वीर सावरकर को गहलोत नकारते हैं, डोटासरा स्वीकारते हैं, कांग्रेस अंतर्कलह से जूझ रही है: राठौड़

राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने वक्तव्य जारी कर प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव में पोस्टर में पं. जवाहर लाल नेहरू की फोटो और देश की आजादी में वीर सावरकर के योगदान को नकारने के संबंध में दिए गए बयान को अमर्यादित, निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। 

राठौड़ ने कहा कि देश की आजादी में किसी के योगदान को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। आजादी में अकेले पंडित जवाहर लाल नेहरू का नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, वीर सावरकर और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे असंख्य राष्ट्रनायकों का योगदान रहा है। 
 
राठौड़ ने कहा कि एक ओर चंद दिन पहले ही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने देश की आजादी में वीर सावरकर के गौरवमयी इतिहास को स्वीकार किया था और अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनके योगदान को नकार रहे हैं। 

अंतर्कलह से घिरी कांग्रेस सरकार में वीर सावरकर के विषय पर विचारों में कलह से मुख्यमंत्री व प्रदेशाध्यक्ष के बीच की लड़ाई सार्वजनिक हो गई है।

राठौड़ ने कहा कि देश की आजादी में वीर सावरकर के योगदान पर सवालिया निशान लगाने से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इतिहास को पढ़ना चाहिए जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में वीर सावरकर के योगदान को स्वीकारा था और उन पर डाक टिकट भी जारी किया था। 

राठौड़ ने कहा कि लगता है अब कांग्रेस सरकार का एक ही एजेंडा है, एक परिवार विशेष का बखान कर देश की आजादी में अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को कमतर दिखाना।

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