जहाज़ किनारा कैसे पाया जा सकता है?

2024 का Public Examinations Act, जिसमें 3 से 10 साल की सज़ा और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, वह भी इस “एक्जाम माफिया” को नहीं डरा पाया, क्योंकि इस कानून के तहत conviction rate सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत है। जब पकड़े जाने पर भी सज़ा न मिले, तो डर किसे होगा? जब MBBS के छात्र खुद सॉल्वर बनें, जब करियर काउंसलर रैकेट चलाएँ, जब एनक्रिप्टेड ऐप्स पर पर्चे बिकें, जब कोचिंग सेंटर परीक्षा से पहले असली सवालों वाले मॉक टेस्ट करवाएँ, तो यह सिर्फ एक भ्रष्टाचार नहीं, यह एक पूरा उद्योग है। एक सुनियोजित उद्योग, जो हर साल लाखों बच्चों की मेहनत को खरीद-बेच लेता है।

जरा सोचो इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक पहलू क्या है? यह नहीं कि पर्चा लीक हुआ। यह है कि जिस बच्ची ने 2024 से लगातार तीन बार NEET दी, हर बार किसी न किसी गड़बड़ी की वजह से उसके साथ अन्याय हुआ, वह कहती है, “It has become the new normal.” तीन साल की मेहनत, तीन बार का धोखा, और अब उसे फिर से परीक्षा देनी होगी, क्योंकि NTA ने कहा कि 7 से 10 दिनों में नई तारीख घोषित होगी, और वह बच्ची पूछती है कि “मेरे वक्त की कोई कीमत नहीं क्या?”, यह सवाल किसी एक छात्रा का नहीं, 22 लाख, 70 हजार परिवारों का सवाल है।

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करी है कि NTA को पूरी तरह भंग करने या पुनर्गठन किया जाए। एफआईआईएमए ने CBT की तरफ जाने की माँग है, न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार समिति की निगरानी में परीक्षा कराने की माँग है। बीजेपी के छात्र संगठन ABVP ने NTA दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया है, एनएसयूआई ने भी प्रदर्शन किया है, लेकिन देश के लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स एक बार फिर इंसाफ का इंतज़ार कर रहे हैं।

सवाल वही है जो हर साल पूछा जाता है और हर साल बिना जवाब के रह जाता है, आखिर कब तक ऐसा ही चलता रहेगा? कितनी बार यह देश अपने सबसे होनहार बच्चों के साथ यह धोखा करेगा? कितनी बार समिति बनेगी, कितनी बार CBI जाँच होगी, कितनी बार NTA का डायरेक्टर बदलेगा, और कितनी बार 22 लाख बच्चों की नींद और उनके माँ-बाप की उम्मीदें किसी “परीक्षा माफिया” की जेब में चली जाएँगी? जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलता, NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं रहेगी, यह एक धोखे का नाम बन जाएगी। सरकार को जवाब नहीं देना चाहिए, बल्कि सबसे पहले एनटीए डायरेक्टर को बर्खास्त कर जेल भेजना चाहिए, शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए, अन्यथा जिन युवाओं के दम पर मोदी सरकार तीसरी बार राज कर रही है, वो तीन साल बाद सत्ता से बेदखली का जवाब ढूंढ़ती रह जाएगी।

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