केतन अग्रवाल को उस दिन पता था कि उसकी मंगेतर उसे उसके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले लोहागढ़ किले पर ट्रेकिंग के लिए ले जा रही है, उसे यह नहीं पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर है, और जिस हाथ को उसने जीवनसाथी के रूप में थामा था, उसी हाथ ने उसे 400 फुट गहरी खाई में धकेल दिया, और उसकी जगह लेने के लिए एक दूसरा इंसान उसी किले पर पहले से छिपकर बैठा हुआ था।
यह कहानी किसी फिल्म की नहीं है, यह हकीकत है, पुणे की, और इतनी ठंडे दिमाग से रची गई साजिश की कहानी है जिसे सुनकर रूह काँप जाए। पुणे के मार्केट यार्ड इलाके के दो प्रतिष्ठित व्यापारी परिवारों के बीच जब रिश्ता तय हुआ तो दोनों तरफ खुशियाँ थीं। 26 साल के केतन विशाल अग्रवाल, जिनके पिता पुणे के मशहूर रियल एस्टेट कारोबारी हैं, और 20 साल की सिया गोयल जो खुद बेकरी का व्यापार करती थी।
11 फरवरी 2026 को दोनों परिवार मिले, 19 फरवरी को रोका हुआ, और 25 नवंबर 2026 की शादी की तारीख तय हो गई। शादी के लिए 17 करोड़ रुपये के एक शाही पैलेस की बुकिंग हो चुकी थी। केतन के जन्मदिन के लिए महाबलेश्वर के फाइव स्टार होटल में 70 कमरे बुक हुए। बाली में प्री-वेडिंग शूट की योजना थी। दादा देवी अग्रवाल ने बहू के लिए हीरे का हार खरीद लिया था। हर तरफ उत्सव था, उम्मीद थी, और उसी बीच एक साजिश बुनी जा रही थी, जिसकी सिया को पहले से खबर थी, केतन को नहीं।
दरअसल सिया की मुलाकात 2025 में एक बिजनेस इवेंट में ड्राई फ्रूट्स का धंधा करने वाले 22 वर्षीय चेतन चौधरी से हुई थी और दोनों के बीच रिश्ता बन गया। परिवार के दबाव में आकर सिया ने केतन से सगाई तो कर ली, लेकिन मन में चेतन था। जनवरी से जून 2026 के बीच, यानी सगाई के दौरान, सिया और चेतन के बीच 2004 फोन काल हुए और 238 घंटे से अधिक बातचीत हुई। हर दिन औसतन दो से तीन घंटे। अब सोचिए, एक तरफ केतन शादी की तैयारी कर रहा था, दूसरी तरफ उसी वक्त उसकी मंगेतर और एक अजनबी मिलकर उसे रास्ते से हटाने का प्लान बना रहे थे।
पुलिस जाँच में सामने आया कि सिया और चेतन ने केतन की हत्या के लिए एक नहीं, तीन-तीन अलग प्लान बनाए थे। पहला प्लान था बाली। जून के पहले सप्ताह में केतन और सिया प्री-वेडिंग शूट के लिए बाली जाने वाले थे।
पुलिस का कहना है कि मुंबई जाते हुए एक फूड मॉल में सिया ने केतन के बैग से उसका पासपोर्ट चोरी से निकाला, वॉशरूम में उसे फाड़ा और फ्लश कर दिया। बाली का प्लान रद्द हो गया। शायद बाली में किसी अनजान जगह पर वारदात को हादसा दिखाने की योजना थी, जो सफल नहीं हुई। दूसरा प्लान था महाबलेश्वर, जहाँ गहरी घाटियाँ हैं, लेकिन वहाँ भी मौका नहीं मिला। और फिर आया तीसरा और अंतिम प्लान, लोहागढ़ किला।
14 जून को सिया पहली बार केतन को लोहागढ़ किले पर ले गई। किले के एक खतरनाक किनारे पर खड़े होने के दौरान सिया ने केतन को धक्का दिया, लेकिन केतन ने एक झाड़ी पकड़ ली और बच गया। सिया ने तुरंत चालाकी दिखाई, चिल्लाई "सांप! सांप!" और केतन को गले लगा लिया ताकि लगे कि वो डर गई थी। वहाँ मौजूद किसी को भी शक नहीं हुआ। केतन को भी नहीं। और उसी दिन से अगला प्लान तय हो गया।
