इन दो आईएएस अधिकारियों ने बीजेपी की भजनलाल सरकार को....

सरकार चलाने के लिए सत्तारूढ लीडरशिप और ब्यूरोक्रेट्स के बीच कॉर्डिनेशन पहली शर्त होती है। ये दोनों पक्ष साथ मिलकर काम करते हैं तो सरकार का बेहतर चेहरा सामने आता है, लेकिन जब नेताओं और अधिकारियों के बीच टकराव होता है तब जनता के काम अटकते हैं और शासन में खींचतान बनकर विवाद सामने आते हैं। ऐसे हालात में लीडर या अफसर में एक का ट्रांसफर किए बिना शासन करना मुश्किल हो जाता है। 

ठीक ऐसे ही अधिकारियों के बीच यदि सौहार्दपूर्ण रिश्ते नहीं होते हैं तो प्रशासन का भयंकर चेहरा देखने को मिलता है, जो जनता के लिए नौकर का काम करने के लिए अपॉइंट होते हैं, वो ही अफसर मालिक बनकर कामों में अडंगे लगाने लगते हैं। खुद को बड़ा और दूसरे अधिकारी छोटा साबित करने में ही पूरा समय निकल जाता है, ऐसे अधिकारी सरकार में बैठकर भी जनता के काम नहीं करते हैं। 

पिछले दिनों राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत का अचानक दिल्ली ट्रांसफर हुआ सियासत में उफान आ गया। पूर्व सीएम अशोक गहलोत से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसको भाजपा सरकार की विफलता करार दिया। 

गहलोत ने कहा कि सुधांश पंत का जयपुर में मन नहीं लगता है, पिछली कांग्रेस सरकार में भी वो दिल्ली में ही रहना पंसद करते थे, तो डोटासरा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव को कोई टारगेट देकर भेजा होगा, जिसे पूरा नहीं करने के कारण मोदी सरकार ने वापस बुला लिया है। 

इस ट्रांसफर को कई दिन बीत चुके हैं और नये सीएस वी. श्रीनिवास की नियुक्ति भी हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी राजस्थान के सियासी हलकों में सुधांश पंत के ट्रांसफर की चर्चा लगातार बनी हुई है। फरवरी 2027 में रिटायर होने वाले चीफ सेक्रेटरी सुधांश पंत को 10 नवंबर को डेपुटेशन पर वापस दिल्ली बुला लिया गया। 

राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी बनने से इससे भी सुधांश पंत दिल्ली सेंट्रल डेपुटेशन पर ही थे। उन्होंने 1 जनवरी 2024 को भजनलाल की भाजपा सरकार के चीफ सेक्रेटरी का पद संभाला था। सुधांश पंत के 10 नवंबर की देर रात को दिल्ली जाने का ऑर्डर आया, जिसने सरकारी तंत्र में हलचल मचा दी। 

ये फैसला भी बिलकुल वैसे आश्चर्यचकित करने वाला था, जैसे भाजपा आलाकमान ने तमाम सीनियर विधायकों को दरकिनार कर पहली बार जीते भजनलाल शर्मा को सीएम बना दिया था। पंत के यूं अचानक तबादले ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। केंद्र सरकार ने राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत को सोशल जस्टिस मिनिस्ट्री में सेक्रेटरी बनाया है। उनकी जगह दिल्ली से भेजकर सीनियर आईएएस अधिकारी वी. श्रीनिवास को राजस्थान का चीफ सेक्रेटरी अपॉइंट किया गया है। 

अधिकारियों का ट्रांसफर प्रशासनिक फैसला होता है, लेकिन सीनियर IAS सुंधाश पंत को केंद्र की ओर से दोबारा बुला लेने की घटना लोगों को हैरान कर रही है। नये सीएस वी. श्रीनिवास के ज्वाइन करने के एक सप्ताह में ही राज्य सरकार ने 48 आईएएस अधिकारियों के भी ट्रांसफर किए हैं। इसमें सबसे चर्चित नाम शिखर अग्रवाल और अखिल अरोड़ा का रहा है। 

शिखर अग्रवाल और कृषिमंत्री किरोड़ीलाल मीणा के बीच टकराव जग जाहिर है। राज्य सरकार के इंवेस्ट प्रोग्राम में खुद सीएम भजनलाल के सामने मंच पर भी दोनों में बहस हुई थी, जो खूब सुर्खियां बनी थीं। मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि शिखर अग्रवाल और मुख्य सचिव सुधांश पंत के बीच भी लगातार पॉवर टेकिंग को लेकर विवाद चल रहा था। 

सुधांश पंत इसकी शिकायत दिल्ली भी कर चुके थे, उन्होंने ऐसे माहौल में काम नहीं करने की बात भी केंद्र से कही थी। शिखर अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। उससे पहले पूर्व वसुंधरा राजे सरकार के दौरान जयपुर में पूर्व राजपरिवार की एक जमीन पर जेडीए का कब्जा लेने के मामले में दीया कुमारी और सरकार के बीच बहुत विवाद हुआ था। तब शिखर अग्रवाल जेडीए सेक्रेटरी के तौर पर उस बेहद विवादित मामले को लीड कर रहे थे।

10 नवंबर तक माना जा रहा था कि सुंधाश पंत रिटायरमेंट होने तक राजस्थान में ही काम करेंगे, क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनावों में BJP की जीत के बाद अनुभवी सुधांश पंत को चीफ सेक्रेटरी बनाकर राज्य की ब्यूरोक्रेसी को लीड करने भेजा गया था। 

