यह कोई भविष्यवाणी नहीं, बल्कि दुनिया की हकीकत बन चुकी है। 2026 में वर्ल्ड के टेक सेक्टर में अब तक एक लाख से ज़्यादा नौकरियाँ जा चुकी हैं। फेसबुक की पेरेंटल कंपनी Meta से लेकर Oracle तक व्यापक बदलाव हो रहे हैं, और AI इसका मुख्य कारण है। सवाल यह कि AI के कुप्रभाव से आपकी नौकरी कब तक बचेगी?
अब आगे मैं जो आपको बताने जा रहा हूं, वो कोई अफवाह नहीं है। साल 2024—25 में अकेले tech सेक्टर ने globally 1 लाख 13 हज़ार से ज़्यादा नौकरियाँ खत्म कर दी हैं, जिसका भारत में भी बड़ा हिस्सा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह छंटनी कंपनियों के घाटे की वजह से नहीं हो रही।
वैश्विक कंपनियाँ record-breaking profit कमा रही हैं, फिर भी अपनी पारंपरिक टीमें जानबूझकर छोटी कर रही हैं, ताकि उस पैसे से AI में निवेश किया जा सके। सोचिए मोटा मुनाफा कमाने के बावजूद इंजिनियरों की नौकरी जा रही है, क्योंकि कंपनियों को अब इंजिनियर नहीं, केवल एआई algorithm चाहिए, जो उनकी मर्जी से चल सके, जिसके साथ कोई माथापच्ची नहीं करनी पड़े।
एआई से उपजा संकट दुनियाभर में है, तो आप सोचिए विश्व की सर्वाधिक आबादी वाले भारत में यह संकट किस हद तक है? पिछले साल 25 हज़ार से ज़्यादा IT professionals प्रभावित हुए। दूसरे सेक्टर्स में 40 हज़ार से ज़्यादा नौकरियाँ कम हुईं, और Global Capability Centres में अकेले 6 हज़ार से ज़्यादा नौकरियाँ गईं। 2026 में यह सिलसिला और तेज़ हुआ... IT services और startups में हज़ारों और पद खत्म हुए।
भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी टीसीएस ने पिछले साल परंपरागत इंजिनियरों वाले अपने वैश्विक कर्मचारियों का 2%, यानी करीब 12 हज़ार 200 पद खत्म करने का ऐलान किया। यह कटौती मुख्य रूप से middle और senior management में होगी, और कंपनी ने साफ कहा कि यह AI रॉल आउट, नई बाज़ार प्राथमिकताओं और tight tech बजट की वजह से हो रहा है।
यह कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी डाउन साइनिंग मानी जा रही है। 7 अप्रेल की बिजनिस टुडे रिपोर्ट के अनुसार Oracle में भारत में करीब 12 हज़ार कर्मचारी प्रभावित हुए, और वैश्विक स्तर पर 30 हज़ार पदों की कटौती की गई।
एआई से जॉब सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों में ही नहीं जा रहे हैं। Bengaluru की home interiors कंपनी लाइवस्पेस ने करीब 1 हज़ार कर्मचारियों, यानी अपने कुल workforce के 12% वर्कर्स को एक झटके में बाहर कर दिया, क्योंकि कंपनी खुद को "AI-native" ओर्गनाइजेशन में बदलना चाहती है। PayPal के CEO डेन शुलमैन "AI-first" कंपनी बनाने के लिए बड़े बदलाव रह रहे हैं।
यानी IT से लेकर interior design तक, हर सेक्टर में यही पैटर्न सामने आ रहा है, लेकिन यह सिर्फ नौकरी जाने की बात नहीं है। इसका असर सीधे आम ज़िंदगी पर पड़ रहा है। 2026 की पहली तिमाही में भारत के बड़े शहरों में घरों की बिक्री 13% तक गिर गई और जानकारों ने सीधे तौर पर IT सेक्टर की छंटनी को इसका एक बड़ा कारण बताया। CareEdge Ratings की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा कहती हैं कि इन छंटनियों का सीधा असर रोज़गार और आय की स्थिरता पर पड़ता है, जिससे real estate, retail और hospitality जैसे क्षेत्रों में भी असर फैलता है।