18 जून 2026, केतन का जन्मदिन था 19 को, एक दिन पहले। उसी दिन वारदात के घंटों पहले सिया और चेतन एक कैफे में मिले, आपस में बात की, और पुलिस के अनुसार गूगल पर सर्च किए, यह जानने के लिए कि हत्या को हादसे का रूप कैसे दिया जाए, मौत को ट्रेस होने से कैसे बचाएं। 20 साल की उम्र में यह शातिरपन। फिर दोनों लोहागढ़ किले की ओर निकले, लेकिन अलग-अलग। चेतन ने अपना खुद का फोन दुकान पर छोड़ दिया ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो, और अपने एक कर्मचारी का फोन लेकर निकला।
लोहागढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज में एक शख्स हुडी पहने, 33 डिग्री की भीषण गर्मी में मुँह छिपाए दिखा, वह चेतन था। केतन और सिया साथ किले पर चढ़े। एक मोड़ पर सिया ने पीछे मुड़कर इशारा किया, और फिर दोनों ने मिलकर केतन को 400 फुट गहरी खाई में धकेल दिया। केतन वहीं शहीद हो गया। और नीचे, सिया ने जोर-जोर से रोना शुरू किया, परिवार को फोन किया, "केतन फिसलकर गिर गया।" हत्या के कुछ घंटों बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट भी डाली, "मुझे मेरे जन्मदिन पर छोड़कर चला गया।"
लेकिन इस पूरी चालाकी को धूल में मिलाया केतन की बहन की सतर्कता ने। उसे सिया का व्यवहार स्वाभाविक नहीं लगा। परिवार ने पुलिस से गहन जाँच की माँग की। पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल की टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल डेटा और गोपनीय सूचनाओं को एक साथ जोड़ा, और पूरी साजिश बेनकाब हो गई।
चेतन को एक रात पहले गिरफ्तार किया गया, सिया को अगले दिन सुबह। दोनों ने पूछताछ में जुर्म कबूल कर लिया। मावल तालुका कोर्ट ने दोनों को 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। केतन के परिवार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की माँग की है।
अब वो सवाल जो इस पूरे मामले में सबसे जरूरी है, क्या इन्हें सजा मिलेगी? भारत के कानून में हत्या की सजा धारा 302 के तहत आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक है। लेकिन यहाँ खतरा यह है कि आरोपी युवा हैं, वकील कानूनी खामियाँ ढूंढेंगे, जमानत की अर्जियाँ लगेंगी। केतन के परिवार की माँग है कि यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में जाए ताकि न्याय में देरी न हो।
और यहाँ एक बड़ा सामाजिक सवाल भी है जो यह मामला उठाता है, अगर सिया को यह शादी मंजूर नहीं थी, तो सीधे मना किया जा सकता था। परिवार से बात की जा सकती थी। सगाई तोड़ी जा सकती थी, यह सब समाज में होता है, होता रहेगा।
लेकिन किसी मासूम की जान लेना, वो भी इतनी ठंडे दिमाग से, तीन-तीन प्लान बनाकर, गूगल से तरकीबें सीखकर, यह इंसानियत की सीमा से बाहर है। केतन अग्रवाल के माँ-बाप के घर जो सपने थे, जो हीरे का हार था, जो 70 कमरों की बुकिंग थी, वह सब एक झटके में राख हो गया। उनके बेटे को न्याय मिलना ही होगा, और यह जिम्मेदारी हमारी न्याय व्यवस्था की है।
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