केंद्र से बेहतर तालमेल और अनुभवहीन सीएम भजनलाल शर्मा सरकार को सुचारू रूप से चलाने के लिए ही सुधांश पंत को चीफ सेक्रेटरी बनाया गया था। दिसंबर 2028 तक भजनलाल सरकार का कार्यकाल शेष है, लेकिन मुख्य सचिव का अचानक दिल्ली चले जाना हैरान करने वाला माना जा रहा है।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इसके पीछे लीडरशिप और ब्यूरोक्रेसी में टकराव अहम कारण रहा है। 'भजनलाल शर्मा सरकार यह सोच बदलना चाहती थी कि चीफ सेक्रेटरी के बजाए चीफ मिनिस्टर ही तमाम फैसले ले रहे हैं।' विपक्ष बार-बार आरोप लगा रहा था कि प्रदेश के फैसले सीएम भजनलाल से ज्यादा चीफ सेक्रेटरी की ओर से लिए जा रहे हैं। 

बीजेपी संगठन में ब्यूरोक्रेसी के हावी होने की चर्चा खूब चल रही थी। लिहाजा इसी के चलते सुधांश पंत को राज्य के ज़रूरी मामलों में तेज़ी से साइडलाइन किया जाने लगा। सामने आया कि कुछ अधिकारियों द्वारा जरूरी फाइलें कथित तौर पर प्रोटोकॉल के खिलाफ उन्हें बाइपास करते हुए CMO के ज़रिए अप्रुव्ड की गईं। अब मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि शिखर अग्रवाल और सुधांश पंत के बीच पॉवर की खींचतान चल रही थी। 

अधिकारियों के ट्रांसफर भी सुधांश पंत उनकी मंज़ूरी के बिना किए गए, जिससे खासे नाराज थे। यह भी जानकारी में आया कि सीएमओ में बैठे शिखर अग्रवाल सुधांश पंत को बिलकुल भी पंसद नहीं करते हैं। शिखर अग्रवाल सीएमओ में बैठकर मुख्य सचिव के काम में लगातार दखलअंदाजी कर रहे थे। सुनने में यह भी आया है कि सुधांश पंत ने एक रिपोर्ट दिल्ली भेजी थी, जिसमें शिखर अग्रवाल द्वारा ओवर हैड किए जाने का जिक्र किया था।

जमीन खरीद के विवाद, इंवेस्ट के लिए जमीनों के आवंटन, उद्योगों के लिए वातावरण बनाने से लेकर फॉरेन इंवेस्ट तक में कुछ अधिकारी लगातार मुख्य सचिव को बायपास कर रहे थे, जबकि प्रॉटोकोल के तहत ये सब नहीं होना चाहिए था। 

यह भी सामने आया कि चीफ सेक्रेटरी इस तरह की चीजों को विवादित करने के बजाए सीएम भजनलाल से मिलकर खत्म करना चाहते थे, लेकिन सीएमओ के अधिकारी चाहते ही नहीं थे कि सुधांश पंत जयपुर रहकर उनकी मर्जी से होने वाले कामों में रुकावट पैदा करें। इन तमाम कारणों से सीएमओ और सीएसओ के बीच जबरदस्त तनाव चल रहा था, जिसको सुधांश पंत ज्यादा नहीं बढ़ाना चाहते थे और इसी वजह से उन्होंने दिल्ली लौटने की अपील करी।

हो सकता है कि ये सब चीजें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पता नहीं हों, लेकिन इसकी जानकारी लगातार दिल्ली जा रही थी। इसका मुख्यमंत्री को जरा भी अंदाजा नहीं था कि मुख्य सचिव को दिल्ली बुलाया जा सकता है। पीएम मोदी और अमित शाह के चौंकाने वाले फैसलों के कारण सुधांश पंत का ट्रांसफर भले ही सामान्य प्रक्रिया जैसा लगे, लेकिन यह सब इतना सामान्य नहीं है। यह दर्शाता है कि राज्य में सीएमओ और सीएसओ के बीच रिश्ते सामान्य नहीं थे। कुछ अधिकारियों की एक लॉबी है, जो मर्जी से काम करने वाले अधिकारी को पसंद नहीं करती। 

दरअसल, मुख्य सचिव राज्य की ब्यूरोक्रेसी का मुखिया होता है, जो सभी अधिकारियों को अपने विभाग में तय समय पर काम करने के निर्देश देता है। जैसे मंत्रियों के कामकाज को देखने का जिम्मा मुख्यमंत्री पर होता है, उसी तरह से अधिकारियों के काम पर निगरानी रखना मुख्य सचिव का काम होता है। सुधांश पंत जब से चीफ सेक्रेटरी बने थे, तब से लगातार अफसरों को जनता के काम समय पर करने के लिए निर्देशित करते थे। 

समय पर काम नहीं होने की रिपोर्ट भी दिल्ली भेजते थे, लेकिन जब अधिकारी लगातार उनके निर्देशों को टालने लगे, तब ब्यूरोक्रेसी में ही टकराव होने लगा और अंतत: चीफ सेक्रेटरी सुधांश पंत को दिल्ली जाना पड़ा। अब सुधांश पंत मुख्य सचिव नहीं हैं और शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री कार्यालय से बाहर हो चुके हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि नये चीफ सेक्रेटरी उनका दायित्व ठीक से निभाएंगे और सीएमओ ACS के तौर पर अखिल अरोड़ा बेहतर परफोर्म करेंगे।

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