Bengaluru में PG accommodation की माँग अचानक गिर गई, और इसके लिए भी IT सेक्टर को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है। बेंगलुरु को भारत का सिलिकॉन वेली कहा जाता है। जैसे अमेरिका के कैलेफार्निया में 'सिलिकॉन वैली' दुनिया का सबसे बड़ा टेक और इनोवेशन हब है, वैसे ही बेंगलुरु भारत में टेक्नोलॉजी, आईटी सेक्टर और स्टार्टअप्स का सेंटर है। यहां Infosys, Wipro जैसी भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियां हैं। Google, Microsoft, Amazon, Meta जैसी दिग्गज टेक कंपनियां के ओफिस और रिसर्च सेंटर्स यहीं हैं।
अब सबसे दर्दनाक तथ्य देखिए। IT इंडस्ट्री दशकों से देश के युवा graduates के एक बड़े हिस्से को रोज़गार देकर सामाजिक-आर्थिक स्थिरता बनाए रखती आई है। लेकिन आज भारत में करीब 40% युवा graduates बेरोज़गार हैं, और यह आँकड़ा पिछले चार दशकों से लगभग वैसा ही बना हुआ है।
जो IT सेक्टर पहले से लाखों बेरोज़गार graduates का एकमात्र सहारा था, अब वही सेक्टर खुद सिकुड़ रहा है। भारत के IT सेक्टर पर बारीकी से नज़र रखने वाले जाने-माने technologist Ray Wang ने आगाह किया है कि AI और automation की वजह से 2027 तक भारत में white-collar recession आ सकता है।
67 लाख लोगों को रोज़गार के साथ भारत के GDP का 7% से ज़्यादा हिस्सा बनाने वाला यह सेक्टर, जिसने दशकों तक देश के इंजीनियरों की बड़ी आबादी को नौकरी दी, अब बदलाव के सबसे बड़े दौर से गुज़र रहा है। Constellation Research के संस्थापक Ray Wang कहते हैं कि हम उस बड़े बदलाव के बीच में हैं जो white-collar काम को पूरी तरह बदल देगा।
सवाल यह उठता है कि एआई से क्या सिर्फ tech jobs पर खतरा है? ऐसा नहीं है। सिर्फ white-collar नौकरियाँ नहीं, AI और automation का असर blue-collar नौकरियों पर भी पड़ेगा। भारत में manufacturing, construction, logistics और healthcare में करीब 30 करोड़ blue-collar कर्मचारी हैं।
कुछ श्रम-प्रधान काम advanced robotics और AI से automate हो सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर नौकरी जाने की संभावना कम है, क्योंकि AI productivity बढ़ाने में मदद करेगा, न कि पूरी तरह जगह लेगा। यानी राहत की बात सिर्फ इतनी है कि blue-collar सेक्टर अभी सुरक्षित है, लेकिन white-collar युवाओं के लिए खतरा बहुत बड़ा है।
इस तेज़ बदलाव से AI engineers, data scientists और prompt specialists की माँग भी बढ़ रही है। जो कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को upskill करने में निवेश कर रही हैं, वो लंबे समय में फायदे में रहेंगी। यानी रास्ता बंद नहीं है, बल्कि रास्ता बदल गया है। जो coding सिर्फ रटकर सीखी गई थी, वो अब काम नहीं आएगी। जो AI को समझेगा, AI के साथ काम करना सीखेगा।
यह हर उस भारतीय युवा की खबर है जो engineering कर रहा है, जो IT में नौकरी का सपना देख रहा है, जो सोचता है कि degree मिलते ही ज़िंदगी सेट हो जाएगी। देश को एक बहुआयामी रणनीति चाहिए जो AI के फायदों का इस्तेमाल भी करे और संभावित बेरोज़गारी को भी संभाले, क्योंकि बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता ला सकती है।
सरकार को अभी से शिक्षा नीति में बड़े पैमाने पर AI literacy को शामिल करना होगा, और युवाओं को अभी से समझना होगा कि सिर्फ डिग्री काफी नहीं, अब हुनर ही असली पूंजी है। यानी जिस कौशल की बात सदियों से होती आई है, वही स्किल अब आपकी पूंजी बनने वाला है। एआई के इस्तेमाल और इसके कुप्रभाव पर आपकी क्या राय है?
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